डॉ. रामवीर पढ़ कर दिन प्रतिदिन समाचार बहुधा मन में उठता विचार क्या कारण है क्यों भारत में है व्याप्त चतुर्दिक् भ्रष्टाचार।
यूं तो कारण होंगे अनेक सर्वप्रमुख है उनमें एक जो दण्डनीय वे पदासीन धक्के खाते फिरते हैं नेक।
‘दण्ड: शास्ति प्रजा: सर्वां:’ है राजनीति का प्रथम पाठ इसको ही भुला कर अब शासक रखते दुष्टों से सांठगांठ।
आजादी प्राप्त प्राप्त किए हमको होने वाले हैं आठ दशक क्यों सुलझ सकीं न समस्याएं इस दीर्घ अवधि में भी अब तक।
चोरों का पकड़ा जाना दूर उल्टा वे करते दिखते ठाठ लगता है बूढ़े भारत की बुद्धि को मार गया है काठ।
जो राह दिखाने वाले थे वे ही जनता को रहे बांट यह खाक राजनीति है बस एकत्र हुए हैं चंद भाट।
सदसत् में भेद न पाएं देख शासक हो गए हैं निर्विवेक संसद् में केवल कोलाहल ज्यों वर्षा में टर्राएं भेक।