फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) 1988 में ही डिजिटल कैमरे से फोटो खींच कर अखबारों को भेजने वाले जुमलेबाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया मुहिम बुधवार को डाक खानों में दम तोड़ गई। सर्वर ठप होने के कारण नेहरू ग्राउंड स्थित प्रधान डाकघर से लेकर अन्य डाकखानों में स्पीड पोस्ट, पार्सल, बचत बैंक आदि सेवाएं लगभग पूरे दिन बाधित रहीं। त्यौहार के सीजन में डिजिटल इंडिया के ध्वस्त होने से हजारों उपभोक्ता दिन भर लाइन में लग कर सर्वर ठीक होने का इंतजार करते रहे।
प्रधान डाकघर के सूत्रों के अनुसार बुधवार को सुबह करीब दस बजे ठप हुआ सर्वर शाम छह बजे तक चालू नहीं हो सका। इस कारण में बैंकिग कार्य, रजिस्टर्ड डाक, स्पीड पोस्ट पूरी तरह ठप होने से करीब एक करोड़ का कारोबार नहीं हो सका। वीरवार को दशहरे की छुट्टी होने के कारण सभी डाकखाने बंद रहे यानी शुक्रवार को ही काम शुरू हो सका। जानकार कहते हैं कि यह सारी समस्या नेटवर्क की गड़बड़ी से हुई। प्रधानमंत्री एक ओर डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा पीट रहे हैं दूसरी और सबसे मजबूत आधारभूत ढांचे वाली सरकारी कंपनी बीएसएनएल को बर्बाद किया जा रहा है। कई शहरों में हालात ये हैं कि बिजली जाने पर सेवाएं चालू रखने के लिए बीएसएनएल के पास जेनरेटर तक उपलब्ध नहीं है, गड़बड़ी होने पर नेटवर्क चालू रखने के वैकल्पिक संसाधन तक नहीं है। ऐसे में सर्वर ठप होना कोई नई बात नहीं है, यह तो आए दिन होता रहता है। घंटे-दो घंटे का सर्वर ब्रेक डाउन होना तो आम बात है, रो धो कर काम चलता रहता है लेकिन बुधवार को तो सुबह से ठप पड़ा नेटवर्क पूरे दिन चालू नहीं हो सका, उपभोक्ता सारे दिन डिजिटल इंडिया चालू होने के इंतजार में घंटे मिनट गिनते रहे।
जिस तरह नेटवर्क ठप होने के कारण पूरे दिन डाक सेवाएं व्यर्थ रहीं, संदर्भवश, नागरिकों को यह समझ लेना चाहिए कि ये मोदी सरकार आए दिन कहीं न कहीं नेटवर्क बंद करने का हथकंडा अपनाती है तो वहां के लोगों की क्या दशा होती होगी। जो परंपरागत व्यवस्था थी मोदी सरकार ने वो तो बंद कर दी और डिजिटल इंडिया इनसे चलता नहीं यानी कौवा चला हंस की चाल और अपनी भी भूल गया, पीएम मोदी पर यह कहावत बिलकुल सही बैठती है।