मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
पुडुचेरी में करीब पांच हजार करोड़ रुपये के नकली मिलावटी दवाओं का रैकेट चलाने के आरोपी एन राजा उर्फ वल्लियप्पन उर्फ राजशेखर को सीबीआई जांच से बचाने के आरोप में हाल ही में गिरफ्तार हुए आईपीएस दीपक गहलावत देश को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले पुलिस अधिकारियों में गिने जाते हैं।
मूल रूप से सोनीपत के माजरा गांव निवासी दीपक अहलावत के पिता भी इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके पिता रोहतक में कांस्टेबल भर्ती हुए और सब इंस्पेक्टर, इंस्पे क्टर तक पदोन्नत हुए। उनकी मां रोहतक में एएनएम रही हैं इसी जिले में दीपक की प्रारंभिक शिक्षा हुई। इसके बाद सोनीपत के डीएवी पब्लिक स्कूल और फिर करनाल के कुंजपु सैनिक स्कूल में आगे की पढ़ाई की। आईआईटी रुडक़ी से इंजीनियरिंग की डिग्री ली। 2011 में सिविल सेवा परीक्षा में 103वीं रैंक हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए। उन्हें हरियाणा काडर मिला, वह 2018 में पलवल और 2021 में चरखी दादरी के पुलिस अधीक्षक रहे। 2023 में गुरुग्राम हेडक्वार्टर में भी पोस्टेड रहे। 2024 में डेपुटेशन पर उन्हें ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी में क्षेत्रीय निदेशक का जिम्मा सौंपा गया। उन्होंने 2025 में अमेरिका के अलबामा में वल्र्ड पुलिस एंड फायर गेम्स में 35 वर्ष से अधिक आयु वाले 74 किलोग्राम भारवर्ग में पुश-पुल कंपीटिशन में कांस्य पदक जीता था। सीबीआई का आरोप है कि दीपक ने आरोपी राजा से यह कहा था कि उसके सीबीआई में अच्छे संपर्क हैं और वह जांच में राहत दिला देंगे। उन पर आरोप है कि राजा से तीन करोड़ में सौदा तय किया और हवाला के जरिए एक करोड़ रुपये भी पेशगी लिए। हालांकि अदालत ने सवाल उठाए कि सीबीआई में दीपक के कौन से संपर्क हैं, और क्या वह संपर्क राजा को राहत दिलाते, इसकी जांच क्यों नहीं की गई? दीपक ने भी आरोपों को गलत करार देते हुए अदालत को बताया उनके खाते में एक भी रुपया नहीं है। करीब पांच हजार करोड़ की मिलावटी और नकली दवा के रैकेट में मास्टर माइंड से पूछताछ में कई राजनेताओं के भी नाम सामने आने की बातें चल रही हैं, सीबीआई रैकेट के कितने सदस्यों तक पहुंचती है।