अचानक प्लेटफॉर्म बदलने से यात्री कूदे ट्रैक पर

अचानक प्लेटफॉर्म बदलने से यात्री कूदे ट्रैक पर
February 12 04:16 2026

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बुधवार दिनांक 24 दिसम्बर को आगरा की ओर जाने वाले सैंकड़ो यात्री ताज एक्सप्रेस की प्रतीक्षा में प्लेटफॉर्म नम्बर तीन पर खड़े थे, जो इस ट्रेन का घोषित प्लेटफॉर्म है। 6.55 पर आने वाली यह ट्रेन एक घंटा लेट पहुंची। लेकिन इसके आगमन से तुरन्त पहले घोषणा की गई कि यह ट्रेन प्लेटफॉर्म नम्बर पांच पर आने वाली है। बस फिर क्या था सैंकड़ो यात्री प्लेटफॉर्म नम्बर पांच पर जाने के लिए कूद पड़े ट्रैक पर। शायद यह भी उनके लिए काफी नहीं था बीच में एक ऐसी पैसेंजर ट्रेन खड़ी थी जिसके तमाम दरवाजे बंद होने की वजह से यात्रियों को उसके नीचे से गुजर कर जाना पड़ा।

कहने को कहा जा सकता है कि यात्रियों ने यह जोखिम क्यों उठाया? कहना आसान है, लेकिन यह समझने की जरुरत रेलवे को कतई महसूस नहीं होती कि इतने कम समय में छोटे बच्चों व सामान सहित महिलाओं और बुजुर्गों के लिए पुल की सीढिय़ां चढऩा व उतरना इतना भी सरल नहीं है। सवाल तो रेलवे पर बनता है कि ताज एक्सप्रेस एक घंटा लेट क्यों हुई और उसका प्लेटफॉर्म एकदम आखिरी वक्त पर क्यों बदला गया? यदि बदलना ही था तो एक घंटे पहले क्यों नहीं बदला गया ताकी यात्रीगण सीधे पांच नम्बर प्लेटफार्म पर ही चले जाते? स्थानीय स्तर पर तो कोई रेलवे अधिकारी इसका जवाब देने को तैयार नहीं था, लेकिन ‘मज़दूर मोर्चा’ द्वारा की गई पूछ-ताछ में यह मालूम हुआ कि यह काम दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम से किया जाता है। यह भी पता चला कि एक सुपर फास्ट ट्रेन, जिसका ठहराव यहां पर नहीं था, उसे प्लेटफॉर्म नम्बर तीन से गुजारने के लिए यह कौतक किया गया। कहानी चाहे कुछ भी हो, जिम्मेवार तो वे नालायक रेलवे अधिकारी ही हैं जो यात्रियों के लिए आए दिन इस तरह की परेशानियां खड़ी करके खुश होते हैं।

प्लेटफॉर्म नम्बर तीन व पांच के बीच खड़ी बंद पैसेंजर गाड़ी के बारे में पता चला कि दिल्ली में गाडिय़ां खड़ी करने की जगह कम होने के चलते फालतू की ट्रेनों को यहां खड़ा कर दिया जाता है और जरुरत पडऩे पर उन्हें ले जाया जाता है। रेल विभाग यूं तो स्टेशन भवन बनाने पर सैंकड़ो-करोड़ खर्च कर रहा है लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए स्वचालित सीढिय़ों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। सुधी पाठकों ने मेट्रो रेलवे के प्रत्येक स्टेशन पर स्वचालित सीढिय़ां जरूर देखी होंगी। वैसी ही सीढिय़ां रेलवे स्टेशनों पर लगाने में रेलवे को क्या दिक्कत है? दिक्कत बस यही है कि कोई ऐसा काम नहीं करना जिससे यात्रियों को सुविधा हो और हर वह काम जरूर करना जिससे यात्रियों की ऐसी-तैसी होती हो।

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Mazdoor Morcha
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