नाले में डूबने से लोग मरते रहें सरकार की बला से

नाले में डूबने से लोग मरते रहें सरकार की बला से
September 15 19:21 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मुजेसर, सेक्टर 23 मछली मार्केट के पास बीती बृहस्पितवार की रात एक कार अनियंत्रित होकर खुली हुई गौंच्छी ड्रेन में जा घुसी, हादसे में कार सवार पवन मौर्य, अमित झा और गौरव रावत की डूबने से मौत हो गई। हादसे का कारण कार का तेज गति होने के कारण चालक द्वारा मोड़ पर नियंत्रण नहीं रख पाना बताकर सरकार के विभागों की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है। हादसे में जितनी गलती कार चालक ही है उससे कम गलती नगर निगम के उन अधिकारियों की भी नहीं है जिन्होंने उस मोड़ के सामने गोंच्छी ड्रेन में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए थे। यदि ड्रेन के किनारे सुरक्षा ठोकर और जाली होती तो शायद हादसे में तीनों की जान न जाती। दरअसल, निगम अधिकारियों को भी मालूम है कि उनकी हरामखोरी के कारण आम जनता की जान चली भी जाए तो उनकी सेहत पर कोई फर्क पडऩे वाला नहीं, उनके खिलाफ कोई केस दर्ज होने वाला नहीं, तो कोई गिरे मरे उनकी बला से।

नगर निगम सूत्रों के अनुसार बीते करीब दो साल में नगर निगम के अधिकारियों के निकम्मेपन के कारण आठ लोगों की जान जा चुकी है लेकिन हादसे के लिए विभाग में न तो किसी से सवाल जवाब किए गए और न ही किसी को जिम्मेदार ठहराया गया। न ही पुलिस ने किसी घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया। तीन युवकों की मौत के लिए भी पुलिस ने पंचनामा और पोस्टमॉर्टम करवा शव परिजनों के हवाले कर दिए। हादसे का एक कारण स्ट्रीट लाइटों का बंद होना भी बताया जाता है। रात करीब पौने ग्यारह बजे अंधेरी सड़क पर चालक अंदाजा नहीं लगा सका और कार ड्रेन में चली गई। यदि स्ट्रीट लाइटें जल रही होतीं तो संभवता हादसा नहीं होता। स्थानीय लोगों के अनुसार एक साल भी नहीं हुए हैं यहां की सारी स्ट्रीट लाइटें बदले हुए, इनमें सत्तर फीसदी जलती ही नहीं, कम से कम गोंच्छी ड्रेन के समानांतर लगी लाइटें तो जलनी ही चाहिए लेकिन वह भी बंद हैं। निगम के अधिकारी देखना भी गवारा नहीं करते कि क्या हालात हैं।

अगस्त 2024 में बल्लभगढ़ में खुले नाले मेें गिरकर डूबने से 23 वर्षीय प्रिंस की मौत हो गई थी। बीते अप्रैल महीने में ओल्ड फरीदाबाद स्थित बराही तालाब में स्मार्ट सिटी द्वारा खुदवाए गए करीब 12 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर 10 वर्षीय प्रियांशु की मौत हो गई थी। अक्तूबर 2024 में पल्ला स्थित सूरदास कॉलोनी में शिव मंदिर के पास नगर निगम द्वारा खुदवाया गया डिस्पोजल का गड्ढा खुला छोड़े जाने से चार साल के आर्यन की मौत हो गई थी। 23 सितंबर को ओल्ड अंडरपास के जलभराव में कार फंसने से दो बैंककर्मियों की मौत हो गई थी। इससे पहले जुलाई 2024 को सेक्टर 22 श्मशान घाट के पास हार्डवेयर सोहना रोड पर एफएमडीए द्वारा सीवर के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरने से विमल उर्फ बिल्लू की मौत हो गई थी। अधिकतर हादसों में परिजनों और लोगों ने हो हल्ला किया तो पुलिस से लेकर अधिकारियों तक सबने केस दर्ज करने का आश्वासन दिया लेकिन किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय करके उसके खिलाफ हत्या या गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज ही नहीं किया गया।
यदि एक घटना में भी कोई अधिकारी नामजद कर दिया जाता तो फिर शायद ही कोई दूसरे हादसा होता। लेकिन अधिकारियों को भी मालूम है कि अमृत काल में सरकार से लेकर प्रशासन तक कहीं जनता की सुनवाई नहीं होनी है तो फिर क्यों व्यवस्था संभालना।

दरअसल, इस तरह के हादसे हरामखोर अधिकारियों के लिए मोटी कमाई का जरिया ही साबित होते हैं। ओल्ड अंडरपास में दो बैंककर्मियों की मौत के बाद जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के बजाय मोटे खर्च पर आनन फानन गेट लगवा कर पीठ थपथपा ली गई। मेवला महराजपुर अंडरपास के लिए यही घोषणा एफएमडीए के अधिकारियों ने कर डाली, इसमें भी मोटे बिल फाड़े जाएंगे और कमीशनखोरी होगी, आम जनता जलभराव, डूबकर मरने, सड़क के गड्ढों में फंसकर गिरने, घायल होती रहेगी। दरअसल, जब तक जनता खुद ही अंधभक्तों की तरह सरकार के गुण गाती रहेगी और सवाल नहीं करेगी तब तक इसी तरह अपनी जान माल का नुकसान कराती रहेगी।

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Mazdoor Morcha
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