ओल्ड फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) किसी जमाने में जब यह शहर न होकर एक छोटा सा गांव ही था तो कुदरती तौर पर बने इस तालाब को बराही नाम दिया गया था। बरसाती पानी से भरे रहने वाले इस तालाब का पानी अति स्वच्छ एवं निर्मल हुआ करता था। उस जमाने में पूरे गांव की जल व्यवस्था इस पर निर्भर करती थी। तालाब की वजह से भू-जल स्तर काफी ऊंचा रहने के चलते कुएं से पेयजल प्राप्त करना सरल रहता था। ग्रामीण अपने इस तालाब व कुएं की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखते थे। इसका महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि जनता इस तालाब की पूजा भी किया करती थी। लेकिन आधुनिकता एवं विकास के नाम पर इस तालाब का सत्यानाश करने में कोई कसर न छोड़ी गई। तमाम नालियां व सीवर तथा कूड़ा-कचरा इसमें डाला जाने लगा।
आधुनिक विकास से हुई दुर्दशा का शिकार अकेला यही तालाब नहीं है बल्कि पूरे नगर निगम क्षेत्र में करीब 250 तालाब ऐसे हैं जिन्हें पहले तो गंदे पानी व कूड़े-कचरे से भर कर सड़ाया गया, फिर मिट्टी से पाट कर बेच खाया गया। इसके परिणामस्वरूप भू-जल स्तर दिन-प्रति-दिन इतना नीचे जा रहा है कि पेयजल भी एक दुर्लभ वस्तु बन गया है। दूसरी ओर चार बूंद बरसते ही पूरे शहर में जल भराव एवं कीचड़ की स्थिति बन जाती है। दरअसल जो बरसाती पानी स्वत: बह कर तालाबों में समा जाता था, वह सड़कों-गलियों में खड़ा होकर जल भराव की स्थिति बना देता है।
इन तालाबों का सत्यानाश करने के बाद अब राजनेताओं को इनके सौन्दर्यीकरण का ध्यान आ रहा है। असल में सौन्दर्यीकरण तो मात्र बहाना है, ध्यान तो मोटी लूट कमाई पर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बराही तालाब के सौन्दर्यीकरण के नाम पर कर दाता से वसूले गए धन से 50 करोड़ की बंदर-बांट होने वाली है। लगभग 50 जरब 50 गज के इस तालाब पर सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसे कौन से हीरे-मोती जड़े जाएंगे जिन पर इतना भारी रकम खर्च होने जा रहा है। विदित है कि यह तालाब ओल्ड फरीदाबाद नगर निगम कार्यालय के लगभग सामने है। इसके तीनों तरफ पक्की सड़क तथा चौथी तरफ पक्के मकान बने हुए हैं। ऐसे में सौंदर्यीकरण तो मात्र एक बहाना है जिसके बल पर स्थानीय विधायक एवं मंत्री विपुल गोयल तथा उनके लगुवे-भगुवे अच्छी-खासी मलाई काटेंगे, कई ठेकेदारों व अफसरों के भी वारे-न्यारे होंगे।
लूट कमाई का साधन बनने वाला यह कोई अकेला तालाब नहीं है। जिले भर में ऐसे अनेकों तालाब हैं जिनके जीर्णाेद्धार एवं सौंदर्यकरण के नाम पर नेताओं अफसरों व ठेकेदारों ने जम कर लूट कमाई करी है। बडखल झील भी ऐसी ही लूट कमाई का जरिया बन चुकी है जिसे बरसाती पानी से भरने की बजाय सीवर के गंदे पानी से भरने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपए डकार लिए गए।