फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) प्रदेश की राजनीति में वजूद खोने के करीब पहुंच चुकी जननायक जनता पार्टी के अज्ञात से जिलाध्यक्ष और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी नलिन हुड्डा बीते दिनों भाजपा में शामिल हुए। बेचारगी देखिए कि उन्हें भाजपा में शामिल होने का कोई ऑफर नहीं था, बल्कि उन्होंने खुद ही कार्यक्रम का आयोजन किया और कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को बुलाया, मंत्री ने उन्हें चंद कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा का पट्टा पहना कर पार्टी में शामिल कराया।
नलिन का भाजपा में शामिल होना राजनीति में मौका परस्ती का बेहतरीन उदाहरण हो सकता है। जानकारों के अनुसार नलिन को राजनीति में जिंदा रहने के लिए भाजपा पकडऩी जरूरी थी तो कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने यह जानते हुए कि नलिन का कोई जनाधार नहीं है उन्हें इसलिए भाजपा में शामिल किया है कि वह केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के विरोधी हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि 2018 में अस्तित्व में आई जजपा के संस्थापक दुष्यंत चौटाला ने भाजपा से गठबंधन कर राजनीतिक हाराकीरी (आत्महत्या) की थी। 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा ने उन्हें उपमुख्यमंत्री बना दिया। इस काल में बेशक दुश्यंत ने जी भरकर सत्ता की मलाई तो खाई लेकिन जनता से कटते चले गए। भाजपा की यह बहुत पुरानी और सफल नीति रही है कि जिस पार्टी को खत्म करना है उसके साथ गठबंधन कर सरकार बना लो, इसके बाद उसकी जड़ें खोद डालो। मायावती, उद्धव ठाकरे आदि इसके उदाहरण हैं, भाजपा ने दुष्यंत के साथ भी यही किया। इस दौरान भाजपाइयों ने जजपा की जड़ें खोद डालीं, तो 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन तोड़ दिया गया।
ऐसी ही जनाधार विहीन जजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अस्तित्व साबित करने के लिए प्रत्याशी उतारे। चौटाला परिवार पहले भी कभी फरीदाबाद में अपनी पार्टी का विस्तार नहीं कर सके थे। ऐसे में उन्होंने मूल रूप से रोहतक के महाबीर सिंह हुड्डा के पौत्र नलिन हुड्डा को टिकट दिया जिसका कोई राजनीतिक आधार या जनाधार नहीं था। टिकट मिलने तक उसके नाम को कोई जानता तक नहीं था। दुष्यंत को ऐसे निराधार व्यक्ति के अलावा कोई मिल भी नहीं सकता था। क्योंकि नलिन को निर्देश था कि भाजपा पर ही हमलावर होना है इसलिए उन्होंने हर चुनावी सभा में कृष्णपाल गूजर की जमकर आलोचना की। यहां तक कि गूजर भी नलिन के आक्रामक प्रचार से काफी असहज हो गए थे, हालांकि वह रैलियों में बड़ी जीत का दावा करते लेकिन उन्हें नलिन के दुष्प्रचार से वोट कटने का डर सताने लगा था।
नलिन चुनाव तो हार गए लेकिन भाजपाइयों में उनकी छवि कृष्णपाल गूजर के कट्टर आलोचकों की बन गई। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में करीब साढ़े तीन साल बाकी हैं, इतने साल तक सत्ता से दूर रहना नलिन के लिए असहनीय था, तो उन्होंने भाजपा में शामिल होने की सोची। वैसे भी नलिन की कोई विश्वसनीयता नहीं है उन्हें तो राजनीति में कहीं ठौर ठिकाना चाहिए। जब दुष्यंत का ठौर ठिकाना उजड़ चुका है तो आज के दिन उनके लिए भाजपा से बढिय़ा कोई विकल्प हो भी नहीं सकता था। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल कभी अपने गुरु रहे केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के धोखे को भूले नहीं हैं, इसलिए वह गूजर को सबक सिखाने का कोई मौका चूकते नहीं हैं। नलिन की गूजर को गाली देने की कला के कारण ही गोयल ने उसे भाजपा मेंं शामिल कराया है। इससे पहले विपुल गोयल गूजर की कड़ी आलोचना करने वाले जसवंत पंवार को पार्षद मनोनीत कर ईनाम दे चुके हैं। इसी कड़ी मेंं नलिन हुड्डा का नाम शामिल हो गया। हालांकि नलिन भाजपा को फायदा तो क्या पहुंचाएंगे उल्टे बोझ ही साबित होने वाले हैं, क्योंकि जजपा में बड़े-बड़े पद पर रहने के बावजूद वह चार लोगों को भी पार्टी के साथ नहीं जोड़ सके थे।