फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और केंंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का दलाल- भ्रष्टाचारी चेला धनेश अदलखा विधायक क्या बना खुद को सीएम नायब सैनी व अन्य मंत्रियों से ऊपर समझने लगा है। सीएम नायब सैनी के महकमे विजिलेंस को अपनी मुट्ठी में बताता है तो नगर निगम के अधिकारियों को उंगलियों के इशारे पर नचा कर स्थानीय शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल का महकमा अपने ढंग से चला रहा है। एसडीएम बडख़ल त्रिलोकचंद तो सारे काम छोड़कर उसके पिछलग्गू बन उसके साथ ऐसे घूमते रहते हैं मानो वह उसके निजी सचिव हों। विधानसभा के सभी थाने चौकियों में अदलखा ने अपने चेले चपाटे लगा ही रखे हैं। ये पुलिस वाले भी कानून को छोड़ कर आक़ा अदलखा के हुक्म पर पीडि़त को ही धमकाने से भी बाज नहीं आते।
अदलखा के निशाने पर अब प्रदेश के कद्दावर अहीर नेता राव इंद्रजीत सिंह की बेटी-स्वास्थ्य मंत्री आरती राव हैं। निरीक्षण के नाम पर वह आए दिन बीके सिविल अस्पताल पहुंच कर स्टाफ पर दबदबा बनाता है और अस्पताल की सेवाओं में कमियां निकाल कर स्वास्थ्य मंत्री आरती राव को बेकार मंत्री साबित करने में जुटा है। एक सप्ताह पहले अदलखा पत्तलपाड़ मीडिया की फौज लेकर ओपीडी समय में अस्पताल निरीक्षण का नाटक करने पहुंच गया। ‘माननीय’ के आते ही पीएमओ, एसएमओ, ईएमओ आदि स्टाफ मरीजों को छोड़कर उनकी जी हुज़ूरी में जुट गया, मरीज बेचारे लाइन में लगे इंतजार ही करते रहे।
अदलखा ने पहले दवा वितरण कक्ष का दौरा किया, उसने कर्मचारियों पर विधायकपने की धौंस दिखाई। लंबी लाइन देख कर दवा बांटने वाले कर्मचारियों को निलंबित करने का आदेश सुना दिया, बिना यह जांच कि ये लंबी लाइनें हैं क्यों? मानो अस्पताल में इतना अतिरिक्त स्टाफ है कि इनके निलंबित होते ही दूसरा स्टाफ लग जाएगा और मरीजों की लाइन तुरंत खत्म हो जाएगी। लोगों के सामने नाटक किया लेकिन कर्मचारियों से यह जानने की कोशिश नहीं की कि कौन सी दवाएं कम हैं, इन दवाओं की पूर्ति के लिए क्या किया जा रहा है, फालतू का आदेश कि मरीजों को दवा की कमी नहीं होनी चाहिए कह कर चलता बना, मानो उसके यह कहने से सारी दवाओं का स्टॉक पूरा हो जाएगा। विधायक के सामने ही मरीजों ने बताया कि सिट्रिजिन, लीवोसिट्रिजिन, कीटोकोनाजॉल दवाएं और त्वचा रोग के मल्हम नहीं मिल रहे। जनता के सामने सीएमओ, स्टोर इंचार्ज को हड़का कर विधायक महोदय ने जनता को संतुष्ट किया लेकिन दवाएं नहीं दिला सके। बोले डीजी हेल्थ से बात कर सारी समस्या दूर करवा दूंगा। टोरा बनाने को पीएमओ डॉ. राम भगत से बोल दिया कि सारा फार्मासिस्ट स्टाफ बदल दो, यह नहीं बताया कि नया कहां से लाओ।
रेडियोलॉजी विभाग में भारी भीड़ थी, मरीजों को अपना रुतबा दिखाने के लिए वह अल्ट्रासाउंड कक्ष में जा पहुुंचा, ड्यूटी पर तैनात सोनोग्राफर व अन्य स्टाफ काम छोड़ कर विधायक महोदय का लेक्चर सुनने लगे और मरीज बेचारे परेशान होते रहे। यहां बीते डेढ़ साल से खराब पड़ी करीब एक करोड़ रुपये कीमत वाली एक्सरे मशीन के बारे में स्टाफ ने बताया और ठीक कराने के लिए 14 लाख रुपये जारी कराने की मिन्नत की, इस पर विधायक महोदय बिना जवाब दिए खिसकते बने। अदलखा ने निरीक्षण के नाम पर करीब पौने दो घंटे