फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 81 स्थित बीपीटीपी में बिल्डर कंट्रीवाइड प्रोमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड ने नक्शा, फ्लोर एरिया रेश्यो आदि को दरकिनार कर 11 फ्लैटों में अवैध रूप से अतिरिक्त निर्माण कर डाला। नियमों का उल्लंघन देखने के बावजूद आर्किटेक्ट रजनी लखानी ने बिल्डर को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया। स्थानीय निवासी सुधीर दहिया ने इसकी शिकायत की तो डीटीपी महकमा हरकत में आया। बीपीटीपी के इन 11 विवादित फ्लैटों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी है। दरअसल, यह सब डीटीपी के निकम्मेपन के कारण हुआ अन्यथा यदि आर्किटेक्ट द्वारा जारी किए गए ओसी का सत्यापन किया जाता तो पांच महीने पहले ही यह धांधली पकड़ी जाती।
बीपीटीपी में नियमों का उल्लंघन कर अवैध निर्माण कितने धड़ल्ले से किया जा रहा है, इससे समझा जा सकता है कि यहां के वीएल ब्लॉक के फ्लैट नंबर 1, 11,12, 12 ए, 14, 15,16,17,18,19 और 20 में स्वीकृत लेआउट प्लान की धज्जियां उड़ा कर निर्माण कराया गया। आर्किटेक्ट रजनी लखानी ने इनका ओसी जारी कर दिया। शिकायत हुई तो डीटीपी ने 25 मई 2025 को कार्रवाई के नाम पर इन प्लॉटों का ओसी रद्द कर दिया और बिल्डर कंपनी यानी बीपीटीपी की मालिक मेसर्स कंट्रीवाइड प्रोमोटर्स प्रा. लि. को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। बार बार बुलाए जाने के बावजूद दोनों अपना पक्ष रखने या सफाई देने डीटीपी कार्यालय नहीं पहुंचे। इसके उलट आर्किटेक्ट रजनी लखानी ने इन प्लॉटों के लिए नया ओसी जारी कर दिया, इसकी सूचना भी डीटीपी को देना उचित नहीं समझा। कार्रवाई से बचने के लिए बस पत्र लिख कर और समय मांगते रहे। जानकारों के अनुसार डीटीपी द्वारा बिल्डर को यह समय शिकायतकर्ता को मनाने के लिए बार बार दिया जाता रहा लेकिन बात नहीं बनी। बताया जा रहा है कि मजबूरी में अब डीटीपी ने इन सारे प्लॉटों की ओसी एक बार फिर रद्द कर रजिस्टी पर प्रतिबंध लगा दिया है।
प्लॉटों पर तो कार्रवाई कर दी गई लेकिन डीटीपी ने न तो आर्किटेक्ट के खिलाफ और न ही बिल्डर कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई की। इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि मामला ठंडा पडऩे या शिकायतकर्ता को संतुष्ट करने के बाद आर्किटेक्ट एक बार फिर इन प्लॉटों का ओसी जारी कर दे और डीटीपी भी चुपचाप स्वीकृति पकड़ा दे, मोटी कमाई के खेल में यह नामुमकिन नहीं है। डीटीपी को 11 प्लॉटों की फर्जी ओसी इसलिए नजर आ गई कि इनकी शिकायत की गई थी। नहरपार से लेकर ग्रीन फील्ड व डीटीपी के क्षेत्राधिकार में आने वाले हजारों फ्लैट बिना नक्शे के बनाए जा रहे हैं और आर्किटेक्ट ओसी जारी कर रहे हैं। वर्तमान में ग्रीन फील्ड में अवैध निर्माण का खेल केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का चेला बिंदे भड़ाना संभाल रहा है। जानकार बताते हैं कि पहले ये काम राजपाल मामा देखता था और बिंदे भड़ाना उसके वसूली एजेंट के रूप में काम करता था। तब वसूली गई रकम में से मामा उसको भी कुछ चुग्गा डाल दिया करता था। मामा की मौत के बाद से बिंदे ने सारी ग्रीन फील्ड और आसपास के इलाकों में अवैध बिल्डर फ्लोर बनवाने, अवैध निर्माण कराने का काम संभाल रखा है।
दरअसल ग्रीन फील्ड में भी ओसी जारी करने का अधिकार आर्किटेक्ट को ही है। ऐसे में बिंदे भड़ाना आर्किटेक्ट और डीटीपी के कारिदों की मिलीभगत से जमकर अवैध निर्माण जारी है। बीपीटीपी में तो शिकायत के बाद डीटीपी ने कार्रवाई का पाखंड किया, ग्रीन फील्ड की तरफ तो देखने की भी हिम्मत नहीं होती, क्योंकि बिंदे तुरंत ही आका मंत्री गूजर की शरण में चला जाता है। ग्रीन फील्ड और आसपास के अवैध निर्माण से होने वाली मोटी कमाई में आखिर बड़े गूजर को भी तो हिस्सापत्ती मिलती है।
नगर विन्यास के जानकार कहते हैं कि पूरे शहर में जिस तरह से अवैध निर्माण धड्ल्ले से जारी है, उनके खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर, उतनी ही तेजी से ऐसे अवैध प्लॉट फ्लैटों की रजिस्ट्रयां, व दाखिल खारिज भी हो रही है। भ्रष्टाचार केवल डीटीपी, नगर निगम या हूडा तक नहीं है, तहसीलों में भी है। पहले यह सब चोरी छिपे और छोटे पैमाने पर होता था लेकिन बीते आठ दस साल में बहुत बडे पैमाने पर और खुल कर होने लगा है। सरकार सिर्फ कार्रवाई का दिखावा करती है लेकिन धरातल पर पैसा फेको तमाशा देखो का खेल चल रहा है, जिसे सत्ता पक्ष का समर्थन हासिल है।