मोदी का नारी शक्ति वंदन अधिनियम फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) युवती से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही मोदी-शाह ने नारी शक्ति वंदन अधियिनियम का राग छेड़ा है। पत्तलपाड़ गोदी मीडिया और पूरे देश में भाजपाई कार्यकत्रियों से इसे मास्टर स्ट्रोक कहलवा कर माहौल बनाया जा रहा है। कोई भी चुनाव जीतने के लिए देश को सांप्रदायिकता, अगड़े-पिछड़े जैसी अराजक मुद्दों में उलझा कर स्वार्थ सिद्ध करने वाले मोदी-शाह की यह चाल बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर छवि चमकाने के तौर पर देखी जा रही है।
बंगाल चुनाव में बेरोजगारी, महंगाई, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की गिरती साख जैसे मुद्दे छिपाने के लिए मोदी-शाह ने संसद में 2023 में ही सर्वसम्मति से पास हो चुके नारी शक्ति वंदन अधिनियम का शोशा उछाला है। इसे हाईलाइट करने के लिए सभी भाजपा शासित राज्योंं में बुधवार को रैलियां आयोजित की गईं। शहर में भी नारी शक्ति वंदन अभियान स्कूटी रैली निकाली गई। नारी सशक्तिकरण की पोल तो तब ही खुल गई जब रैली को झंडी दिखा कर रवाना करने वाली मेयर प्रवीण बत्रा जोशी ने अधिनियम की शान में ऊपर से भेजा गया कसीदा पढ़ा, यही भाषण अन्य जगहों पर हुई रैलियों में प्रवक्ताओं से पढ़वाया गया, यानी बत्रा नारी सशक्तीकरण पर अपने विचार व्यक्त करने तक को स्वतंत्र नहीं थीं, बातें चाहे जो बनाई जाएं।
मेयर प्रवीण बत्रा जोशी ने ऊपर से भेजा गया भाषण पढ़ा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। इस अधिनियम के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जिस अधिकार की महिलाओं को प्रतीक्षा थी, अब वह हकीकत बन रहा है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी। इस भाषण में यह नहीं बताया गया कि यह आरक्षण किस तारीख से लागू होगा, सन 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से इस विधेयक को पास करने के बावजूद 2024 चुनाव में भाजपा को आरक्षण देने से किसने रोका था? दरअसल, भाजपा का उद्देश्य आरक्षण देने की आड़ में परिसीमन करके हिन्दी पट्टी में अपनी सीटें बढ़ाने का रहा है।
भाजपा की कुटिल नीति के अनुसार अपनी राजनैतिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ उन दक्षिणी राज्यों की राजनैतिक हैसियत को कमजोर करना भी है जहां इनकी दाल नहीं गलती। समझने वाली बात यह है कि आरक्षण का और परिसीमन का कोई ताल्लुक बनता नहीं है इसे भाजपा जबरदस्ती बनाने की कोशिश कर रही है। रैली में जबरन लाई गई कुछ महिलाएं तो भाजपा के महिला सशक्तीकरण की पोल खोलती नजर आईं। इनका कहना था कि यदि भाजपा महिलाओं का इतना ही सम्मान करती तो केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर नगर निगम सदन की बैठक में मेयर प्रवीण बत्रा जोशी के अधिकार छीन कर खुद अध्यक्षता न करते। भाजपा में महिलाओं की इतनी ही इज्जत की जाती तो महिला पहलवानों का यौन शोषण करने वाले ब्रजभूषण सिंह, नाबालिग लड़की से बलात्कार करने वाले कुलदीप सिंह सेंगर, महिला कोच का यौन शोषण करने वाले संदीप सिंह, छात्राओं का यौन शोषण करने वाले स्वामी चिन्मयानंद के अलावा महिला उत्पीडऩ करने वाले हंसराज, करु नागराजन, अरुण कुमार पुथिला, प्रमोद कोंधरे जैसों को संरक्षण न देती। कम से कम गैंगरेप के आरोपी मोहनलाल बड़ौली को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तो न बनाती।
रैली सत्तारूढ़ दल की हो तो अधिकारी भी कार्यकर्ता न बनें ऐसा कहां मुमकिन है, तो मेयर प्रवीण बत्रा जोशी के कंधे से कंधा मिलाकर एडीसी अंजलि श्रोत्रिया, एसडीएम हनी बंसल, सीडीपीओ मीनाक्षी चौधरी और नेहरू कॉलेज की प्रिंसिपल रितिका गुप्ता भी भाजपा कार्यकत्री की भूमिका पूरी वफादारी से निभाती नजर आईं। रैली सफल दिखाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को अधिक संख्या में युवतियां-महिलाएं जुटाने का लक्ष्य दिया गया था। आम महिलाएं तो आने से रहीं इसलिए आजमाया हुआ फार्मूला अपनाया गया और नेहरू कॉलेज सहित अन्य कॉलेज-स्कूलों का महिला स्टाफ, छात्राएं बटोरी गईं, भाजपा कार्यकत्री भी स्कूटी लेकर पहुंचीं, कहने की जरूरत नहीं है कि स्कूटियों में पेट्रोल भी आयोजकों की ओर से भरवाया गया। हालांकि आम जनता ने रैली पर कोई ध्यान नहीं दिया लेकिन पालतू मीडिया, इन्फ्लुएंसर, भाजपा आईटी सेल वफादारी निभाते हुए इसे भव्य बताने में जुटे रहे। रैली के कारण लगे जाम में फंसे लोगों ने माथा जरूर पीटा।