फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम की तोडफ़ोड़ शाखा में नौकरी का अधिकतर समय गुजार कर शहर भर में अवैध निर्माण करवाने वाले सहायक अभियंता सुरेंद्र हुड्डा इन दिनों साप्ताहिक बाजारें हटवाने का पाखंड करने में लगे हैं। कार्रवाई के लिए बहाना तो एनजीटी के आदेश को बनाया जा रहा है लेकिन भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि यह खेल विधायक धनेश अदलखा के कहने पर हो रहा है। उसका कहना है कि बडख़ल विधानसभा में चाहे स्मैक कारोबार, साप्ताहिक बाजारें, अवैध निर्माण आदि इनके खिलाफ तब तक कार्रवाई करो जब तक ये लोग मेरी शरण में आकर घुटने न टेक दें। शरणागत होने वालों को धंधा करने की छूट मिल जाएगी। संभवत: यही कारण है कि एई सुरेंद्र हुड्डा ने कार्रवाई के बाद सोमवार बाजार फिर से लगवा दी।
इस सारे काम के लिए विधायक भ्रष्टाचारी अदलखा ने केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के तलुए चाटने वाले सहायक इंजीनियर सुरेंद्र हुड्डा को चुना है। इसके दो कारण बताए जा रहे हैं। पहला, इंजीनियरिंग की फर्जी डिग्री होने के कारण अयोग्य होने के बावजूद मंत्री गूजर की अनुकंपा से बेलदार से सहायक इंजीनियर पद तक पदोन्नति पाने वाला हुड्डा अदलखा की भी शरण में आकर उसका खास चेला बन चुका है। दूसरा, भर्ती होने के बाद से आज तक हुड्डा लगभग हमेशा ही तोडफ़ोड़ शाखा में तैनात रहा है। इस शाखा में रहते हुए उसने अवैध निर्माण तोडऩे के बजाय मोटा नजराना वसूल कर ऐसे निर्माण कराने में महारत हासिल कर रखी है। वर्तमान में भी उसकी मिलीभगत से पूरे शहर में हजारों अवैध निर्माण, अवैध कॉलोनियां न केवल बन और बस रही हैं बल्कि रिहायशी, कृषि और औद्योगिक प्लॉटों पर बिना सब डिवीजन, सीएलयू के अवैध व्यवसायिक इमारतें बनाई जा रही हैं। जाहिर है कि यह सारा खेल बहुत मोटी लेनदेन के बाद ही हो सकता है, बेईमानी का काम बहुत ईमानदारी से करने वाला सुरेंद्र हुड्डा सारी लेनदेन कर आला अधिकारियों की पाई पाई पहुंंचाता है, उसकी इसी ईमानदारी और कर्मठता के कारण अधिकारी उसे तोडफ़ोड़ शाखा में ही बनाए रखे हैं।
फार्मेसी काउंसिल मेंं बी फार्म अभ्यर्थियों से रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस जारी करने के नाम पर पांच, दस हजार रुपये तक रिश्वत लेने वाले अदलखा को भी सुरेेंद्र हुडा की ये दोनों खूबियां समझ आ गईं और उसे यह जिम्मेदारी सौंपी है। मुल्ला होटल से बुद्ध विहार पार्क के सामानान्तर लगने वाली साप्ताहिक बाजार बीते सोमवार भी लगाई गई लेकिन छोटे आका यानी अदलखा के इशारे पर सुरेंद्र हुड्डा पुलिस बल के साथ जा पहुंंचे और दुकानें हटवाने का फरमान सुना दिया। बताया कि एनजीटी के आदेश पर ग्रीन बेल्ट खाली करवानी है। करीब साढ़े तीन सौ रुपये खर्च कर जगह, टेबल, लाइट और पानी बुक कराने वाले सैकड़ों दुकानदार परेशान हो उठे और नुकसान होने की चिरौरी करते हुए दुकान लगाए रहने की मिन्नतें कीं। दुकानदारों का कहना था कि बाजार लगवाने वाला ठेकेदार सोमवार को सुबह से ही सड़क किनारे टेबल, कुर्सी, रॉड, फेसिंग आदि करने लगता है, अगर बाजार बंद ही करवानी थी तो उसे यह सब लगाने से रोका जाना चाहिए था, उसका सामान हटवा देते तो दुकानें ही नहीं लग पातीं। जब दृुकानदारों ने इन चीजो का किराया अदा कर सामान लगा दिया तब हटवाया जा रहा है।
जानकारों के अनुसार ठेकेदार ही वसूली गई रकम का मोटा हिस्सा जो कि एक से डेढ़ लाख रुपये तक होता है, निगम के अधिकारियों को पहुंचाता है। तो भला हुड्डा साहब ठेकेदार और अपनों की कमाई को कैसे ठोकर मारते। इसलिए दुकानें लगने के बाद कार्रवाई करने पहुंचे। फिर वही हुआ, हुड्डा साहब ने कुछ समझाया तो दुकानदार अदलखा की शरण में गए और हाथ पैर जोड़े, बाकी काम तो हुड्डा को करना था। इसके बाद सोमवार बाजार बहाल हो गई, बताया जा रहा है कि बाजार को हटाने का यह सिलसिला कुछ सप्ताह तक और चल सकता है। इससे एनजीटी में पेश करने के लिए कार्रवाई रिपोर्ट भी तैयार हो जाएगी और शरणागत दुकानदारों में विधायक का रसूख भी बढ़ेगा।
सुधी पाठकों को बता दें कि सेामवार बाजार जहां लगाई जाती है, उसे तो छोडि़ए मुल्ला चौक से लेकर तीन नंबर मस्जिद चौक होते हुए प्याली चौक तक कहीं ग्रीन बेल्ट नजर नहीं आती। बाजार सड़क के किनारे और नाले के बीच लगती है जिसे निगम अधिकारी ग्रीन बेल्ट बताते है। अगर ये ग्रीन बेल्ट है तो नजर क्यों नहीं आती। देखा जाए तो मुल्ला होटल से प्याली चौक तक निगम जिसे ग्रीन बेल्ट बताता है सिर्फ गंदगी और कूड़े के ढेर और अतिक्रमण का शिकार है। केवल वही जगह सप्ताह भर साफ नजर आती है जहां सोम बाजार लगती है। समझने वाली बात यह है कि एनजीटी का आदेश केवल ग्रीन बेल्ट से अतिक्रमण हटवाने का ही नहीं बल्कि उसे हरा भरा करने का भी है। अगर निगम के भ्रष्ट और निकम्मे अधिकारियों को यह बात समझ में आती है तो वह पहले मुल्ला चौक से प्याली चौक तक ग्रीन बेल्ट विकसित करें। इसके बाद अतिक्रमण न होने दें। अगर ग्रीन बेल्ट होगी तो बाजार नहीं लगेगी, लेकिन चटियल मैदान होगा तो कोई भी इसका फायदा उठाएगा।