फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) शहर में जिस गति से अवैध निर्माण जारी हैं उसी रफ़्तार से तहसीलों में अवैध प्रापर्टियों की रजिस्ट्री का खेल भी हो रहा है। बिना एनओसी, सीएलयू वाले प्लॉट या मानक का उल्लंघन कर बनाए गए मकान, फ्लैट, दुकान आदि की रजिस्ट्री बडख़ल तहसील में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर धड़ल्ले से हो रही है। यह रजिस्ट्रियां केंद्रीय मंत्री गूजर के चहेते तहसीलदार उमेश कसाना और तहसीलदार नेहा सरन के द्वारा की जा रही हैं।
भाजपा के दस साल के भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दौरान शहर में खास कर एनआईटी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आवासीय प्लॉटों को व्यावसायिक भवनों में तब्दील किया गया। बडख़ल, अनखीर, अनंगपुर आदि क्षेत्र में पीएलपीए संरक्षित भूमि पर अनेकों प्लॉटिंग कर दी गईं। अन अप्रूव्ड क्षेत्रों में बिल्डरों ने बहुमंजिला इमारतें बना डालीं। यह सारे अवैध काम आज तक जारी हैं। अधिकतर अवैध निर्माण सत्ता पक्ष के नेताओं के या उनके संरक्षण वाले भूमाफिया द्वारा किए जा रहे हैं जाहिर है कि ऐसे में नगर निगम, डीटीपी या हूडा के अधिकारियों की हिम्मत उन्हें तोडऩे की नहीं होती।
इन अवैध प्लॉट, दुकान, मकान, फ्लैटों की रजिस्ट्री होना मुमकिन नहीं होता। इसके लिए राजनेताओं ने तहसीलों में अपने चहेते अधिकारियों की तैनाती करा दी। बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री गूजर की मंशा के अनुरूप सैनी सरकार ने उमेश कसाना को बडख़ल तहसील सौंप दी। एनआईटी की पंजाबी बिरादरी को खुश करने और उनका काम कराने के लिए नेहा सरन को भी बडख़ल तहसील दी गई। ये दोनों तहसीलदार अपने आकाओं की मंशा के अनुरूप काम कर रहे हैं, लेकिन अवैध रजिस्ट्री के लिए इनका भी नजराना तय है।
दस्तावेजों में कमी और नियमों के उल्लंघन के आधार पर नजराने की राशि पचास हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक कुछ भी वसूली जा सकती है। इन दोनों तहसीलदारों के कार्यकाल मे स्टिल्ट पार्किंग की जगह बनाई गई दुकानों की रजिस्ट्री धड़ल्ले से की जा रही हैं। बिना सीएलयू- सबडिवीजन किए ही काटे गए प्लॉटों की सैकड़ों रजिस्ट्रियां की गईं और होती जा रही हैं। तहसील में सक्रिय दलाल किसी भी अवैध रजिस्ट्री की बाकायदा गारंटी देते हैं और मेम साहब या साहब का हिस्सा पेशगी देते ही काम करा देते हैं। साहब और मेम साहब भी दलाल द्वारा लाई गई पार्टी का सारा काम प्राथमिकता से करा जल्द से जल्द रजिस्ट्री की प्रति उपलब्ध करा देते हैं। शहर में होने वाले अवैध निर्माण की सूची बना कर सीएम को रिपोर्ट भेजने वाले सीआईडी विभाग के अधिकारी भी बडख़ल तहसील में चल रहे अवैध रजिस्ट्री के खेल की ओर से आंखें बंद किए हुए हैं। जानकारों के अनुसार अवैध निर्माण पर नजर रखने वाली सीआईडी को यह अच्छी तरह मालूम है बडख़ल तहसील में इन अवैध निर्माणों आदि की धड़ल्ले से रजिस्ट्री हो रही है, कौन से दलाल सक्रिय हैं, इन दलालों को किस राजनेता का संरक्षण प्राप्त है, बावजूद इसके हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
जानकार इसका कारण बताते है कि पुलिस के दलालों की सूची बनाने के बाद राजनेताओं के गुस्से का शिकार होने के कारण सीआईडी के कई अफसरों पर गाज गिरी थी, बडख़ल तहसील की कारगुजारियां उजागर कर दोबारा राजनेताओं की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहते। दरअसल, दलालों की सूची जारी होने के बाद खट्टर ने कोई कार्रवाई नहीं की उल्टे अधिकारियों को तंग किया गया, ऐसे में बहुत संभव है कि सीएम सैनी भी इस तरह की रिपोर्ट भेजे जाने पर कोई कार्रवाई न करें और सीआईडी के अधिकारी एक बार फिर राजनेताओं की आंख की किरकरी बन जाएं।