घोषणावीर सीएम नायाब सिंह सैनी का ऐलान न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी चंडीगढ़ (मज़दूर मोर्चा ब्यूरो) लुभावनी घोषणाओं के द्वारा मीडिया में सुर्खियां बनाने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की है कि सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले जो बच्चे दसवीं तथा बारहवीं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करेंगे उनकी माताओं को 2100 रुपए मासिक, तीन वर्ष तक दिए जाएंगे। सीएम सैनी ने इसे लाडो लक्ष्मी योजना का विस्तार बताया है। घोषणा तो बड़ी सुंदर लगती है लेकिन इसमें पेंंच इतनी अधिक डाल दी हैं कि शायद ही कोई महिला को यह लाभ प्राप्त हो सके। पहली पेंच तो यह है कि परिवार की मासिक आय 15000 से अधिक न हो और बच्चा सैनी सरकार के स्कूल में पढ़ता हो। इन स्कूलों की हालत क्या है यह किसी से छिपा नहीं है। इन स्कूलों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही आवश्यकतानुसार बिल्डिंग, लाइब्रेरी, लेबोरेट्री आदि। शौचालयों तथा बिजली व्यवस्था की तो बात ही करना फिजूल है। इन स्कूलों की दुर्दशा के चलते इनमें छात्रों की संख्या लगातार घटती जा रही है। जिस परिवार के पास थोड़े से भी संसाधान है, वह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना बेहत समझता र्है। वैसे भी जिस परिवार की आय सीमा 15000 मासिक रखी गई है, उसके लिए सरकारी स्कूलों के अलावा कोई विकल्प है भी नहंी। उसे पूर्णतया दुर्दशा ग्रस्त सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना होगा।
सर्वविदित है कि सरकारी स्कूलों का परिणाम हमेशा ही निम्न स्तर का रहता आया है। ऐसे भी स्कूल हैं जिनका परिणाम जीरो प्रतिशत रहा है। घटिया परिणाम वाले स्कूलों के हेडमास्टरों तथा अन्य मास्टरों के विरुद्ध हर वर्ष कार्रवाई करने की धमकी दी जाती है। लेकिन सरकार इसके असल कारणों को दूर करने की कभी कोई चेष्टा नहीं करती। अव्वल तो स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ ही नही है और जो हैं भी उससे पढ़ाई के अलावा अन्य सभी काम कराए जाते हैं। इनमें सबसे बड़ा काम चुनावी डयूटियों का रहता है।
इन सब कठिनाइयों को पार करते हुए यदि किसी बच्चे ने 80 प्रतिशत अंक ले भी लिए तो पता लगाया जाएगा कि उसके बहन-भाई कितने हैं? सरकार ने यहां यह भी शर्त लगा रखी है कि परिवार में तीन से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए। यदि चार हुए तो 80 प्रतिशत अंक लेने का उसे कोई लाभ नहीं मिलेगा। कुल मिलाकर साल भर में हरियाणा सरकार को इस श्रेणी में दो-चार महिलाओं से अधिक लाभार्थी मिलने की कोई सम्भावना नहीं है। इसके बावजूद मीडिया में सुर्खियां बड़ी-बड़ी बटोरी जा रहीं हैं। योजना के अनुसार 1100 रुपए का भुगतान तो नकद किया जाएगा, शेष हजार रुपए प्रतिमाह उसके एफडी खाते में डाले जाएंगे। यह सब बातें कहने-सुनने में बहुत अच्छी लगती है।
लेकिन धरातल पर सरकारी लचर व्यवस्था का सामना जब लाभार्थी को करना पड़ता है तो उसकी कितनी चपलें घिस जाएंगी यह किसी से छिपा नहीं है। पहले तो उसे स्कूल एवं शिक्षा विभाग से कागज बनवाने होंगे फिर समाज कल्याण विभाग के बाबूओं के चक्कर लगाने होंगे। ये सब काम तो तब होंगे जब उसके परिवार पहचानपत्र एवं आधारकार्ड में कोई घुंडी न फंसी हो। सरकारी झूठे प्रोपेगेंडे को इस बात से भी समझा जा सकता है कि जुलाई 2025 में बुढापा पेंशन को 3000 से बढ़ा कर नवम्बर में 3500 कर दिया जाएगा। फिर सितम्बर में कहा गया कि 3500 के बजाय 3200 किया जाएगा, लकिन पेंशन रही वही 3000।