फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दलाली-भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे विधायक धनेश अदलखा ने अपने आका केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर को हिंदुस्तान का राजा बता डाला। बीते दिनों अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए उसने बिजली निगम के एसडीओ को निर्देश दिया कि केंद्रीय मंत्री के गांव मेवला महराजपुर में बिजली के टेढ़े-मेढ़े खंभे दुरुस्त करो, जो तारें लटकी हुई हैं उन्हें दुरुस्त करो। कहा कि सड़कें जो टूटी फूटी हैं उन्हें सही करवाएंगे।
नए नए विधायक बने अदलखा के मुंह से वो सच्चाई भी निकल गई जिसे हुकूमत करने वाले नेता अब तक जनता से छिपाते रहे हैं। अपने आप को जनता का सेवक बताने वालों की हकीकत अदलखा ने बता दी कि ये हमारे राजा हैं। वो राजा हैं तो ये वजीर, इन्हें जनता की सेवा से कोई लेना देना नहीं। कहने को बेशक देश से राजतंत्र समाप्त हो गया लेकिन अदलखा जैसों की मानसिकता बताती है कि वे जनता की आखों में धूल झोंककर आज भी राजशाही चलाने की क्षमता रखते हैं। जनता में भाजपा सरकारों के खिलाफ भयंकर असंतोष होने के बावजूद लोकसभा और विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने जो पक्षपातपूर्ण भूमिका अदा की, उसकी बदौलत ही इन्हें सत्ता मिली है। बावजूद इसके अदलखा केंद्रीय मंत्री गूजर को राजा और खुद को ऐसा वजीर मान रहा है जिसके हर सही गलत काम पर अधिकारी गर्दन झुका कर हां में हां मिलाते रहें और जनता सवाल न करे।
अगर कृष्णपाल गूजर राजा हैं तो क्या ऐसे राजा पर लानत नहीं होनी चाहिए जो बीते 11 साल में अपने गांव की ही सड़कें सही न बनवा सका हो, बिजली के खंभे टूटे, लटके और गिरे पड़े हों लेकिन उन्हें सही नहीं करवा सका हो। गूजर खुद अपने गांव से भाजपा के पार्षद प्रत्याशी और अपने भूमाफिया चेले संदीप चपराना को नहीं जितवा सके तो वह कैसे राजा। हां, वह भ्रष्टाचार, गुुंडई करने वालों और झूठ को बढ़ावा देने वालों के राजा हो सकते हैं। बिजली निगम के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा लाइन लॉस यानी बिजली चोरी केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के गांव मेवला महाराजपुर में होती है। यदि बिजली चोरी पकडऩे का अभियान चलाया जाता है तो गूजर के कार्यालय से फोन आने लगते हैं।
मेवला महराजपुर के गूजर ग्रेटर फरीदाबाद और खासकर सोसायटियों में दबंगई, मारपीट करते हैं, राजा गूजर का संरक्षण प्राप्त होने के कारण पुलिस भी उन पर हाथ नहीं डालती। पिछले दिनों ग्रेटर फरीदाबाद स्थित आरपीएस सवाना में गूजर के गुंडे कुबूलपुर खादर के रतन सिंह नागर ने अपने गुर्गों के साथ जमकर मारपीट की थी। राजा गूजर के रसूख के आगे पुलिस भी नतमस्तक रही और गुंडागर्दी करने वाले गुंडों के खिलाफ शिकायत तक दर्ज नहीं होने दी गई। राजा गूजर के संरक्षण में मेवला के गूजर सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं और सरकारी अधिकारी चुपचाप बैठे हैं। राजा गूजर के संरक्षण में ठेकेदार उनके ही गांव में ऐसी सड़कें बनाते हैं जो चंद महीनों में ही टूट फूटने लगती हैं।
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि दरअसल, सत्ता का इस्तेमाल कर दलाली और लूट कमाई करने के उद्देश्य से पहली बार विधायक बना अदलखा गूजर के पदचिह्नों पर चलकर उससे भी आगे निकलने की तैयारी कर रहा है। इसीलिए विधायक के बाद सांसदी के सपने देख रहा अदलखा अब मंत्री गूजर के गढ़ में सक्रियता बढ़ा रहा है। जहां गूजर अपने चेले संदीप चपराना को नहीं जितवा पाए वहीं अदलखा उनके गढ़ से बिंदे भड़ाना, सतीश चंदीला को जिता कर लाने का दावा करता घूम रहा है। नगर निगम चुनाव की जीत का सेहरा अपने सिर पर बांधते हुए सभी जीते हुए पार्षदों की मीडिया के सामने परेड करवाना भी अदलखा की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। बेचारे नव निर्वाचित पार्षद अपने क्षेत्र के विकास की कार्ययोजना बना ही रहे हैं और अदलखा ने निगम के अधिकारियों को सभी वार्डों में विकास कार्यों की सूची थमा दी। अदलखा की इस तानाशाही से पार्षदों में कसमसाहट और रोष नजर आने लगा है। विधायक द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में दखल देना और निगम के अधिकारियों को निर्देश देना पार्षद अपने अधिकारों का हनन बता रहे हैं लेकिन सत्ता के डर से मुंह नहीं खोल रहे हैं। अदलखा अगर ऐसे ही तानाशाही करता रहा तो वह दिन दूर नहीं कि नगर निगम भी विधायक और पार्षदों का अखाड़ा बन कर रह जाए।