ईएसआई कॉर्पोरेशन के डीजी का वेतन कोर्ट ने रोका

ईएसआई कॉर्पोरेशन के डीजी का वेतन कोर्ट ने रोका
March 02 17:58 2025

मुख्यालय पर काबिज नालायक कमिश्नरों की कारस्तानी
मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
कहावत है कि मूर्ख मित्र से दाना दुश्मन अच्छा होता है। इस कहावत का अर्थ यदि कार्पोरेशन के डीजी (महानिदेशक)अशोक कुमार सिंह आईएएस ने समय रहते समझ लिया होता तो आज कोर्ट द्वारा उनके वेतन रोकने जैसी कार्रवाई न हुई होती। मीडिया में प्रकाशित समाचार के अनुसार जम्मू स्थित कार्पोरेशन के एक अस्पाताल की डॉक्टर सोनिका डोगरा का तबादला मुख्यालय में बैठे कमिश्नरों ने उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित अस्पताल का कर दिया। कमिश्नरों द्वारा यह तबादला केवल अपनी शक्ति का प्रदर्शन एवं अहं की संतुष्टि के लिए किया गया था। डॉक्टर डोगरा ने इसे 14 जून 2023 को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्युनल जम्मू में चैलेंज करते हुए कहा कि यह तबादला पूरी तरह से अवैध है क्योंकि रुद्रपुर उनके जोन से बाहर है। दूसरे, उनके पति जम्मू जोन में ही स्थित मेडिकल कॉलेज में सेवारत हैं इसलिए नियमानुसार उन्हें दाम्पत्य संबंधी प्रावधान के आधार पर जम्मू जोन से बाहर नहीं भेजा सकता। इसके अलावा भी डॉक्टर सोनिका डोगरा ने अपने पक्ष में अनेकों अकाट्य तर्क ट्रिब्युनल में दिए थे जिनका कोई वाजिब जवाब कॉपोरेशन के पास नहीं था।

इसके चलते दिनांक 21 जून 2023 से लेकर दिनांक 30 जनवरी 2025 तक ट्रीब्युनल में 12 तारीखें लगीं। इन तारीखों पर कॉपोरेशन की ओर से किसी के भी हाजिर न होने पर ट्रिब्युनल ने डीजी का वेतन रोकने जैसा कड़ा फैसला दिया। किसी अ$फसर का वेतन रोकना अथवा उसकी कार को अटैच कर लेने जैसा फैसला बेशक अस्थायी होता है लेकिन यह उस अफसर की बेइज्जती करने वाला समझा जाता है। ट्रिब्युनल में चल रहे केस से बेशक डीजी का कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है। यह केस उनकी तैनाती से करीब दो साल पहले का है। लेकिन कॉर्पोरेशन के मुखिया होने के नाते उनका यह दायित्व बनता है कि अपने मातहत अ$फसरों से काम-काज को सुचारु ढंग से चलवाएं। बस इतना सा ही काम डीजी महोदय नहीं कर पाए। वे अपने निकम्मे व नालायक अफसरों के भरोसे रहने के चलते लपेटे में आ गए।

विदित है कि मुख्यालय में तैनात नालायक कमिश्नर अपने उलटे-सीधे निर्णयों से आए दिन तरह-तरह के बखेड़े खड़े करते रहते हैं। जानकारों के मुताबिक ऐसे 100 से अधिक बखेड़े विभिन्न न्यायालयों में पड़े हैं। इनसे निपटने के लिए बाकायदा एक विधि विभाग बना रखा है। इसके द्वारा अनेकों महंगे-महंगे वकील पैनल पर रखे गए हैं, जिनकी भारी-भरकम फीसें बीमाकृत मज़दूरों के पैसे से अदा की जाती हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जम्मू जैसे उक्त मामले की तरह देश भर के अनेकों ट्रिब्युनलों में कॉर्पोरेशन के विरुद्ध फैसले हो रहे हैं। इनके विरुद्ध भारी खर्चे करके कॉर्पोरेशन हाईकोर्ट में जाता है और वहां से मुंह की खाकर लौटता है। इन हालात के मद्देनज़र डीजी को इस मामले का गम्भीरता से निरीक्षण करके कुछ कड़े फैसले लेने चाहिए अन्यथा वे इनकी ऐसी ही किसी बड़ी करतूत का शिकार कभी भी हो सकते हैं।

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Mazdoor Morcha
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