फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा)। सेक्टर 25 स्थित हनुमान मंदिर के पास बीती सोमवार शाम एंगल से लदी ट्रैक्टर-ट्राली एक और सड़क हादसे का कारण बनी। करीब आठ दस फीट बाहर निकली एंगल वाली ट्रैक्टर-ट्राली के चालक ने अचानक ब्रेक लगा दी जिससे उसके ठीक पीछे चल रही कार में ये एंगल घुस गए। कार चला रहे सेक्टर 23 संजय कॉलोनी निवासी प्रकाश मुद्गल सिर में चोट लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। शहर में सरिया लदी ट्रैक्टर-ट्राली से यह पहला हादसा नहीं है, 18 अगस्त 2025 को तड़के दिल्ली से पलवल की ओर जा रही पिकअप चालक की भी इसी तरह सरिया लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली के अचानक ब्रेक लगाने से मौत हो गई थी। सीकरी चौकी से चंद कदम की दूरी पर हुए इस हादसे में पुलिस दोषी ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक को लंबे समय तक तलाश ही नहीं सकी। इसी तरह बीती एक फरवरी को पृथला फ्लाईओवर के पास सड़क पर खड़े ट्रैक्टर ट्राले में पीछे से ऑटो रिक्शा के टकराने से पांच लोग गम्भीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने इतनी बड़ी घटना का संज्ञान तक नहीं लिया था। करीब एक सप्ताह बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होकर आई कविता नामक महिला ने शिकायत दी तक कहीं जाकर पुलिस ने केस दर्ज किया, तब तक दोषी ट्रैक्टर-ट्राला और उसका चालक न जाने कहां गायब हो चुके थे। आए दिन इस तरह की कोई न कोई छोटी बड़ी घटनाएं होती रहती हैं लेकिन पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता आंखें बंद किए बैठे हैं।
पुलिस आयुक्त महोदय यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर तिमाही-छमाही यातायात अभियान चलाने का आदेश जारी करते हैं लेकिन उनके मातहत इसे वसूली अभियान बना डालते हैं। यानी बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, ओवर स्पीड, राँग साइड, नंबर प्लेट पॉल्युशन सर्टिफिकेट आदि का उल्लंघन करने वालों का चालान काट कर सरकारी खजाना भरा जाता है। पुलिस आयुक्त महोदय कभी सड़क पर खतरनाक ढंग से सरिया, गर्डर, उपकरण लादे मौत की सवारी बन कर दौड़ रहे बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर ट्रॉलियों के खिलाफ अभियान चलाने का आदेश नहीं देते।
वह दावा करते हैं कि कोई भी अवैध वाहन सड़क पर नहीं चल सकता। यानी सड़क पर चलने वाले वाहन का रजिस्ट्रेशन, हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट, बीमा होना जरूरी है। व्यावसायिक वाहनों के लिए कॉमर्शियल नंबर, कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंसधारी चालक हो, साथ ही उसका रूट परमिट जारी किया गया हो। शहर में दो हजार से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना नंबर प्लेट और रूट परमिट के कहीं भी दौड़ रहे हैं। वाहन पर लादा गया कोई भी भार किसी भी सूरत में वाहन से बाहर नहीं लटकना चाहिए लेकिन ये ट्रैक्टर बीस फीट की ट्रॉली पर 30 से 36 फीट लंबे सरिया लटका कर चलते हैं। इस तरह के जोखिम पूर्ण वाहन हाईवे पर प्रतिबंधित हैं बावजूद इसके यातायात पुलिस के सामने से ही इस तरह के ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिल्ली-मथुरा हाईवे पर दौड़ते देखे जा सकते हैं। यातायात मामलों के जानकार बताते हैं कि अब पुलिस का काम केवल वसूली करना रह गया है, यातायात पुलिस आपको सिर्फ उसी चौक चौराहे मुस्तैद दिखाई देगी जिस रूट से किसी वीआईपी को गुजरना है, आम जनता को जाम से जूझना पड़े उसकी बला से। यहां तक कि वीआईपी मूवमेंट होने पर हाईवे का यातायात तक रोक दिया जाता है। वीआईपी ड्यूटी के अलावा यातायात पुलिस रोजाना और सप्ताहवार दिए जाने वाले चालान के टारगेट पूरा करने में जुटी रहती है।
यातायात निरीक्षक, उपनिरीक्षक और उनकी टीम को प्रत्येक दिन पंद्रह से बीस वाहनों का चालान काटने का लक्ष्य दिया जाता है। जाहिर है इनका ध्यान यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के बजाय चालान करने पर लगा रहता है, अक्सर ये लोग चौक चौराहों पर खड़े होते हैं और ग्रीन लाइट होने पर आने वाले वाहनों को रोक कर जांच करते हैं, इससे यातायात में बाधा भी होती है लेकिन इनका उद्देश्य तो ज्यादा चालान काट कर साहब को खुश करना ही रह गया है। खास बात यह है कि ये लोग दो पहिया, चार पहिया वाहनों को तो रोकते हैं लेकिन खतरनाक ढंग से लोहा-लंगड़ आदि लाद कर सामने से गुजर रहे बिना नंबर प्लेट, बिना इंडिकेटर, रिफ्लेटर वाले ट्रैक्टर-ट्रॉले इनसे नहीं रोके जाते। शहर की सड़कों पर खराब होकर बीच में खड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली भी अक्सर देखे जाते हैं। चालक भी आगे पीछे सुरक्षा चेतावनी तिकोन लगाए बिना ही वाहन को लावारिस छोड़ कर चलते बनते हैं, इनसे टकरा कर कोई हादसे का शिकार होता है तो होता रहे।
पुलिस आयुक्त सतेंद्र गुप्ता जिस तरह चालान काटने का टारगेट देते हैं उन्हें चाहिए कि उसी तरह सड़क पर सरिया, विभिन्न प्रकार का लोहा, ईंट-पत्थर, बालू, रेता, पानी के टैंकर आदि लेकर चल रहे बिना किसी दस्तावेज के चल रहे ट्रैक्टरों के खिलाफ भी अभियान चलवाएं। इनके बंद होने से यातायात व्यवस्था में सुधार तो होगा, सड़क हादसों में भी कमी आएगी। दरअसल, यातायात व्यवस्था अभियान चलाने से नहीं सुधरता, न ही वीआईपी मूवमेंट पर सक्रिय होने से बल्कि यह रूटीन काम है। यातायात पुलिस को वसूली पर लगाने के बजाय उसके मुख्य कार्य वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही सुनिश्चित करने का रोजाना का टारगेट दिया जाना चाहिए, इससे आम जनता को राहत मिलेगी।