राष्ट्रपति मुर्मू को रेल से ले जाया गया वृंदावन

राष्ट्रपति मुर्मू को रेल से ले जाया गया वृंदावन
September 29 17:46 2025

जनता की ऐसी-तैसी करने का मौका ढूंढ ही लेती है सरकार
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का वृंदावन जाकर बांके बिहारी मंदिर में मत्था टेकना उनकी निजी आस्था का मामला है। परन्तु इसे लेकर सरकार किसी तरह से जनता की ऐसी-तैसी करने के साथ-साथ अंधविश्वास फैलाने का कोई मौका छोडऩा नहीं चाहती। जाहिर है राष्ट्रपति जैसे सर्वाेच्च पदस्थ लोग मत्था टेकेंगे तो आम जनता का भी उससे प्रेरित होकर अंधविश्वास की ओर बढऩा स्वाभाविक है।

इस काम के लिए किसी शोर-शराबे एवं प्रोपेगेंडा के बिना भी मुर्मू का मत्था उस मंदिर में टिकवाया जा सकता था। इसके लिए उन्हें एक हेलिकॉप्टर में बैठा कर मंदिर ले जाया जा सकता था। परन्तु ऐसा करने से न तो अंधविश्वास का प्रोपेगेंडा होता और न ही दिल्ली से मथुरा के बीच बसने वाले लोगों को कोई परेशानी होती। परन्तु मोदी सरकार भला ऐसा क्यों करने लगी। राष्ट्रपति की इस भक्ति भावना का अत्यधिक प्रोपेगेंडा करने के लिए उन्हें दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से 4 डिब्बों की एक विशेष रेलगाड़ी में बैठा कर मथुरा तक ले जाया जाएगा। यह ट्रेन राष्ट्रपति के निजी सचिव से लेकर रसोइए, खानसामे, अर्दली, चपरासी, निजी स्टाफ तथा अंगरक्षकों की फौज से भी भरी होगी। यह सब देश की भूखी नंगी जनता के सर्वाेच्च नेता का वैभव का प्रतीक होते हैं।

सैंकड़ों साल पुराने रेलवे विभाग को अपनी कार्यकुशलता पर इतना भी भरोसा नहीं कि वे इस विशेष रेलगाड़ी को एक बार में सही-सलामत ले जा पाएं। इसके लिए रेलवे ने मंगलवार 23 सितंबर को बाकायदा इस ट्रेन को चला कर रिहर्सल किया। इस रिहर्सल पर कितना धन बर्बाद हुआ तथा कितने लोगों को कितनी परेशानियां झेलनी पड़ीं इसकी सरकार को कोई चिंता नहीं। विदित है कि जब इस तरह की विशेष रेलगाड़ी चलाई जाती है तो अन्य अनेकों रेलगाडिय़ों को रोक दिया जाता है। रास्ते में पडऩे वाले तमाम प्लेटफार्मों, अंडरपासों व रेलवे ट्रैक पर विशेष सुरक्षा इंतेजामात किए जाते हैं, जिन पर भारी खर्च होता है। इसके अलावा आम रेल-यात्रियों को भी इस दौरान यात्रा करने में भारी असुविधा होती है। लेकिन मोदी सरकार को इन सबसे क्या लेना-देना, उन्हें तो जनता की ऐसी-तैसी करते हुए अपने प्रोपेगेंडे को बढ़ाना होता है।

पूरा शहर बंधक बनाया मोदी सरकार ने वीरवार को राष्ट्रपति के विशेष ट्रेन को सुरक्षित गुजारने के नाम पर ट्रैफिक पुलिस ने आदेश जारी किया कि प्रात: आठ से नौ व शाम सात से आठ बजे के दौरान बदरपुर बॉर्डर से लेकर जि़ले की सीमा तक तमाम रेलवे ओवरब्रिज तथा अंडरपास बंद रहेंगे। विदित है कि रेलवे लाइन इस औद्योगिक शहर के बीचोंबीच से गुजरती है। लाखों नागरिक अपने तरह-तरह के कामकाज के लिए रेलवे लाइन के इधर से उधर आते-जाते हैं। आवागमन के इन मार्गों पर पहले से ही जाम की स्थिति तो रहती ही थी, उसको और बढ़ाने के लिए यह आदेश भी जारी कर दिया गया। किसी ने यह सोचने की जहमत नहीं उठाई कि स्कूलों में जाने वाले बच्चोंं, अस्पतालों में जाने वाले मरीजों व डॉक्टरों तथा कम्पनियों व दफ्तरों में जाने वाले कामगारों का क्या होगा? शाम को बाटा पुल पर यातायात रोके जाने से परेशान एक ऑटो चालक ने कहा कि क्या हम पुल से राष्ट्रपति की टे्रेन पर बम गिरा देंगे जो हमें रोक दिया है, ये हमारी यानी जनता की प्रतिनिधि हैं शासक नहीं। जनता को परेशान करके दर्शन करने से भगवान खुश नहीं होंगे।

ट्रैफिक पुलिस ने इस आदेश के साथ-साथ यह भी सलाह दी है कि इस स्थिति में लोग वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें, लेकिन यह नहीं बताया कि वे वैकल्पिक मार्ग क्या हो सकते हैं? जाहिर है कि मजबूरन लोग वैकल्पिक मार्ग के तौर पर रेलवे ट्रैक को पास करने का जोखिम उठाएंगे-इस कवायद में यदि किसी की जान न गई तो बड़ी बात होगी।

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Mazdoor Morcha
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