फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम शहर के करीब एक हजार परिवारों का रोजगार छीनने जा रहा है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी (एमओएच) नितीश के अनुसार नगर निगम शहर भर में चल रहीं करीब एक हजार मीट की दुकानें को बंद की जाएंगी।
सवाल यह है कि एमओएच नितीश सिर्फ हलाल मीट की दुकानें बंद करवाएंगे या फिर झटका मीट की भी बंद करवाएंगे। भाजपा नेता और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने बीते दिनों सनातनी हिंदुओं से अपील की थी कि उन्हें केवल झटका मीट ही खाना चाहिए। यही नहीं उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र बेगूसराय में बाकायदा झटकाज़ नाम की मांस की दुकान का उद्घाटन भी किया, जहां केवल हिंदू रीति यानी झटके से काटे गए मुर्गे, बकरे आदि पशुओं का ही मांस मिलेगा। फरीदाबाद में मुसलमानों की दुकान पर हलाल मीट मिलता है जबकि हिंदू, पंजाबी और खटिक जाति वाले झटका मीट बेचते हैं। मांस मार्केट के जानकारों के अनुसार जिले में मुसलमानों के साथ ही सिक्ख समु दाय का भी मीट मुर्गे का काफी बड़ा कारोबार है। जाहिर है कि सिक्ख झटका मीट ही बेचते हैँ। इसके अलावा मुजेसर गांव में वार्ड तीन के पार्षद रवि कश्यप के सजातीयों की एक दर्जन से अधिक दुकानें झटका मीट की ही हैं। ऐसे में निगम अधिकारी गिरिराज सिंह की ?’झटकाज़’ मीट शॉप बंद करेंगे या सिर्फ हलाल मीट शॉप पर कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि नगर निगम सूत्रों के अनुसार शहर में 43 सौ से अधिक मीट, मुर्गे की दुकानें चिह्नित की गई हैं। इनमें करीब सौ दुकानें झटका मांस बेचती हैं बाकी सब में हलाल बिकता है। जानकार बताते हैं कि संघ-भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकारों में मीट, चिकन की दुकान खोलने के लिए लाइसेंस देने बंद कर रखे थे। ऐसे में रोजी रोटी कमाने के लिए शहर में अनेक हलाल और झटका शॉप खुल गईं। अब करीब साढ़े ग्यारह हजार रुपये फीस रख कर लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह कवायद और कुछ नहीं बल्कि दुकानदारों से वसूली करने की है। समझा जा सकता है कि रेहड़ी और झुग्गी में बैठ कर छोटा कारोबार करने वाले यह रकम नहीं भर पाएंगे, ऐसे में उन्हें दुकान खोलने के लिए एमओएच के कर्मचारियों की जेबें गर्म करने के साथ पार्टी के लिए मुफ्त मुर्गा शुर्गा भी देना पड़ेगा।
दरअसल, त्यौहारों का सीजन शुरू हो चुका है। नवरात्रि आने वाली है अधिकतर हिंदू मीट, मछली, मुर्गा खाते हैं लेकिन नवरात्रि के नौ दिनों में मांसाहार पूरी तरह बंद रहता है। इसका इस्तेमाल संघी-बजरंगी धार्मिक उन्माद फैला कर हिंदू-मुसलमानों के बीच नफरत भड़काने के लिए करते हैं। नवरात्रि में मांस, मुर्गे की दुकानें बंद करवाने के लिए हिंसा तक का सहारा लिया जाता है। एमओएच नितीश का यह आदेश भी ठीक नवरात्रि से कुछ दिन पहले आया है। ये दुकानें तो न जाने कब से खुली हैं लेकिन आदेश अभी जारी किया गया। दरअसल, एमओएच को यह आदेश और कार्रवाई संघी-बजरंगियों की खुशी के लिए करनी पड़ रही हैं। संघ भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार में दंगाई बिटुआ जैसों के दबाव में प्रशासन किसी की भी रोजी रोटी छीनने में पीछे नहीं रहता। एक हजार दुकानें बंद करने का फरमान भी इसी मद्देनजर जारी किया गया लगता है।