फरीदाबाद (म.मो.) सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़े व निर्माण तो धड़ाधड़ हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम का बुलडोज़र केवल उन गरीब लोगों पर ही चल पाता है जो ज़मीन पर बैठ कर अपना सामान बेचते हैं। नगर निगम के पिछवाड़े लम्बे-चौड़े दशहरा मैदान में करीब 30-35 लोग फोल्डिंग चारपाइयों पर ऊनी व सूती कपड़े रख कर बेच रहे थे कि पांच फरवरी को निगम का बुलडोज़र वहां पहुंच गया और उनके सारे सामान को तहस-नहस कर डाला। विदित है कि ये गरीब लोग अपने जैसे गरीब ग्राहकों के लिये सर्दी के दिनों में इस तरह की दुकानदारी करते हैं। बिना किसी यातायात को बाधित किये सडक़ से दूर खुले व खाली मैदान में बैठे ये लोग नगर निगम को नहीं सुहाये।
दूसरी ओर बीते कई सप्ताह से निगमायुक्त यशपाल यादव गली-गली घूम कर सडक़ों से अतिक्रमण हटाने, अवैध कब्ज़े व अवैध निर्माण समाप्त करने की दुहाई देते रहे हैं। उसके बावजूद न तो सडक़ों व गलियों से अतिक्रमण हटे और न ही अवैध कब्ज़े व निर्माण। रेहड़ी-फड़ी वालों को बिना वैकल्पिक स्थान दिये हटाने का जो प्रयास किया था, वह भी विफल होना तय था जो हुआ भी। एक-दो नम्बर चौक से दो नम्बर की ओर जाने वाली मुख्य सडक़ पर अनेकों दुकानें, खास कर दुपहिया वाहन विक्रेता बड़ी संख्या में अपने वाहनों व सामान को रख कर सडक़ को घेरे रहते हैं। इन वाहन विक्रेताओं ने पूरे अभियान के दौरान एक दिन भी सडक़ से अपने वाहनों को नहीं हटाया था। सवाल पैदा होता है कि आखिर निगमायुक्त की हिम्मत क्यों नहीं पड़ती इन्हें छेड़ पाने की?
एनआईटी बस अड्डे के सामने से लेकर तहसील तक तीसियों लोग फोल्डिंग चारपाइयों पर गर्म कपड़े रख कर कई वर्षों से बेचते आ रहे हैं, आज भी बेच रहे हैं। खरीदारों की भीड़ के चलते वहां अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके बावजूद नगर निगम को यह नहीं अखरता; अखरे तो केवल वे लोग जो सडक़ से परे खुले मैदान में बैठ कर कपड़े बेच रहे थे। कहीं इसके पीछे बस अड्डे के सामने बैठे कपड़ा विक्रेताओं का दबाव तो नहीं था? जाहिर है खुले मैदान में समानांतर बाजार चलाये जाने से उन लोगों की बिक्री घट रही होगी। ऐसे में माना जा सकता है कि सडक़ घेर कर बैठने वाले अवश्य ही निगम अफसरों को कुछ चुग्गा-पानी देते होंगे।