करनाल। सार्वजनिक सम्पत्ति को कुरूप करने व स्मार्ट सिटी की सुंदरता खराब करते अवैध रूप से लगाए गए विज्ञापन बोर्ड को उतारने का नगर निगम का अभियान जारी है। इसे लेकर विज्ञापन शाखा के प्रवर्तन दल ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों से अनाधिकृत रूप से प्रदर्शित किए गए विज्ञापन बोर्ड, फ्लैक्स, बैनर व पोस्टर को उतारा। मंगलवार को यह जानकारी नगर निगम आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने दी।
उन्होंने बताया कि शोरूम या दुकान के ऊपर अवैध रूप से स्ट्रक्चर खड़ा कर विज्ञापन प्रदर्शित करने तथा पेंटिंग पर पोस्टर चस्पा करने को लेकर 3 संस्थान मालिकों पर एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। इनमें कुंजपुरा रोड स्थित मैनेजर ब्लैकबेरी शोरूम तथा मधुबन स्थित ब्ल्यू स्टार हेयर सेलून ने छत पर अवैध स्ट्रक्चर खड़े किए हुए थे, जबकि सिविल अस्पताल रोड पर एगलस डायग्नोस्टिक्स की ओर से महात्मा गांधी चौक पर मेडिकल कॉलेज की दीवार पर करवाई गई पेंटिंग पर नोटिस चस्पा कर उसकी सुंदरता को खराब किया था। इसके अलावा अधिकृत साइट की बजाए अनाधिकृत रूप से विज्ञापन प्रदर्शित करने को लेकर 6 संस्थानों पर कार्रवाई की गई है। ये सेक्टर-7 स्थित आईबीटी, नेहरू पैलेस स्थित ओपीएस ज्वैल्स, राहुल हुंडई, गुरू नानक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल टेक्नोलॉजी करनाल, मुगल कैनाल स्थित बाबा दीप सिंहजी कोचिंग सेंटर तथा नीलम यूनिवर्सिटी कैथल हैं। इन सभी पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 तथा हरियाणा सम्पत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1989 के प्रावधानों के तहत अमल में लाई गई है।
उन्होंने ऐसे सभी व्यक्तियों व संस्थानों को चेताते हुए स्पष्टï किया कि कोई भी व्यक्ति नगर निगम की अधिकृत साइट के अलावा किसी अन्य स्थान पर विज्ञापन प्रदर्शित करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सम्बंधित व्यक्ति या फर्म पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। चेतावनी दी कि ऐसे लोग अपने अवैध विज्ञापन बोर्ड व फ्लैक्स इत्यादि को जल्द से जल्द स्वयं ही हटा लें अन्यथा नगर निगम बिना किसी नोटिस केजुर्माना लगाने के साथ-साथ एफआईआर दर्ज करवाएगा। उन्होंने कहा कि एक बार बोर्ड उतारने के बाद अगर कोई व्यक्ति दोबारा बोर्ड प्रदर्शित करता है, तो उसकी भी एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। इसके अतिरिक्त अगर कोई प्रिंटिंग प्रैस संचालक अधिकृत साइट के अतिरिक्त कहीं ओर विज्ञापन प्रदर्शित करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए एफआईआर के साथ-साथ जुर्माना लगाया जाएगा। निगमायुक्त ने संस्थानों के खिलाफ तो कार्रवाई कर दी लेकिन क्या उन मातहतों के खिलाफ कार्रवाई करेंगी जो अवैध विज्ञापन लगाने वालों से प्रतिमाह मोटी कमाई करते हैं। मैडम उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगी, क्योंकि यही कमाऊ पूत तो उनके जैसे आला अधिकारियों की खुशी के लिए मोटा खर्च वहन करते हैं।