बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) बल्लबगढ़ से पलवल के लिए मेट्रो रेल चलाने का दावा करने वाली सरकार ने ढाई साल पुरानी वह बस सेवा भी बंद कर दी जिससे ग्रामीण, ऊंचागांव, फतेहपुर बिल्लौच, मांदकौल, जनौली, नयागांव होते हुए पलवल तक जाया करते थे। इसके लिए बहाना यह लगाया गया कि बल्लबगढ़ से मोहना एलिवेटेड रोड बन रहा है। कितना आश्चर्यजनक है कि एक सड़क निर्माण कार्य के चलते बस सेवा ही बंद कर दी जाए। डीएमआरसी (दिल्ली मैट्रो रेल कार्पोरेशन) ने पूरी दिल्ली में तथा आसपास के शहरों के लिए मेट्रो रेल सेवा चलाने के लिए किसी भी मार्ग को बंद नहीं होने दिया। उन्होंने अपना हर काम इतना सलीके से किया कि आवागमन करने वालों को रत्ती भर से परेशानी न हो। इसके विपरीत मोहना रोड पर जिस एलिवेटेड सड़क निर्माण की बात की जा रही है, वह इतनी बेहूदगी से बनाई जा रही है कि लोगों का आना-जाना ही दूभर हो गया।
एलिवेटेड रोड हो या अन्य सार्वजनिक निर्माण, सच्चाई यह है कि डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट में वाहनों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग बनाने का प्रावधान और इसके लिए बजट होता है। लेकिन ठेकेदार बनाता नहीं और मोटा चढ़ावा मिलने के कारण नेता व अधिकारी भी आंखें मूंदे रहते हैं। जनता का क्या है वह बेचारी अच्छे दिन आने के ख्वाब देखते हुए चुपचाप बुरा समय काट ही लेगी। इससे भी आश्चर्यजनक बात तो यह है कि केवल हरियाणा रोडवेज ने ही, अपनी बस सेवा नहीं बंद की है जबकि अन्य तमाम निजी छोटे-बड़े वाहन, जैसे-तैसे आवागमन कर रहे हैं। बेहूदगी से सड़क निर्माण करना और रोडवेज द्वारा बस सेवा का बंद कर दिया जाना दिखाता है कि राज्य सरकार जनता के प्रति कितनी उदासीन है, उसे जनता के दुख-सुख की कोई चिंता नहीं। यदि थोड़ी भी चिंता होती तो सड़क निर्माण कार्य के साथ-साथ जनता के आवागमन को बनाए रखने के लिए भी पर्याप्त प्रबन्ध किया जाता, परन्तु यह सरकार की प्राथमिकता में कहीं भी नहीं आता।
विदित है कि राज्य भर में बस चलाने का अधिकार सरकार ने अपने पास रखा हुआ है। यानी कि कोई दूसरा व्यक्ति यह काम करना चाहे तो उसे नहीं करने दिया जाएगा। हां, चोरों की तरह अफसरों को रिश्वत देकर भले ही कोई यह काम कर ले। फरीदाबाद से हरिद्वार व देहरादून की बस सेवा बंद कर दी गई है। कारण यह बताया जा रहा है कि इस रूट पर सवारियां कम हैं। अपनी नालायकी एवं कुप्रबन्धन को छिपाने के लिए हरियाणा परिवहन विभाग इस तरह का झूठा बहाना बना रहा है। यदि वास्तव में ही सवारियां नहीं है तो किसी और को इस मार्ग पर चलने की स्वीकृति क्यों नहीं देते? कुल मिलाकर मतलब यह निकलता है कि न तो खुद कुछ करेंगे और न ही किसी को करने देंगे, यही दादागीरी है सरकार की।