फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा)। शहर के विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई की लूट-बांट करने में माहिर एफएमडीए के अधिकारी अब सूरजकुंड से सैनिक कॉलोनी गुडग़ांव मोड़ तक आठ किलोमीटर में पौधरोपण पर एक करोड़ 27 लाख रुपये हड़पने की तैयारी में हैं। पौधरोपण की पूरी योजना ही हवा हवाई नजर आ रही है, आशंका तो यह है कि कागजों पर पौधरोपण दिखाया जाएगा फिर ईस्ट वेस्ट कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट या इसी तरह के किसी प्रोजेक्ट के कारण हरियाली समाप्त होने का नाटक कर रुपयों की बंदरबांट कर ली जाएगी।
एक समाचार पत्र में एफएमडीए के अधिकारियों के हवाले से छपी खबर के अनुसार सूरजकुंड चौक से अनखीर चौक होते हुए सैनिक कॉलोनी स्थित गुडग़ांव टी प्वाइंट तक आठ किलोमीटर की दूरी में साठ हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में यह पौधरोपण किया जाएगा। दूसरा दावा यह है कि पौधरोपण सेंट्रल वर्ज पर किया जाएगा। साठ हजार वर्ग मीटर के लिए आठ किलोमीटर लंबे मार्ग पर साढ़े सात मीटर चौड़ी पट्टी पौधरोपण के लिए चाहिए। रही बात सेंट्रल वर्ज की तो गुडग़ांव मोड़ से लेकर सूरजकुंड चौक तक कहीं भी इसकी चौड़ाई साढ़े सात मीटर नहीं है। अनखीर चौक से सूरजकुंड चौक तक तो सेंट्रल वर्ज एक मीटर चौड़ा भी नहीं है। एफएमडीए के ‘काबिल’ अधिकारी साढ़े सात मीटर चौड़ा सेंट्रल वर्ज कहां से लाएंगे। जानकारों के अनुसार गुडग़ांव मोड़ से सूरजकुंड चौक तक सेंट्रल वर्ज की जमीन पंद्रह हजार वर्ग मीटर से ज्यादा नहीं होगी। यानी पौधरोपण तो एक चौथाई में होगा और तीन चौथाई का पैसा हजम।
वह तो तब होगा जब पौधरोपण किया जाएगा। सुधी पाठकों को याद होगा कि चंद दिन पहले ही एमएमडीए के चीफ इंजीनियर रमेश बागड़ी ने ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। इस प्रोजेक्ट में भी सैनिक कॉलोनी मोड़ से बडख़ल होते हुए अनखीर चौक तक एलिवेटेड रोड बनाया जाना है। जाहिर है, इस एलिवेटेड ट्रैक के लिए पिलर उसी सेंट्रल वर्ज पर खड़े किए जाएंगे जिस पर एफएमडीए सवा करोड़ के पौधे लगाने जा रहा है, यानी एलिवेटेड रोड का काम शुरू होते ही सारे पौधे समाप्त हो जाएंगे और उन पर खर्च किया गया धन भी।
हालांकि अनखीर से सूरजकुंड चौक के बीच कोई एलिवेटेड रोड नहीं बनना है लेकिन यहां साढ़े सात मीटर का सेंट्रल वर्ज भी नहीं है, यानी कागजों पर साठ हजार वर्ग मीटर पौधरोपण किया जाएगा जमीन पर नहीं। यह भी हो सकता है कि एफएमडीए के अधिकारी साढ़े सात मीटर चौड़ा सेंट्रल वर्ज बनाने के लिए पूरी सड़क चौड़ी करने का कई सौ करोड़ का कोई और प्रोजेक्ट भी बना डालें।
जानकारों के अनुसार चाहे नगर निगम रहा हो या एफएमडीए बागवानी महकमा मोटी कमाई का सबसे अच्छा जरिया रहा है। हर साल पौधरोपण के लिए कई सौ करोड़ खर्च दिखाए जाते हैं और हर साल यह हरियाली हुए बिना ही समाप्त हो जाती है। पूर्व विधायक नरेंद्र गुप्ता ने तो 2023 में सड़क पर खड़े होकर पौधरोपण के नाम पर होने वाली बंदरबांट का खुलासा भी किया था लेकिन सरकार की बदनामी न हो इसलिए अचानक बैकफुट पर आ गए थे। एफएमडीए के खाऊ अधिकारी भी उसी फार्मूले पर चल रहे हैं।
बताया जा रहा है कि 1 करोड़ 27 लाख रुपये की इस योजना की स्वीकृति और फाइनेंशियल बिड 2024 में ही हो गई थी। फाइनेंशियल बिड होने के बाद अब इसका वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। समझने वाली बात यह है कि आठ किलोमीटर सड़क पर पौधरोपड़ के लिए साठ हजार वर्ग मीटर जगह ही उपलब्ध नहीं हो सकती बावजूद इसके सरकार ने इसे स्वीकृति कैसे दे दी थी। इसका यह अर्थ लगाया जा सकता है कि सरकार चला रहे सत्ताधारी और उनके पिछलग्गू अधिकारी भी हवा हवाई प्रोजेक्ट को स्वीकृति देकर मोटी हिस्सा पत्ती हासिल करने में जुटे हैँ।