फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बीते रविवार 22 मार्च को सेक्टर 14 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की मीटिंग वहां के सामुदायिक भवन में प्रात: बुलाई गई थी। इसका एजेंडा वार्षिक हिसाब-किताब प्रस्तुत करने का था। इसे जानने के लिए आरडब्ल्यूए के करीब सौ सदस्य मीटिंग में हाजि़र आए थे। मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिलीप वर्मा ने सदस्यों के सामने लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। जांच पड़ताल के बाद लेखा जोखा स्वीकार कर लिया गया, इसके तुरंत बाद लंच शुरू हो गया।
जब लंच करके लगभग सभी लोग चले गए तो पीछे बचे राम स्वरूप गांधी गिरोह के चंद षणयंत्रकारियों ने वर्मा से त्यागपत्र लिखवा लिया कि वह स्वास्थ्य कारणों के चलते सेक्टरवासियों को और सेवा नहीं दे सकते। इसके बाद तुरंत उस श्रीमती आशू मेहरा को अध्यक्ष घोषित कर दिया गया जो कुछ समय पूर्व ही दिलीप वर्मा के मुकाबले नागरिक जनता द्वारा बुरी तरह हराई गई थी। मार्च 2023 में हुए चुनाव में दिलीप वर्मा ने इसी आशू मेहरा को इतनी बुरी तरह से हराया था कि दो साल बाद मार्च 2025 में हुए चुनावों में उनका मुकाबला करने की हिम्मत आशु मेहरा नहीं जुटा पाई। वर्मा की कारकर्दगी से संतुष्ट सेक्टरवासियों ने उनके विरुद्ध किसी को भी चुनाव में नहीं उतारा लिहाजा वे निर्विरोध आरडब्ल्यूए प्रधान चुने गए थे। यहां सवाल यह पैदा होता है कि आखिर गांधी गिरोह को आशु मेहरा में ऐसे कौन से सुरखाब के पर नजर आ रहे हैं जो निर्विरोध चुने हुए वर्मा को इस तरह गैर संवैधानिक तौर पर हटा कर उसे को प्रधान बना दिया
मार्च 23 में हुए चुनाव में दिलीप वर्मा ने इसी आशू मेहरा को इतनी बुरी तरह से हराया था कि दो साल बाद मार्च 25 में हुए चुनावों में उनका मुकाबला करने की हिम्मत आशु मेहरा नहीं जुटा पाई। वर्मा की कारकर्दगी से संतुष्ट सेक्टरवासियों ने उनके विरुद्ध किसी को भी चुनाव में नहीं उतारा लिहाजा वे निर्विरोध आरडब्ल्यूए प्रधान चुने गए थे। यहां सवाल यह पैदा होता है कि आखिर गांधी गिरोह को आशु मेहरा में ऐसे कौन से सुरखाब के पर नजर आ रहे हैं जो निर्विरोध चुने हुए वर्मा को इस तरह गैर संवैधानिक तौर पर हटा कर उसे को प्रधान बना दिया। इस बात का जब सेक्टरवासियों को पता लगा तो करीब अस्सी आजीवन सदस्यों ने विरोध प्रकट करते करते हुए वर्मा को लिखा कि यह कार्रवाई गलत है, आरडब्ल्यूए की बैठक केवल हिसाब-किताब पास करवाने के लिए बुलाई गई थी न किसी चुनाव करवाने के लिए।
दूसरे, अगर अध्यक्ष त्यागपत्र देता भी है तो उपाध्यक्ष उसकी जगह कार्यभार संभालता है। यदि किसी अन्य व्यक्ति को अध्यक्ष बनाना हो तो उसके लिए बाकायदा चुनाव कराए जाने का प्रावधान आरडब्ल्यूए के संविधान में वर्णित है, किसी गिरोह विशेष द्वारा अपने मनचाहे किसी भी व्यक्ति को इस तरह अध्यक्ष पद नहीं सौंपा जा सकता। उक्त लिखित पत्र 27 तारीख को तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप वर्मा को दिया गया था जिन्हें 31 मार्च तक अपने पद पर रहना था। उन्होंने 31 मार्च तक कोई जवाब न देकर केवल 2 अप्रैल को घोषित कर दिया कि वे तो पदमुक्त हो चुके हैं, सदस्यों के उक्त पत्र पर कोई फैसला तो अगला प्रधान ही लेगा। इस घटना को लेकर तमाम सेक्टरवासियों में भयंकर अफरा तफरी का माहौल है। इस तरह की कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन समझा जा रहा है, यह कार्रवाई लोकमत पर किसी गिरोह विशेष का कब्जा माना जा रही है जिसे स्वीकार करने को सेक्टर वासी तैयार नहीं हैं। इसके भीतरी कारणों की खोजबीन अभी जारी है, यदि कोई साक्ष्य सामने आए तो अवश्य ही मज़दूर मोर्चा द्वारा प्रकाशित किए जाएंगे।