अफोर्डेबल नहीं हैं गरीबों के लिए बनाए आवास

अफोर्डेबल नहीं हैं गरीबों के लिए बनाए आवास
February 13 08:22 2026

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ग्रेटर फरीदाबाद इलाके मेंं बिल्डरों द्वारा अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर तबके लिए बनाए गए घर खुलेआम प्रीमियम दामों पर बेचे जा रहे हैं। यानी बिल्डरों ने स्कीम के नाम पर सरकार से करीब ढाई लाख रुपये सब्सिडी ली और फिर गरीबों को देने के बजाय उनके नाम पर आठ से दस लाख रुपये अतिरिक्त लेकर बेच रहे हैं। अफोर्डेबल हाउसिंग के नाम पर चल रहा यह खेल अधिकारियों की जानकारी में न हो ऐसा नहीं हो सकता, लेकिन बिल्डर्स के खिलाफ कार्रवाई न करना बताता है कि सब कुछ मिलीभगत से हो रहा है। प्रदेश में पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर ने वर्ष 2018 में अफोर्डबल हाउसिंग स्कीम में निजी बिल्डरों को शामिल करने की घोषणा की थी। इसके लिए बिल्डरों को कई तरह की छूट और सब्सिडी का ऐलान किया गया था। ईडब्ल्यूएस हाउसिंग सोसायटी बनाने के लिए न्यूनतम पच्चीस एकड़ का मानक घटा कर पांच एकड़ कर दिया गया, साथ ही चार मंजिला इमारत बनाने की भी छूट दी गई थी। 21 वर्ग मीटर वाले इन आवासों के लिए केंद्र से डेढ़ लाख और राज्य सरकार से एक लाख सब्सिडी की व्यवस्था थी। बाकी पांच से सात लाख रुपये लाभार्थी से मासिक किस्त के रूप में लंबे समय में वसूले जाने थे।

ऐसे ईडब्ल्यूएस परिवार जिनके पास पक्का मकान न हो, आवास पाने के पात्र थे, शर्त यह थी कि एक परिवार से केवल एक व्यक्ति ही आवेदन करेगा, यदि परिवार के किसी सदस्य के पास पक्का मकान है तो वह अपात्र होगा। इसका लाभ उठाते हुए केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का इलाका कहे जाने वाले ग्रेटर फरीदाबाद में अनेक बिल्डरों ने अफोर्डेबल आवास वाली अनेक योजनाओं के लाइसेंस ले लिए। मंत्री गूजर के इन चेलों की नीयत तो आवासीय योजना के नाम पर मोटा मुनाफा पीटना था तो फर्जी आवेदन कराए गए और उनके नाम प्लॉट अलाट कर दिए गए।

सूत्रों के अनुसार बिल्डरों ने ईडब्ल्यूएस परिवारों के सभी सदस्यों केे नाम से आवेदन करवाए, यही नहीं फर्जी आवेदन भी करवाए ताकि प्रीमियम दाम का खेल किया जा सके। जानकार बताते हैं कि बिल्डरों द्वारा कराए गए फर्जी व गैर कानूनी आवेदनों की जांच नहीं हुई और लॉटरी में अनेक अपात्रों के नाम आ गए। जाहिर है कि ये सारा काम अधिकारियों की मिलीभगत से ही हो सका।
अपात्रों के नाम पर अलॉट प्लॉटों पर पहले तो बिल्डरों ने सब्सिडी हड़पी और बाद में इन्ही प्लॉटों को आठ से दस लाख रुपये अतिरिक्त लेकर प्रीमियम दामों पर बेचा जा रहा है। जानकार कहते हैं कि फरवरी 2025 में सीएम नायब सैनी ने यह स्कीम बंद कर दी, इसके बाद से ग्रेटर फरीदाबाद के बिल्डरों की बल्ले बल्ले है, अब वह खुले आम इन प्लॉटों को मोटे दाम पर बेच रहे हैं। जानकार कहते हैं कि अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम फरीदाबाद ही नहीं पूरे हरियाणा में बड़ा जमीन घोटाला साबित हो सकती है यदि सरकार ईमानदारी से उन बिल्डरों की जांच कराए जिन्हें लाइसेंस जारी किए थे। जिस तरह खट्टर सरकार में बड़े बड़े घोटालों की जांचें दबाई गईं उनको देख कर तो नहीं लगता कि सरकार कभी अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के नाम पर किए जा रहे घोटाले की जांच कराएगी।

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Mazdoor Morcha
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