आचार संहिता लगते ही निगम अधिकारियों ने बढ़ाई अवैध निर्माण की लूट

आचार संहिता लगते ही निगम अधिकारियों ने बढ़ाई अवैध निर्माण की लूट
September 23 17:54 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगते ही शहर में, खासकर बडख़ल विधानसभा क्षेत्र में अवैध निर्माणों की बाढ़ आ गई है। अवैध निर्माण के लिए भूमाफिया की मनचाही जमाई कॉलोनी में निवर्तमान शिक्षामंत्री की पंजाबी बिरादरी के साहिल अरोड़ा अंडे वाला द्वारा कई एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर न केवल फैक्टरी बनाई जा रही है, अवैध रूप से प्लॉट भी काटे जा रहे हैं। विधायक सीमा त्रिखा पर यह आरोप लगते रहे हैं कि उनका भूमाफिया से सीधा सौदा था कि तीन प्लॉट कब्जाओ दो तुम्हारे एक हमारा, ज़ाहिर है कि ऐसे में जमाई कॉलोनी के ‘बड़ा खेत में हजारों वर्ग गज़ क्षेत्र में हो रा लगते ही शहर में, खासकर बडख़ल विधानसभा क्षेत्र में अवैध निर्माणों की बाढ़ आ गई है। अवैधनर्माण में भी पंजाबी बिरादरी के भूमाफिया साहिल अरोड़ा को भी सीमा के कारण ही अभयदान मिला है। बताते चलें कि कभी अंडों की रेहड़ी लगाने वाला साहिल अरोड़ा पहले विपुल गोयल का चेला था, उनके मंत्री पद से हटते ही साहिल ने सीमा त्रिखा और भूमाफिया मंत्री कृष्णपाल गूजर का दामन पकड़ लिया था। बताया जा रहा है कि वर्तमान में वह गूजर के संरक्षण मेंं जमीनों पर कब्जा करने में जुटा है।

संरक्षित होने के कारण अरावली पहाडिय़ों पर गैर वानिकी कार्य खास कर रिहायशी या व्यावसायिक गतिविधियां पूर्णतया प्रतिबंधित हैं। सैनिक कालोनी के पास स्थित पहाडिय़ों पर बीते दो दशक में सैकड़ों अवैध कब्जे किए गए कि यह इलाका जमाई कॉलोनी के नाम से पहचाना जाने लगा। न्यायालय के आदेश पर इस कॉलोनी में कई बार तोडफ़ोड़ अभियान भी चलाया गया लेकिन वोट बैंक की राजनीति करने वालों के कारण इस पहाड़ी का प्राकृतिक रूप नहीं लौटाया जा सका, जो भी सत्ता में आया उसके समर्थकों ने इस पहाड़ी पर अवैध कब्जे करवा डाले।

जमाई कॉलोनी के बीच खाली पड़ी कई एकड़ जमीन जिसे बड़ा खेत के नाम से जाना जाता है, पर पंजाबी बिरादरी के भू माफिया ने अवैध निर्माण शुरू कर दिया है। नगर निगम हो या जिला प्रशासन इन अवैध निर्माणों पर अंकुश न लगाने का सबके पास एक ही बहाना है कि आचार संहिता लागू है, अभी चुनाव और राजनीतिक दलों की सरगर्मियां ही प्राथमिकता पर हैं, चुनाव के बाद कार्रवाई की जाएगी। आचार संहिता लागू होना तो बहाना है, दरअसल, अधिकारी ही भू माफिया की मिलीभगत से यह कब्जे करवा रहे हैं, जाहिर है कि करोड़ों के इस खेल में उनको भी मोटा माल मिलता होगा वर्ना, आचार संहिता किसी भी शासकीय काम को रोकने पर कोई भी पाबंदी नहीं लगाती। अवैध निर्माण, सरकारी जमीन पर कब्ज़े रोकना भी प्रशासकीय काम है जिस पर अधिकारी बिना किसी राजनीतिक दखलंदाजी के तोडफ़ोड़ या कब्जा मुक्त करने की कार्रवाई कर सकते हैं। अधिकारियों के पास एक बहाना होता है कि यदि इस समय कार्रवाई करते हैं तो सभी राजनीतिक दल वाले चुनाव खराब होने की दुहाई देकर कार्रवाई रुकवा देते हैं। यहां भी अधिकारी झूठ बोलते हैं। केवल सत्ताधारियों को वोट टूटने का डर रहता है इसलिए वो कार्रवाई करने से रोकते हैं, मानो अधिकारी नियम-कानून और सेवा नियमावली से नहीं इन राजनेताओं के आदेश से बंधे हों।

