बागेश्वर बाबा ‘किसी से डरता नहीं’

बागेश्वर बाबा ‘किसी से डरता नहीं’
November 17 04:36 2025

पुलिस के सुरक्षा घेरे में सुरक्षित चलने वाला
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दिल्ली धमाकों के संदर्भ में पाखंडी बाबा बागेश्वर ने कहा, ‘हम सनातनियों को कोई भी रोक नहीं सकता, न कभी डरेंगे न पीछे हटेंगे’। विदित है कि यह पाखंडी सात नवम्बर से 16 नवम्बर तक पदयात्रा पर है। यात्रा दिल्ली के छतरपुर से शुरू होकर फरीदाबाद, बल्लबगढ़, पलवल, होडल होते हुए वृंदावन पहुंचेगी। हजारों की संख्या में भाड़े पर लाए गए निठल्ले, निकम्मे, अंधविश्वासी, लम्पटों के साथ होने के बावजूद भी इस डरपोक बाबे को सरकार, की ओर से भारी पुलिस संरक्षण प्रदान किया गया है। पूरे यात्रा मार्ग पर हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। डॉक्टरों की टीम लिए एम्बुलेंस व दमकल गाडिय़ां शायद यह बताने के लिए थी कि यह डरपोक बाबा किसी से भी नहीं डरता।

बीते दिनों प्रधानमंत्री मोदी, इस पाखंडी का मान-सम्मान बढ़ाने के उद्देश्य से इसके आश्रम में गया था। वहां मोदी ने इसकी प्रशंसा करते हुए इसे अपना छोटा भाई तक घोषित कर दिया था। उसी का परिणाम है कि दिल्ली, हरियाणा व उत्तर प्रदेश का शासन-प्रशासन इसके कदमों में लोट-पोट हुआ जा रहा है। हर स्थान पर जि़ले के आला-अफसरान इसकी आगवानी करने को आतुर खड़े मिलते हैं। इसकी मान्यता में कोई कमी न रह जाए, इसके लिए पूर्व सीएम एवं मौजूदा केन्द्रीय-मंत्री खट्टर भी इसके चरण-चुम्बन को यात्रा में पहुंचा। कोई कसर न रह जाए, उसके लिए हरियाणा के सीएम नायब सैनी बिहार से उड़कर पलवल इसकी चरण-वंदना करने पहुंचे। मजे की बात तो यह है कि सीएम के आगमन का कोई कार्यक्रम जिला प्रशासन के पास नहीं था। इसकी सूचना खुद बाबे ने ही प्रशासन को दी।

पाखंडी बाबा एक तरफ तो कह रहा है कि वह किसी से डरता नहीं है और दूसरी तरफ अपने अंधभक्तों से कहलवा रहा है कि उसकी जान को भारी खतरा है। एक अंधभक्त ने तो सरकार से यहां तक मांग की है कि इसके इर्द-गिर्द शीशे का कवच होना चाहिए जिसमें से मूर्ख-अंधविश्वासी जनता तो इसका दर्शन-लाभ ले सके और गोली शीशे के पार न जा सके। समझने वाली बात यह है कि यह डरपोक बाबा इतना खतरा क्यों महसूस कर रहा है और मरने से इतना ही डरता है तो अपनी किसी सुरक्षित गुफा में दुबक कर क्यों नहीं रहता? रही बात सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार की तो वह सदियों से निर्बाध चला आ रहा है। धर्म का प्रचार ऐसे बाबों के पाखंड के भरोसे कभी नहीं रहा। इस नए नवेले बाबे के जन्म से पहले भी अनेकों साधु-संत चुपचाप अपना धर्म-कर्म करते आ रहे हैं।

वर्ष 2014 के बाद यकायक ऐसा क्या हो गया कि सनातन हिन्दू धर्म को खतरा महसूस होने लगा। इससे पहले कांग्रेस राज ब्रिटिश हुकुमत व मुगलों के राज में हिन्दू-धर्म बाकायदा फलता-फूलता रहा। हां, ब्रिटिश राज में जरूर हिन्दू-धर्म की सती-प्रथा जैसी कुछ कुरीतियों को प्रतिबंधित किया गया था। दरअसल भाजपाई सरकार अपने तमाम कुकृत्यों व जनता को दिए गए धोखों को ढकने के लिए हिन्दुत्व की चादर का इस्तेमाल करना चाहती है। वह इसका जितना इस्तेमाल करती है उतनी ही वह और नंगी होती जाती है। इसीलिए वह नित नए ढोंगियों को जनता के बीच अंधविश्वास फैलाने के लिए उतारती रहती है। पाखंडी बाबा एक और महत्वपूर्ण बात हिन्दू-राष्ट्र स्थापित करने की कह रहा है। उसी के प्रयास में इस तरह की पदयात्राएं निकाल कर जनता को मानसिक रूप से तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

बागेश्वर की यह कोई इकलौती यात्रा नहीं है। उससे पहले भी वह ऐसी कई यात्राएं व जनसभाएं कर चुका है जिनके माध्यम से आम जनता के मन में हिन्दू-राष्ट्र का जहर बोया जा सके। इसके अलावा भाजपाई सरकारें समय-समय पर धर्म संसदों का आयोजन करा कर हिन्दू-राष्ट्र का मुद्दा उछालते रहे हैं। इन कार्यक्रमों के द्वारा हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफरत को बढ़ाने के लिए हर तरह के प्रयास किए जाते हैं। दुर्भाग्य की बात तो यह है कि जिस संविधान की शपथ लेकर मोदी, खट्टर व सैनी जैसे तमाम संघी-भाजपाई सत्तारुढ़ हुए बैठे हैं, उस धर्म-निरपेक्ष संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए हिन्दू-राष्ट्र स्थापित करने को बढ़ावा दे रहे हैं। वैसे भी यह रहस्य किसी से छिपा नहीं है कि संघ भाजपा का मूल-उद्देश्य हिन्दू-राष्ट्र स्थापित करना ही है। उनका कभी भी भारत के संविधान में विश्वास नहीं रहा। उनका यह विश्वास केवल तब तक के लिए ही है जब तक वे पूरे देश को मूर्ख बना कर हिन्दू-राष्ट्र स्थापित करके मनुसंहिता को लागूू न कर ले। यह पाखंडी संघ भाजपा गठजोड़ एक ओर तो अखंड भारत स्थापित करने की बात करते हैं और दूसरी ओर भारत को खंडित करने के लिए कोई कसर छोड़ते नजर नहीं आ रहे। जब ये लेाग हिन्दू-राष्ट्र की बात करेंगे तो खालीस्तान की बात करने वालों को कैसे रोकेंगे? इसी तरह उत्तर पूर्व के राज्य भी अलग राष्ट्र स्थापित करने की मांग को लेकर लड़ते रहे हैं।

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Mazdoor Morcha
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