हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना करने से भी नहीं बाज आ रहे अधिकारी फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम में अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे ट्यूबवेल ऑपरेटर राजेंद्र सिंह के खिलाफ खुन्नस खाए अधिकारी उसे बेघर करने के हथकंडे अपना रहे हैं। नगर निगम ने उसे सेक्टर 17 में 2016 में एक जर्जर आवास एलॉट किया था। बेचारे ने अपनी जेब से करीब पांच लाख रुपये लगाकर उस आवास को रहने योग्य बनाया तो आरडब्ल्यूए वालों की नीयत उस आवास पर खराब हो गई। खास बात यह है कि राजेंद्र सिंह का आवास नगर निगम की जमीन पर है और सेक्टर 17 आरडब्ल्यूए के क्षेत्राधिकार से भी बाहर है, बावजूद इसके आरडब्ल्यूए वाले बेवजह की आपत्तियां लगाकर राजेंद्र का आवास खाली करा खुद कब्जा करने के चक्कर में लग गए।
क्योंकि राजेंद्र सिंह नगर निगम में अपनी पदोन्नति की लड़ाई भी लड़ रहे थे इसलिए तत्कालीन निगम अधिकारियों ने आरडब्ल्यूए वालों से साज बाज करके सितंबर 2016 में बिना कोई नोटिस और उचित कारण बताए उनकी गैर मौजूदगी में परिवार को बाहर कर आवास को सील कर दिया था। राजेंद्र हाईकोर्ट गए तो न्यायाधीश ने कार्रवाई पर सख्त नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की थी कि निगम अधिकारियों ने एक छोटे कर्मचारी के जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन किया है और तुरंत आवास की सील खोल कर राजेंद्र को रहने देने का आदेश जारी किया था। न्यायालय के आदेश पर आवास डीसील तो कर दिया लेकिन अधिकारी राजेंद्र सिंह के पीछे पड़ गए। 2019 में मरम्मत की आड़ में जबरन आवास खाली कराने की साजिश रची। आवास खाली कराने के लिए तोडफ़ोड़ दस्ता और पुलिस बल भी लेकर पहुंचे। इस बार भी हाईकोर्ट ने राजेंद्र सिंह का पक्ष लिया और मामले की जांच पंजाब के डिप्टी एडवोकेट जनरल (डीएजी) को सौंपी।
मार्च 2023 में डीएजी ने मौका मुआयना किया और राजेंद्र के आवास को विवाद रहित वह रहने के सवर्था योग्य बताया। इसके बावजूद राजेंद्र को बेघर करने पर आमादा निगम अधिकारियों ने डीएजी को कई अन्य वैकल्पिक आवास दिखाए लेकिन उन्होंने सुरक्षा, जर्जर हालत आदि दृष्टिकोण पर उन आवासों को रहने योग्य नहीं पाया। अधिकारियों ने इसके बावजूद दूसरे आवास देने का दबाव डाला तो डीएजी ने स्पष्ट कर दिया कि मध्यस्थता के जरिए नगर निगम और राजेंद्र सिंह के आवास का मामला सुलझाया जाए। इस पर निगम अधिकारियों ने उन्हें हरिमंदिर के पास एक सुनसान और असुरक्षित जगह पर आवास देने का ऑफर किया जिसे राजेंद्र सिंह ने ठुकरा दिया।
बीते दो दिसंबर को राजेंद्र चंडीगढ़ हाईकोर्ट गए हुए थे, इस दौरान एसडीएम अमित गुलिया और गुडग़ांव के सीनियर टाउन प्लानर, एक्सईएन ओल्ड संदीप गुप्ता व अन्य अधिकारी हरिमंदिर स्थित आवास पहुंचे और फोन कॉल कर राजेंद्र को मौके पर बुलाया। चंडीगढ़ में होने के कारण उन्होंने असमर्थता जताई और उसी समय हाईकोर्ट में इसके खिलाफ अर्जी डाल दी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद नगर निगम अधिकारियों की ज्यादती मानते हुए आदेश दिया कि आवास का आवंटन तय करने के लिए डिप्टी डायरेक्टर यूएलबी, पंचकूला, एसडीएम की टीम जांच करेगी। राजेंद्र सिंह के अनुसार अदालत ने इसे न्यायालय के आदेश का उल्लंघन माना क्योंकि कार्रवाई में न तो डीडी यूएलबी को शामिल किया गया न ही पीडि़त पक्ष को, बल्कि एकतरफा कार्रवाई करते हुए एसटीपी गुडग़ांव, एक्सईएन पहुंचे थे।
राजेंद्र सिंह ने निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा, एसडीएम अमित गुलिया और एक्सईएन संदीप को पत्र लिख कर मांग की है कि उनकी गैर मौजूदगी में हुई कार्रवाई रद्द कर हाईकोर्ट के आदेशानुसार डीडी यूएलबी, एसडीएम द्वारा जांच कराई जाए जिसमें उसे और नगर निगम के अधिकारियों को कम से कम तीन दिन पहले सूचना देकर पक्षकार के रूप में शामिल होने बुलाया जाए।