डॉ. रामवीर केवल आत्मप्रदर्शन ही है जिनका जीवनदर्शन फोटो जीवी नेताओं से दुखी है आज वतन।
लगता झूठ बोलने का ही लेते हैं ये वेतन कभी कभी तो हद कर जाते इनके मिथ्या वचन।
मंच मिले तो बक सकते हैं कुछ भी ऊल जलूल दावा करते इनसे होती नहीं कोई भी भूल।
निराधार मुद्दों को देते रहते ज्यादा तूल असल समस्याओं के बारे रुख रखते हैं कूल।
चौबिस घंटे ये चुनाव में ही रहते मशगूल यहां रैलियां वहां रैलियां फिरें उड़ाते धूल।
अन्धभक्त भक्ति में मस्त हो बरसाते हैं फूल ब्रेनवाश के कारण बुद्धि हो जाती है स्थूल।
व्हाट्सैप जैसे मंचों पर ट्रोलर्स का पूल एवं फेक न्यूज फैलाने वाले इनके टूल।
अंग्रेजों के चरण चूमना ही था जिनका उसूल बेशर्मी देखो कहते हैं खुद को नरशार्दूल।