आखिरकार वो गर्व का दिन आ गया

आखिरकार वो गर्व का दिन आ गया
August 30 06:04 2025

मनीष आजाद
दोस्तों, अभी अभी मेरे पास मैसेज आया है, कि यूनेस्को ने भारत के चुनाव आयोग को, विश्व का सबसे दयालु चुनाव आयोग घोषित किया है। देश के 90 करोड मतदाताओं और उनकी बहू बेटियों के मान सम्मान साथ खड़े होकर.. चुनाव आयोग ने यह अप्रतिम उपलब्धि हासिल की है। सूत्रों की माने तो यूनेस्को कई वर्षो से यह तमगा भारत के चुनाव आयोग को देने का मन बना चुका था। लेकिन राहुल गांधी की पुख्ता प्रेस कांफ्रेस के बाद, यूनेस्को को इसके प्रमाण मिल गए, जिनकी तफसील कुछ इस प्रकार है। पहला कारण लाखों बेघर लोगों को मकान देना है। महादेवपुरा की सक्सेस स्टोरी बताती है कि वहां 35 हजार लोगो को मकान नंबर 0 का मालिक बना दिया गया। इस हिसाब से देश की 4123 विधानसभाओं मे 14.42 लाख मकान बांटे जाने की संभावना है।

तो यह विश्व की सबसे बड़ी हाउसिंग स्कीम है, जिसमे बिना एक कतरा इंट गारे के खर्च के, सबको घर मिल गया है। अरबो रूपये की योजनाऐ बनाकर इंदिरा आवास/प्रधानमंत्री आवास के नाम पर गरीबो छलने वाली सरकारों को चुनाव आयोग से सीखना चाहिए। दूसरा कारण पीस और हार्मनी बढाना है। एक घर मे अलग अलग जाति, धर्म, सरनेम के 50, 100 या 200 लोगो को अपनी धार्मिक-जातीय नफरत भुलाकर एक साथ रहने को प्रेरित करना, जबकि देश मे भयंकर विभाजनकारी राजनीति का जोर हो…, मानवता की जघन्य सेवा है। सूत्रों की मानें, तो इस खतरनाक दौर मे, ऐसी सफल पहल से द्रवित यूनेस्को ने, ज्ञानेश कुमार को पर्सनली नोबेल पीस प्राइज के लिए भी रिकमण्ड किया है।

आयोग द्वारा सीसीटीवी फुटेज दबाकर, हमारी बहू बेटियो की मान रक्षा से तो सभी वाकिफ हैं। मगर उसकी करूणा की असली बानगी तो तब मिली .. जब अनाथ, पितृहीन लोगों को पहली बार, उनके बाप का नाम दिया। हमने लावारिस और नाजायज जैसी तमाम 80-90 के दशक की फिल्मो मे देखा कि बाप के नामविहीन लोगों को जिंदगी मे कितनी जिल्लत सहनी पड़ती है। चुनाव आयोग ने इसका समाधान दिया है। आगे बढकर लाखों लोगों को थोक के भाव बाप के नाम बांटा है। अब भारत मे जिन लोगों को अपने बाप का नाम नहीं पता, उन्हे मोदी जी को पिता मानने की मजबूरी नही रही।
कई कई वेरायटी के आधुनिक फादर्स नेम प्राप्त करने के लिए वे सीधे ज्ञानेश कुमार से संपर्क करें। पिता ही नही, आयोग पर्सनालिटी भी बांट रहा है। लोगों ने मुखौटे लगा रखे है। आत्मा कुछ, चेहरा कुछ,
मुंह पे गांधी-मन मे गोडसे .. मगर पहचान एक ही। ये बड़ी नाइंसाफी है।

आपको भी यदि मल्टीपल पर्सनालिटी डिसआर्डर हो, तो आप ज्ञानेश कुमार से संपर्क करें। वे आपके हर पर्सनालिटी का अलग पहचान पत्र देंगे। अलग अलग इलाके, अलग अलग राज्य के देंगे।
इसका फायदा मिलेगा। हर राज्य मे, समय समय पर घूम सकेंगे। और पार्टी के खर्चे पर पार्टी करते हुए दारू मुर्गा नगदी जीम सकेंगे। इस तरह आयोग सुपोषण और गरीबी उन्मूलन मे भी हाथ बटा रहा है। जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी.. जी हां चुनाव आयोग जीवन मृत्यु के फैसले भी कर रहा है। उपर यमराज, और नीचे आयोग राज वही तय करता हैं कि कौन जियेगा, कौन मरा माना जाएगा। वह मुर्दो को जिन्दा और जिन्दो को मुर्दा घोषित करने को अधिकृत, और पारंगत है।

यूनेस्को ने विश्व मे इतना शक्तिशाली आयोग नही देखा। अपने व्हाट्सप मैसेज मे उसने कहा कि हमारा चुनाव आयोग खुदा हो चुका है। गरीब नवाज, एक दयालु परमपिता परमेश्वर, वाह रे गुरू हो चुका है हारे का सहारा , चुनाव आयोग हमारा उसके पास तीन बाण हैं। वोटर एडिशन, वोटर डिलीशन, वोटर सप्रेशन। इन अमोघ बाणो को मशीनी धनुष से प्रक्षेपित कर, वह युद्ध के परिणाम पलट सकता है। हारे को जिता सकता है, कमजोर की रक्षा कर सकता है। वह जानता है, कांग्रेस मजबूत है। गांधी, नेहरू, और भारत की आजादी की विरासत उनके साथ है। इतनी आसानी से उसकी जड़े तो उखड़ेंगी नहीं। दूसरी ओर सतही नफरत और छिछले तर्को पर बनी हिंसक विचारधारा, मोहब्बत के एक झोंके से साफ हो जाएगी।

तो आयोग कमजोर के साथ है। वह जानता है राहुल को पप्पू कहो, मंदबुद्धि कहो, कमजोर कहो, 40 चुनाव हरवा दो, वह मेण्टली टफ है। बाउंसबैक कर लेगा। वह बार बार कमजोर का “लवणेनभोज्यम” होने से बचा रहा है। हारे का सहारा है। इस सारी साइकोलॉजिकल, माइथोलॉजिकल, सोशोलॉजिकल कारणो पर विचार करने के बाद इल्लॉजिकल पाकर, यूनेस्को ने भारत के चुनाव आयोग को विश्व का सबसे दयालु चुनाव आयोग घोषित किया है। सर्वत्र हर्ष का वातावरण है। आकाश से सुर नर मुनि देवता आयोग पर पुष्प वर्षा कर रहे। नाग, यक्ष, राक्षस, प्रेत, और पिशाच, स्टैण्डिंग ओवेशन दे रहे है। सरकार भी अब चुनाव आयोग का नाम “दीनदयालु चुनाव आयोग” रखने पर विचार कर रही है। मैसेज आपके पास आता ही होगा। हर हिंदू को आगे 11 लोगों हिंदुओ को फारवर्ड करना है। एण्ड डू नॉट फारगेट। आज दिन भर का गर्व का कोटा, इस बात पर खर्च करना है।

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Mazdoor Morcha
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