फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) राजा नाहर सिंह नामक क्रिकेट स्टेडियम में, जहां दर्जनों अंतर्राष्ट्रीय तथा अनेकों रणजी ट्रॉफी मैच हो चुके हैं, वह आज गुल्ली-डंडा खेलने लायक भी नहीं बचा है। इसका सत्यानाश करने पर बीते दसियों वर्ष में सरकार ने 200 करोड़ रुपये से अधिक तो बर्बाद कर दिए हैं और अभी 110 करोड़ रुपये और बर्बाद करने के टेंडर जारी होने वाले हैं। शुरू में इसके जीर्णोद्धार का काम एमसीएफ (फरीदाबाद नगर निगम) को दिया गया था। निगम ने इसका ठेका गुजरात की रणजीत बिल्डकॉन कम्पनी को पहले 60 करोड़ रुपये में दिया था जो बढ़ता-बढ़ता 200 करोड़ भी पार हो गया। इस काम की जांच करने के लिए एक बार राज्य विधानसभा की लोक-लेखा समिति भी आई थी। इसके एक सदस्य तत्कालीन स्थानीय विधायक नरेन्द्र गुप्ता भी थे जिन्होंने इसके निर्माण में हो रहे घपलों को लेकर सख्त टिप्पणियां की थीं। इनका विवरण मज़दूर मोर्चा में किया गया था। उसके बाद यहां काम बंद हो गया, गुजराती कम्पनी भाग गई। इसके बाद 2023 में लूट कमाई का यह धंधा एफएमडीए (फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण) को सौंप दिया गया। यह एजेंसी एमसीएफ से भी बड़ी भ्रष्टाचारी साबित होती नजर आई तो इससे भी काम वापस लेकर फिर से एमसीएफ को दे दिया गया।
करीब एक माह पूर्व लिए गए इस निर्णय पर होने वाले खर्च का अनुमान 90 करोड़ बताया गया था जो अब बढ़ा कर 115 करोड़ बताया जा रहा है। इस काम का पूरा उत्तरदायित्व एमसीएफ के ची$फ इंजीनियर विवेक गिल के पास रहेगा। गिल यहां पर पहले भी बतौर एक्सईएन रह चुके हैं। उस वक्त की निगमायुक्त गरिमा मित्तल ने इनके द्वारा बनाई गई एक पाइप लाइन की पैमाइश कराई तो भारी घोटाला पकड़ में आया था। निगम के नियमानुसार गिल को सजा देने का अधिकार निगमायुक्त के पास न होने के चलते उन्होंने 21 मई 2021 को यह केस चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय भेज दिया गया था। वहां बैठे गिल से भी बड़े मगरमच्छों ने गिल को कोई सजा देने की बजाय पदोन्नति देकर गुडग़ांव नगर निगम का एसई बना कर भेज दिया। जाहिर है जिस भ्रष्टाचारी को भ्रष्टाचार की सजा के बदले पदोन्नति प्राप्त करने की कला आती हो तो वह इस तंत्र में क्या-क्या गुल नहीं खिलाएगा, वह जल्द ही यहां भी देखने को मिलेंगे।
उगाही के लिए लगाया अपना आदमी नगर निगम में चर्चाएं है कि चीफ इंजीनियर विवेक गिल उगाही के लिए एसडीओ संजय बंसल को लोक निर्माण विभाग से निगम में लेकर आए हैं। सूत्र बताते हैं कि गिल ने संजय बंसल को फील्ड के बजाय हेडक्वार्टर में लगवाया, यहां उसका कार्य काम पूरा होने के बाद आने वाले बिलों में आब्जेक्शन लगा कर बिल रोकना है ताकि ठेकेदार भुगतान के लिए सौदेबाजी करने को मजबूर हों। बताया जाता है कि सात से दस प्रतिशत चढ़ावा लेने के बाद एसडीओ महोदय ऑब्जेक्शन उठा लेते हैं और बिल पास कर दिया जाता है। यदि सूत्रों की मानें तो हाल ही में एक ठेकेदार ने निगमायुक्त धीरेंद्र खडग़टा से एसडीओ संजय बसंल की शिकायत की कि उन्होंने उनके बिल में ऑब्जेक्शन लगाया, सौदेबाजी के बाद सात प्रतिशत कमीशन लेकर ऑब्जेक्शन हटा लिया। शिकायत में ठेकेदार ने यह भी दावा किया कि उसने जो काम किया था ऑब्जेक्शन लगने के बाद उसमें एक ईंट या रोड़ा न लगाया न हटाया, कमीशन देते ही सब ओके हो गया। इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई है ये निगमायुक्त धीरेंद्र खडग़टा से भी छिपा नहीं हो सकता। अब वह कार्रवाई न करने के कितने दाम वसूल करते हैं या मंत्री विपुल के दबाव में निष्क्रिय रहते हैं ये तो वही जानें।