एफएसएसएआई के होते लोग खा रहे मिलावटी सामान

एफएसएसएआई के होते लोग खा रहे मिलावटी सामान
July 28 07:10 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) मिलावटी खाद्य सामग्री के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने वाली संस्था से ज्यादा ऐसे सामान के बिक जाने के बाद जुर्माना वसूलने वाली संस्था बन कर रह गया है। शहर में डेढ़ महीने लिए गए दूध और दूध से निर्मित नमूनों में से लैब टेस्ट में चार फेल हो गए। प्राधिकरण के पदेन अधिकारी पृथ्वी सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय लैब से जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी दुकानदारों को नोटिस भेज कर जवाब मांगा जाएगा। दुकानदारों से सवाल जवाब तो होते रहेंगे लेकिन उन ग्राहकों को क्या मिलेगा जिन्होंने इन दुकानों से वही दूध और दुग्ध उत्पाद खरीद कर उपभोग किए थे जिनके नमूने फेल हुए थे। प्राधिकरण के अधिकारी नमूने तो भर लेते हैं लेकिन बाकी खाद्य सामग्री की बिक्री पर रोक तो नहीं लगती।

यह सच किसी से छिपा नहीं है कि आपूर्ति से मांग कहीं ज्यादा होने के कारण फरीदाबाद ही नहीं दिल्ली एनसीआर के अधिकतर महानगरों में मिलावटी दूध, खोया, पनीर का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है। कंपनियों के पैक्ड दूध और दुग्ध उत्पादों के अलावा करीब 24 लाख की आबादी वाले शहर में पलवल, होडल और आस पास के ग्रामीण इलाकों से दूधिए दूध लाते हैं। दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए ये उसमें पानी मिलाते हैं, गाढ़ा करने, वसा की मात्रा, वसा के अतिरिक्त दूध में मिले ठोस और प्रोटीन की मात्रा असली दूध के बराबर करने के लिए ये दूधिए उसमें यूरिया, वनस्पति तेल, मेलामाइन आदि अखाद्य पदार्थ मिलाते हैं। दूध जल्दी फटे न इसके लिए उसमें डिटरजेंट, हाइड्रोजन पर ऑक्साइड, सोडियम बाई कार्बोनेट जैसे सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायन भी मिलाते हैं। इस मिलावटी दूध से बनने वाले दुग्ध पदार्थ भी सेहत के लिए उतने ही नुकसानदेह होते हैं जितना कि यह दूध।

खाद्य पदार्थों खासकर दूध और उससे बने उत्पादोंं में मौके पर ही जांच करने के लिए पांच साल पहले शहर को एक मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन मिली थी। उस समय भी पृथ्वी सिंह ने बताया था कि मोबाइल वैन में मिलावटी दूध, पनीर, खोया व अन्य दुग्ध उत्पादों की जांच इलेक्ट्रॉनिक मिल्क एनालाइजर विद अडल्टरेशन टेस्टिंग (ई मैट) मशीन के जरिए महज 35 से 50 सेकेंड में की जा सकती है। आम आदमी भी बीस रुपये में दूध या अन्य किसी खाद्य पदार्थ की जांच करा कर मिनटों मेें परिणाम ले सकता था। मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के आने से यह फायदा हुआ था कि नमूना फेल होने पर मौके पर ही मिलावटी दूध को नष्ट करवा दिया जाता था। मोबाइल वैन में प्रतिदिन कम से कम 25 नमूनों की जांच करने का लक्ष्य था। कुछ दिन यह हुआ भी, मोबाइल वैन के कारण दूधियों का धंधा चौपट हो गया, इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की ऊपरी कमाई भी कम हो गई थी। मिलने के कुछ महीने बाद ही मोबाइल वैन सडक़ हादसे का शिकार हो गई और इस तरह रोजाना 25 नमूनों की जांच करने से अधिकारियों और दूधियों का पीछा छूटा। जानकारों के अनुसार वैन के कारण मिलावटखोरों से होने वाली कमाई खत्म होने से परेशान अधिकारियों ने ही सत्तर लाख रुपये कीमत वाली मोबाइल वैन को सडक़ हादसे की आड़ में बर्बाद करवा दिया था।

प्राधिकरण के पदेन अधिकारी पृथ्वी सिंह के अनुसार मोबाइल वैन मरम्मत होने के लिए चंडीगढ़ भेजी गई थी जो अभी तक बनकर नहीं आई है। न ही वो चाहेंगे कि वह बन कर आए, यदि मोबाइल वैन आ गई तो अभी एक महीने में दस नमूने भरने वाले अधिकारियों को प्रतिमाह करीब साढ़े छह सौ नमूने भरने पड़ेंगे, मिलावटी पाए जाने पर उक्त खाद्य सामग्री को मौके पर ही नष्ट कराना पड़ेगा। यदि मौके पर ही जांच हो जाती तो नमूनों की रिपोर्ट आने का डेढ़ महीने इंतजार नहीं करना पड़ता और उस दूषित खाद्य पदार्थ की तुरंत बिक्री रुकवा कर उपभोक्ता की सेहत खराब होने से बचाई जा सकती थी। लेकिन यदि ऐसा हुआ तो अभी तक काम के नाम पर दफ्तर में आराम करने वाले निकम्मों को फील्ड पर उतरना पड़ेगा, ऊपरी कमाई का लोभ छोड़ कर काम करना होगा लेकिन ये मुमकिन नहीं लगता।

नोटिस के नाम पर होता है खेल
मिलावटी खाद्य सामग्री खाकर आम आदमी भले ही बीमार पड़े या मर जाए एफएसएसएआई के अधिकारियों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। उनकी मोटी ऊपरी कमाई का खेल तो नमूना फेल होने के बाद शुरू होता है। नमूना फेल होने के बाद संबंधित दुकानदार को नोटिस भेज कर एक महीने में जवाब मांगा जाता है। यदि दुकानदार के जवाब से अधिकारी संतुष्ट हो जाते हैं तो उसके खिलाफ केस नहीं चलाया जाता। अधिकतर दुकानदार मोटा चढ़ावा चढ़ा कर अधिकारियों को अपने जवाब से संतुष्ट कर केस और जुर्माने की कार्रवाई से बच जाते हैं।

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Mazdoor Morcha
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