फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मुझेरी,चंदावली, मच्छगर आदि गांव के हजारों एकड़ रकबे पर आईएमटी (इंडस्ट्रियल मॉडल टाउन) बनाने का काम करीब 15 वर्ष पहले शुरू किया गया था। अब यहां सैंकड़ों छोटे-बड़े कारखाने या तो स्थापित हो चुके हैं अथवा होने के करीब हैं। इनमें हजारों की संख्या में मज़दूर कार्यरत हैं। इसी सम्भावना का पूर्वानुमान लगाते हुए हरियाणा सरकार ने ईएसआई कॉर्पोरेशन को डिस्पेंसरी बनाने हेतु प्लॉट खरीदने का सुझाव दिया था। मज़दूरों के लाखों-करोड़ रुपए पर कुंडली मारे बैठे कॉर्पोरेशन ने इस ओर कोई ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। जहां इतना बड़ा औद्योगिक क्षेत्र हो वहां ईएसआई कॉर्पोरेशन की डिस्पेंसरी का होना जरूरी समझा जाता है। लिहाजा हरियाणा सरकार ने इसकी स्वीकृति तो प्रदान कर दी, परन्तु इसके लिए बिल्डिंग बना कर देने का काम जो कॉर्पोरेशन का है, वह उसने नहीं करके दिया। इसके परिणामस्वरूप आईएमटी के नाम की डिस्पेंसरी सेक्टर आठ स्थित ईएसआईसी के अस्पताल में चला कर खानापूर्ति की जा रही है। विदित है कि आईएमटी से सेक्टर आठ वाले अस्पताल की दूरी पांच किलोमीटर से भी अधिक है। जाहिर है ऐसे में वहां कार्यरत मज़दूरों को डिस्पेंसरी पहुंचने के लिए लम्बा सफर तय करना पड़ता है।
आईएमटी में काम कर रहे मज़दूरों व उद्योगपतियों के संगठन ने भी कई बार इस ओर कॉर्पोरेशन का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया है। उन्होंने तो यहां तक कहा है कि वे अपना कोई भवन मुफ्त में डिस्पेंसरी चलाने के लिए कॉर्पोरेशन को दे सकते हैं। कॉर्पोरेशन का कहना है कि वे मुफ्त में तो कोई बिल्डिंग ले नहीं सकते, हां, किराए पर अवश्य ले सकते हैं। उधर हरियाणा सरकार के सम्बन्धित विभाग एचएस आईआईडीसी ने अपना नियम बताते हुए कह दिया कि यहां कोई भी भवन किराए पर नहीं दिया जा सकता। है न मजे की बात। कॉर्पोरेशन मुफ्त में लेने को तैयार नहीं और हरियाणा सरकार का एचएसआईआईडीसी किराए पर देने नहीं देता।
सरकार के दोनों विभागों के अपने-अपने कानून इस ढंग से बनाए गए हैं कि ईएसआई को अपने वेतन से मासिक चार प्रतिशत देने के बावजूद मज़दूर छोटे-मोटे इलाज के लिए भी दूर तक भटकता फिरे। जाहिर है ऐसे में मज़दूर बिना इलाज के ही गुजर-बसर करने को मजबूर होता है। लेकिन कोई यह पूछने वाला इस देश में नहीं है कि जब आईएमटी बनने जा रहा था तो कॉर्पोरेशन ने प्लॉट खरीद कर डिस्पेंसरी का निर्माण क्यों नहीं किया?