गुंडागर्दी के बल पर एसआरएस मॉल पर कब्जा 16 दिन बाद विज के आदेश पर हुई एफआईआर, कोई गिरफ्तारी नहीं

गुंडागर्दी के बल पर एसआरएस मॉल पर कब्जा 16 दिन बाद विज के आदेश पर हुई एफआईआर, कोई गिरफ्तारी नहीं
February 13 01:48 2023

फरीदाबाद (म.मो.) दिनांक 22 जनवरी को सेक्टर 31 स्थित एसआरएस मॉल में जो गुंडागर्दी, तोडफ़ोड़ एवं लूटपाट हुई थी उस पर 16 दिन बाद यानी 6 फरवरी को एफआईआर दर्ज हो पाई। ‘मज़दूर मोर्चा’ के ‘29 जनवरी-4 फरवरी के अंक’ में उक्त कांड की विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। पीडि़त पक्ष द्वारा बार-बार पुलिस अफसरों के चक्कर लगाने के बावजूद जब कोई सुनवाई न हुई तो वे राज्य के गृहमंत्री अनिल विज के अम्बाला स्थित शाही दरबार में पेश हुए।

विज ने भी अपने कर्तव्य  निर्वहन का दिखावा करते हुए पुलिस को आदेश देकर पीडि़तों की ओर से एफआईआर दर्ज करवा दी। सवाल यह पैदा होता है कि क्या गृहमंत्री का काम यही रह गया है कि वह थाने-थाने जाकर मुकदमे दर्ज कराये? क्या उन्हें डीजीपी व सीपी समेत सम्बन्धित अधिकारियों की इस मामले में जवाब-तलबी नहीं करनी चाहिये थी? इससे भी बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि क्या जि़ला पुलिस इतनी सक्षम नहीं है अथवा उसके पास इतने अधिकार नहीं है कि वह किसी अपराध का स्वयं संज्ञान लेकर गुंडागर्दी करने वालों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर सके? पुलिस अफसर के उपर अफसर क्या केवल जनता का लहू पीने के लिये बैठा रखे हैं?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्य के गृह मंत्री अनिल विज नियमित रूप से अपने अम्बाला स्थित निवास पर अपना शाही दरबार लगा कर बड़े शाही अंदाज में फरियादियों की फरियाद सुनते हैं। सुनने के बाद वे बाकायदा शाही फरमान सम्बन्धित अफसरों के नाम जारी करके संतुष्ट हो जाते हैं। उसके बाद वे यह जानने का प्रयास नहीं करते कि पीडि़त फरियादी को अन्तिम न्याय क्या मिला? किस-किस पुलिसवाले ने फरियादी को कैसे-कैसे बेवकूफ बनाकर ठगा? और जब सब मुकदमे गृहमंत्री ने ही दर्ज कराने है तो उन्हें कम से कम हर जिले में तो अपना यह दरबार खुद नहीं तो अपने किसी प्रतिनिधि के माध्यम से लगवाना चाहिये।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मौजूदा गुंडागर्दी मामले के मुख्य आरोपी अमर चेची का नाम ही एफआईआर में नहीं डाला। इसका कारण यह बताया जाता है कि वह मंत्री कृष्णपाल गूजर का भांजा है।
सर्वविदित है कि इलाके में होनेवाली तमाम गुंडागर्दियों के पीछे किसी न किसी राजनेता का हाथ रहता है। गुंडागिरोह में जुटने वाले तमाम गुंडोंको कोई भी टास्क देने से पहले यह आश्वासन दिया जाता है कि उनके विरुद्ध कोई पुलिस कार्रवाई नहीं होगी। जाहिर है ऐसा आश्वासन केवल सत्तारूढ नेता ही दे सकते हैं इस मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ है। इसी के चलते मुख्य आरोपी तो एफआईआर से ही बाहर है तथा अन्य किसी को भी न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही गिरफ्तार होने की कोई सम्भावना है।

यदि कोई कार्रवाई हुई भी तो वह कागजों तक ही सीमित रह पायेगी। इससे भी बड़ी बात तो यह है कि पीडि़तों को कब्जा वापस नहीं दिलाया गया है और न ही दिलाये जाने की कोई सम्भावना है। कुछ दिन बाद मुकदमा अपनी मौत खुद ही मर जायेगा।

झूठ बोले कौव्वा काटे -काले कौवे से डरियो
विज के दरबार में झूठी शिकायत करने वालों की अब खैर नहीं। सच्ची शिकायत पर कार्रवाई हो या न हो पर झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई जरूर होगी और तुरंत होगी। -झूठी शिकायत करने पर होगी कार्रवाई।

कहते हैं कि दूध का जला छाछ को भी फूक मार-मार कर पीता है। यह बात अब गृह मंत्री अनिल विज के दरबार बारे हो रही है। अब वहां बाकायदा यह चेतावनी लिखी जाएगी की झूठी शिकायत करने पर कार्रवाई होगी। असल में पानीपत के थानेदार बलराज की, एम्बुलेंस चलाने की अनुमति देने के लिए, मंथली मांगने बारे दरबार में हुई झूठी शिकायत करने से उनकी काफी किरकिरी हो रही थी। शिकायत मिलते ही विज ने डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस प्रशांत अग्रवाल को बलराज की मुअत्तली का आदेश दे दिया था। खैर बाद में जाँच पर बलराज को बहाल कर दिया और उसके खिलफ झूठी शिकायत करने वाले अमरजीत के कारनामो की जाँच पुलिस कर रही है।
विज साहिब भी बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने इसे अपनी नाक का बाल नहीं बनाया और पानीपत के पुलिस अधीक्षक शशांक की रिपोर्ट के बाद उसे बहाल होने दिया। एक सलाह और, विज साहिब देर रात बारह बजे जिले के पुलिस अधीक्षक को फ़ोन करना बंद करो जब तक कि कोई गंभीर बात न हो। ठीक है कि पुलिस की ड्यूटी चौबीस घंटे की होती है लेकिन प्रत्येक व्यक्ति की निजी जिंदगी भी होती है। उसका सम्मान करना चाहिए।
-पवन बंसल

 

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Mazdoor Morcha
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