अधिकारी-ठेकेदारों की कमीशनबाजी में विकास के नाम पर लुट रही जनता

अधिकारी-ठेकेदारों की कमीशनबाजी में विकास के नाम पर लुट रही जनता
October 05 05:22 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भाजपा सरकार में विजिलेंस द्वारा नगर निगम के दो सौ करोड़ के घोटाले को जिस तरह भुलाया जा रहा है उससे उत्साहित हरामखोर अधिकारी अब खुल कर लूट कमाई करने में जुटे हैं। नगर निगम में जेई, एसडीओ से लेकर निगमायुक्त तक की कमीशनखोरी का खेल खोलते हुए तिगांव के समाजसेवी दिलसुख ने मुख्यमंत्री सहित हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव, सतर्कता ब्यूरो प्रमुख व एंटी करप्शन ब्यूरो प्रमुख को पत्र लिख कर जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

दिलसुख ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उनका ध्यान नगर निगम में खुलेआम चल रहे भ्रष्टाचार की ओर दिलाते हुए बताया है कि एक्सईएन महेंद्र अप्रूवल रेट कराने के लिए अधीक्षण अभियंता के दो प्रतिशत, मुख्य अभियंता के तीन प्रतिशत और निगमायुक्त के दो प्रतिशत वसूली करता है। वह यह वसूली गई रकम अधिकारियों तक पहुंचाता है। ऐसी मिलीभगत से निगम के अधिकारयों द्वारा बड़े पैमाने पर लूट-खसोट की जा रही है। दिलसुख ने केवल एक्सईएन महेंद्र का नाम लिया है, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि बाकी एक्सईएन, जेई, एसडीओ आदि भी खुद से लेकर ऊपर तक के लिए वसूली करते हों।

खैर, दिलसुख ने निगम में भ्रष्टाचार और लूट कमाई के तरीके भी बताए हैं। इसमें मनमाने रेट पर टेंडर स्वीकृति का खेल आम है। इसमें अधिकारी किसी टेंडर के मनमाने रेट स्वीकृत करते हैं। यदि कोई ठेकेदार अपने टेंडर रेट स्वीकृत करवाना चाहता है तो उसे अधिकारियों द्वारा तय की गई राशि एडवांस में एक्सईएन महेंद्र के हाथ में रखनी पड़ती है, उसके हरी झंडी देते ही अधिकारी भी स्वीकृति दे देते हैं। उनके अनुसार अधिकारी वर्क ऑर्डर के लिए रिश्वत लेते हैं। यानी टेंडर के रेट स्वीकृत हो जाने के बावजूद काम शुरू करने के लिए संबंधित एक्सईएन तब तक वर्क ऑर्डर जारी नहीं करता जब तक उसके लिए पांच से छह प्रतिशत धनराशि अलग से न दी जाए।

लूट कमाई का तीसरा तरीका अधिकारियों द्वारा टेंडर कैंसिल करने की धमकी देना है। इसके तहत यदि कोई ठेकेदार रिश्वत देने से इनकार करता है तो उसे टेंडर कैंसिल या रिटर्न करने की धमकी दी जाती है। दिलसुख का दावा है कि कई मामलों में अधिकारियों ने ऐसा किया भी है। लूट कमाई का चौथा तरीका टेंडर को होल्ड पर रखना है, इसके तहत जो ठेकेदार पैसा नहीं देता उसके टेंडर को अनिश्चित काल के लिए होल्ड पर रख दिया जाता है। मुट्ठी गर्म होने के बाद ही टेंडर जारी किया जाता है। दिलसुख के अनुसार खुद मुख्यमंत्री नायब सैनी हर पंद्रह दिन पर हरियाणा इ्रंजीनियरिंग वक्र्स पोर्टल एचईडब्ल्यूपी पर अलॉटमेंट और लंबित कार्यों की मॉनिटरिंग करते हैं, बावजूद इसके बिना रिश्वत वाले टेंडर महीनों से पोर्टल पर लंबित ही पड़े हैं।

दिलसुख का आरोप है कि इसी संगठित भ्रष्टाचार का सीधा असर तिगांव विधानसभा के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। लंबे अर्से से लंबित पड़े यहां के 11 विकास कार्यों के बारे में उन्होंने चार महीने पहले उसी एचईडब्ल्यू पोर्टल पर स्थिति जांची थी जिसकी समीक्षा सीएम साहब हर पंद्रह दिन में करते हैं, चार महीने बाद भी सारे विकास कार्य वहीं हैं जहां थे। समझा जा सकता है कि ये सारे विकास कार्य निगम के हरामखोर अधिकारियों का पेट नहीं भरे जाने के कारण अटके हुए हैं। अब देखना यह है कि नायब सिंह सैनी भी इसमें हिस्सेदार हैं या नही, यदि नहीं है तो सारे टेंडर विकास कार्यों की जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करें, यदि खुद भी शामिल हैं तो फिर सब माफ है, चलने दो खुला खेल फर्रुखाबादी।

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Mazdoor Morcha
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