सीएम फ़्लाइंग स्क्वाड भी मानो अवैध निर्माण बंद करवाने नहीं बल्कि उगाही करने का काम कर रहा है। अवैध निर्माण पर कार्रवाई के नाम पर सीएम फ्लाइंग स्क्वाड ने चंद महीने पहले पाली इलाके में बड़े पैमाने पर तोडफ़ोड़ की थी। जहां तोड़ फोड़ की गई थी वहां अब नई इमारतें बन कर तैयार हैं।

ज़ाहिर है कि सीएम फ्लाइंग की मर्जी और मिलीभगत के बिना ये अवैध इमारतें नहीं बन सकती हैं। जमाई कॉलोनी में भी बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माण की जानकारी सीएम फ्लाइंग को है लेकिन अब जब निर्माण पूर्व सीएम खट्टर की बिरादरी वाली सीमा त्रिखा का करीबी कर रहा हो तो फिर वो कार्रवाई कैसे कर सकती है, उसे तो गरीब, मज़दूरों के छोटे मोटे मकान ही नजऱ आते हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार बिल्डर-भूमाफिया, राजनेता और प्रशासन का भ्रष्ट गठजोड़ हमेशा ही चुनाव संहिता लागू होने के बाद बहुत से अवैध काम करता है, जिनमें अवैध कब्जा और निर्माण भी शामिल है। भाजपा सरकार में क्योंकि चुनाव आयोग भी सत्ता पक्ष की सिफारिशों को येन-केन प्रकारेण लागू करने को तैयार रहता है, ऐसे में अधिकारी भी मंत्री-विधायक के आगे नतमस्तक रहते हैं। कहने को तो चुनाव आयोग चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले करता है लेकिन सच्चाई ये है कि यह सब सत्तादल के इशारे पर और उसकी सहमति से ही किया जाता है ताकि नया अधिकारी भी चुनाव में सत्ता दल के प्रत्याशी की जी हुजूरी करे।

यदि इसके बावजूद कोई अधिकारी ईमानदारी से काम करता है तो चुनाव आयोग से अनुमति लेकर भी उसे चुनावी प्रक्रिया के दौरान हटा कर अपना मन माफिक अधिकारियों को बैठाया जा सकता है। भाजपा इस तरह की सिफारिशें करने और अनुमति लेने में माहिर है।

जमाई कॉलोनी में हजारों वर्ग गर्ज पर हो रहा अवैध कब्जा भी इसी भ्रष्ट गठजोड़ का नतीजा है। वैसे भी निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास अवैध कब्जा और निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करतीं क्योंकि यह निगम के अधिकारियों की मोटी ऊपरी कमाई का बड़ा साधन है। जब बात सत्ताधारी सीमा त्रिखा और उनकी बिरादरी के भूमाफिया की हो तो एसडीओ, एक्सईएन से लेकर निगमायुक्त तक सब चुनाव आचार संहिता की पट्टी आखों पर बांधने का नाटक करते हैं।

इस चुनाव में सीमा त्रिखा का जो भी भविष्य होगा वो तो अलग बात है, सच्चाई ये है कि पंजाबी बिरादरी के भूमाफिया के जरिए उन्होंने अवैध जमाई कॉलोनी की बेशकीमती जमीन पर अपनी बेनामी मुहर लगा दी है।

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Mazdoor Morcha
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