बीके अस्पताल में एसडीएम त्रिलोकचंद, एसएचओ एसजीएम नगर, सीएमओ, पीएमओ, नर्सिंग स्टाफ हेड, फार्मेसी स्टाफ हेड, रेडियोलॉजी स्टाफ हेड आदि अस्पताल स्टाफ को आगे पीछे घुमाया लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं करा सके। अदलखा बीते सोमवार एक बार फिर सीएमओ कार्यालय पहुुंचे और करीब एक घंटा बैठक की। बैठक के बाद पत्तलपाड़ मीडिया को उन्होंने बताया कि सीएमओ साहब को समझा दिया गया है कि स्टोर में जो उपलब्ध हों सिर्फ वही दवाएं डाक्टर लिखें, चाहे मरीज मरे या जिए। ओपीडी एयरकूल की जाए। जानकारों के अनुसार अदलखा बैठक करने नहीं बल्कि चेले चपाटे पुलिसकर्मियों के बैठने के लिए कमरा तलाशने आए थे।
इसके लिए उन्होंने आयुष विभाग की बिल्डिंग के कमरे पसंद किए लेकिन पीएमओ-सीएमओ ने पुलिस चौकी ओपीडी के पास होना बेहतर बता कर पीछा छुड़ाया। विधायक महोदय, इमरजेंसी तो कभी ओपीडी के पास कमरा बनाए जाने पर अड़े रहे। जानकारों के अनुसार मदर-चाइल्ड केयर यूनिट प्रोजेक्ट के लिए बीके की पुलिस चौकी अस्थायी तौर पर खाली कराई जानी है, पुलिसकर्मियों के लिए रहने की व्यवस्था का सिरदर्द पुलिस आयुक्त, डीसीपी को इतना नहीं है जितना विधायक को है, मानो उनके पास और कोई काम ही नहीं हो। राजनीति के जानकारों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने बीेके अस्पताल में स्टाफ, दवाओं की उपलब्धता आदि व्यवस्था में काफी सुधार किया है। यहां की व्यवस्था चाक चौबंद रखने के लिए उन्होंने एडीजी हेल्थ डॉ. वीरेंद्र यादव को लगा रखा है जो समय समय पर निरीक्षण कर कमियों को दूर कराते रहते हैं। बीके अस्पताल परिसर में निर्माण कार्य जारी हैं इस कारण कुछ अव्यवस्थाएं हैं, यह जानने के बावजूद अदलखा बार बार अस्पताल का दौरा कर कमियां निकाल रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि नगर निगम में दखलंदाजी करने वाले अदलखा के हौसले बुलंद हैं, जिस तरह वह कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के महकमे में भ्रष्ट अधिकारियों से मिलीभगत कर लूट कमाई कर रहा है वैसे ही स्वास्थ्य विभाग से कमाई कर पाए या नहीं लेकिन मरीजों पर तो अपना रुतबा जमा ही रहा है। फार्मेसी काउंसिल का चेयरमैन रहने के कारण उसे स्वास्थ्य विभाग में लूट कमाई की तरकीबों की पहले से ही जानकारी है। अधिकारियों को दबाव लेने के लिए ही अदलखा ने बीके अस्पताल के कमाई वाले विभागों की कमियां निकालनी शुरू की हैं। उसकी हरकत से अंधभक्तों में संदेश जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के बस की कुछ नहीं है, विधायक जी ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करवा सकते हैं। भाजपा के जानकारों के अनुसार इस पार्टी में खुद को नेता बनाने वाले नेता-विधायकों को बहुत जल्दी खुड्डे लाइन लगाया जाता है, अनिल विज इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, खुद विपुल गोयल को इसी तेजी के कारण पांच साल तक खुड्डे लाइन लगाया गया था, अब अदलखा उसी लीक पर चल रहा है, देखना है कि मोदी-शाह की रबड़ स्टैंप कहने जाने वाले सीएम सैनी नायब सैनी, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव, कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल कब तक अदलखा को बर्दाश्त करते हैं।