मुजेसर अग्निकांड : रिश्वतखोर अधिकारियों के कारण गई छह लोगों की जान

मुजेसर अग्निकांड : रिश्वतखोर अधिकारियों  के कारण गई छह लोगों की जान
March 04 08:27 2026

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मुजेसर गांव में कालकाजी लुब्रिकेंट नामक कंपनी की वर्कशॉप में हुए अग्निकांड में वर्कशॉप मालिक के बेटे और पुलिसकर्मियों सहित छह लोगों की मौत हो चुकी है। इन मौतों का जितना जिम्मेदार वर्कशॉप मालिक है उससे कम प्रशासन के वो अधिकारी भी नहीं हैं जो नियम और सुरक्षा उपाय लागू कराने के बजाय वसूली में लगे रहे। सजा तो उन अधिकारियों को भी दी जानी चाहिए जिनके कारण यह हादसा हुआ।

मुजेसर गांव वालों के अनुसार करीब छह महीने पहले भी इसी वर्कशॉप में केमिकल में आग लगने से इसी तरह ड्रम फटा था। घटना से डरे गांव वालों ने भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिला प्रशासन से लेकर नगर निगम, डीटीपी सबको शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। गांव वालों के मुताबिक घटना के बाद जांच भी हुई, अग्निशमन विभाग से लेकर नगर, पुलिस सब पहुंचे थे। उसके बाद सब टांय-टांय फिस्स, सारी फैक्टरियां-वर्कशॉप आज भी बदस्तूर जारी हैं।

यदि उस घटना से सबक लेकर दमकल विभाग वालों ने वर्कशॉप प्रबंधन को पर्याप्त अग्निशमन उपकरण लगाने का दबाव दिया होता तो शायद इतना गंभीर हादसा टाला जा सकता था। छह महीने बाद भी दमकल विभाग द्वारा एनओसी के लिए दबाव न डालना लेनदेन की ओर इशारा करता है। यदि ऐसा न होता तो कम से कम दमकल विभाग वर्कशॉप के खिलाफ कोई कार्रवाई करता। नगर निगम की तोडफ़ोड़ शाखा या तो वहां जाती है जहां सत्तापक्ष के नेताओं ने भेजा हो या वहां जहां से उगाही नहीं हो रही होती। उन इलाकों में थोड़ी सी तोडफ़ोड़ कर अतिक्रमणकर्ताओं को संदेश दिया जाता कि यदि हफ्ता नहीं दिया तो सब कुछ उजाड़ दिया जाएगा और सामान भी कब्जे में ले लिया जाएगा। मुजेसर गांव वालों ने तो कई बार इस जगह अतिक्रमण हटाने की मांग की, यहां तक कि खुद अपने आवास के सामने अतिक्रमण और अवैध कब्जा करने वाला पार्षद रवि भगत भी दावा करता है उसने नगर निगम प्रशासन से इलाके में अतिक्रमण, अवैध कब्जों को हटवाने की मांग की थी। बावजूद इसके एसडीओ सुरेंद्र हुड्डा और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का चहेता जेई हर्ष चपराना ने इस ओर झांका तक नहीं। हालात ये हैं कि नगर निगम की जमीन पर कब्जा कर गोदाम, वर्कशॉप वाले अपना सामान इतना फैलाए हुए हैं कि तीस फीट चौड़ी सड़क भी दस फीट रह गई है। समझा जा सकता है कि मोटी शुकराना राशि पहुंचने के कारण ही निगम का तोडफ़ोड़ दस्ता यहां कार्रवाई न करने की जोड़ तोड़ में लगा रहता था।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शायद ही इस इलाके का रुख करते हों, गांव वालों के अनुसार इस इलाके में आए दिन कबाड़ी आग लगाते रहते हैं, कभी प्लास्टिक जला कर तार अलग करने के लिए तो कभी धातु अलग करने के लिए, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण वाले इस ओर रुख नहीं करते। करते हैं भई नोटिस जारी करते हैं, इसके बाद प्रदूषण फैलाने वाले लोग प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को ‘संतुष्ट’ कर देते हैं और सब कुछ बदस्तूर जारी रहता है। सरकार यदि इस तरह के हादसों को लेकर गंभीर है तो छह लोगों की हत्या का केस संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी दर्ज करा उन्हें गिरफ्तार कर जेल भिजवाए। यदि एक भी अधिकारी को सजा हो गई तो बाकी अधिकारी इस तरह की घटनाओं को किसी भी कीमत पर रोकने का प्रयास करेंगे। यदि सरकार ऐसा नहीं करती हैं तो मानना गलत नहीं होगा कि वह भी अवैध कब्जा करने वालों और भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रही है।

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Mazdoor Morcha
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