अखिल भारतीय आम हड़ताल (क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा) दिल्ली के 9 राजनीतिक व जन संगठनों का साझा मंच ‘जन अभियान-दिल्ली’ के बैनर तले 12 फरवरी 2026 को अखिल भारतीय आम हड़ताल का आयोजन किया गया। हड़ताल में दिल्ली एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों से आए मेहनतकश व आम जनता तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने 2 बजे से जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया और बाद में सभा का आयोजन किया।
श्रम कानूनों को ध्वस्त कर लागू हुए गुलामी के दस्तावेज ‘लेबर कोड’, मनरेगा की ग्रामीण रोजगार गारंटी को समाप्त करने वाले जी राम जी कानून, निजीकरण-बाजारीकरण को बढ़ावा देने वाले शिक्षा अधिष्ठान बिल, बिजली संशोधन बिल, बीज बिल, एवं शांति अधिनियम जैसे जन-विरोधी नीतियों, विधेयकों और अधिनियमों को रद्द करने; निजीकरण और ठेकेदारी प्रथा का अंत करने, न्यूनतम वेतन रुपये 30,000 प्रतिमाह करने, सार्वजनिक नि:शुल्क शिक्षा चिकित्सा, सबको पक्का रोजगार और आवास मुहैया करने, तथा धार्मिक नफरत और बुलडोजर एक्शन की फासीवादी राजनीति को बंद करने की मांगों पर हड़ताल की गई थी। जन अभियान-दिल्ली के घटक संगठनों में से एआईएफटीयू (न्यू) से पीके शाही, क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा से सत्यवीर सिंह, इंकलाबी मजदूर केंद्र से योगेश, भाकपा (माले) मास लाइन से उमाकांत, भगत सिंह स्टूडेंट और यूथ फ्रंट से इंद्रजीत, संग्रामी घरेलू कामगार यूनियन (सीएसटीयू) से श्रेया, व लोकपक्ष से रविन्द्र यादव, तथा साथी सिद्धांत (राजनीतिक कार्यकर्ता), विजय चावला (युवा भारत), प्रोफेसर इशिका (अशोका यूनिवर्सिटी), रणवीर सिंह (भगतसिंह चर्चा केंद्र), अंसार (भगत सिंह छात्र नौजवान सभा), व राधेश्याम (राजनीतिक कार्यकर्ता) ने सभा में अपनी बातें रखी। सभा का संचालन मुन्ना प्रसाद ने किया तथा दिल्ली पीपल्स फोरम से अर्जुन प्रसाद सिंह ने समापन भाषण के साथ सभा का अंत किया। इसके अलावा जन अधिकार मंच और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन ने भी प्रदर्शन में भागीदारी की।
वक्ताओं ने बताया कि मजदूर मेहनतकश जनता के अधिकारों और जीवन-जीविका पर लगातार किए जा रहे भीषण हमले केंद्र की मोदी सरकार और तमाम राज्य सरकारों द्वारा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासक वर्गों के हित में लागू की जा रही नीतियों का सीधा नतीजा हैं। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज जब लेबर कोड के रूप में मजदूर वर्ग पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जा चुका है तो जरूरत एक-दिवसीय हड़तालों से आगे बढ़ कर सभी जन-विरोधी नीतियों और इनकी प्रजनन भूमि अर्थात पूंजीवाद-साम्राज्यवाद के विरुद्ध अनिश्चितकालीन हड़ताल और आरपार की लड़ाई छेडऩे की है, जिसकी तैयारी में आज से ही जुटना एक फौरी कार्यभार है। उपरोक्त मांगों पर आधारित राष्ट्रपति के नाम एक संयुक्त ज्ञापन स्थानीय प्रशासन को अंत में सौंपा गया। सभा के दौरान क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा व इमके की टीमों ने तथा साथी भूमि (सामाजिक कार्यकर्ता) ने ‘मेरे लिए काम नहीं; साथी हाथ उठा; चलो रे चलो साथी’ जैसे संघर्षशील गीत प्रस्तुत किए, और ‘दुनिया के मजदूरों एक हों! अनिश्चितकालीन हड़ताल की ओर आगे बढ़ो! पूंजीवाद साम्राज्यवाद फासीवाद हो बर्बाद!’ जैसे नारों के साथ सभा का समापन किया गया।