फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नई शिक्षा नीति के जरिए आमूल-चूल परिवर्तन का ढिंढोरा पीटने वाली मोदी-सैनी की ट्रिपल इंजन भाजपाई सरकार में राजकीय विद्यालयों की हालत बदहाल है। सेक्टर तीन स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेंकेंड्री स्कूल (जीएसएसएस) में छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए मेज कुर्सी तक नहीं हैं। शर्मनाक यह है कि स्कूलों के लिए मोटे मोटे फंड जारी करने वाला शिक्षा विभाग फर्नीचर नहीं खरीद रहा है, इलाके के कुछ लोगों ने दरियां दान दीं तब कहीं जाकर बच्चे जमीन पर बैठ कर पढ़ पा रहे हैं। सेक्टर तीन के जीएसएसएस की इस हालत के पीछे बल्लभगढ़ भाजपा विधायक मूलचंद शर्मा का दिमाग बताया जा रहा है।
शिक्षा विभाग के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार सेक्टर तीन के जीएसएसएस में विधायक मूलचंद शर्मा अपने चहेतों और चेले चपाटों को लगाना चाहते हैं। शर्मा इस बार चुनाव जीत तो गया लेकिन पार्टी आलाकमान को भी उनके निकम्मेपन और हरामखोरी की जानकारी भलीभांति है, यही कारण है कि तीसरी बार जीतने के बावजूद उनसे मंत्रीपद छीन लिया गया। इसके बाद भी उनकी आदतों में सुधार नहीं हुआ है। अब सेक्टर तीन जीएसएसएस उनकी गंदी राजनीति का केंद्र बन गया है।
किसी भी स्कूल में आधारभूत ढांचे, शैक्षिणक-गैर शैक्षणिक स्टाफ के कितने पद स्वीकृत हैं, इनमें से कितने भरे हुए और कितने खाली हैं, उपकरणों की संख्या व प्रकार, विकलांग बच्चों की संख्या, शिक्षा का माध्यम, परीक्षा परिणाम आदि का विवरण यू डाइस (यूनीफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) कोड में दर्ज रहती है। यानी हर सरकारी-गैर सरकारी स्कूल के लिए यूडाइस कोड होना आवश्यक है। किस स्कूल में कितने शिक्षकों की कमी या अधिकता है आदि की जानकारी पंचकूला मुख्यालय में बैठे आला अधिकारी इसी यू डाइस डेटा से हासिल करते हैं और इसी आधार पर शिक्षकों के तबादले, तैनाती आदि किए जाते हैं।
वर्तमान में शिक्षा विभाग में तबादले हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार विधायक मूलचंद अपने संघी-चेले चपाटों को शहर में रखने के लिए बेताब हैं, ऐसे में उनके दबाव में शिक्षा विभाग की ओर से जीएएसएसएस को यू डाइस कोड जारी नहीं होने दिया गया है। जानकार बताते हैं कि यू डाइस कोड नहीं होने के कारण यह स्कूल डेटा बेस में दिखेगा ही नहीं इसलिए यहां कोई भी शिक्षक तबादला होकर या किसी अन्य तरह से न आ पाएगा न जा पाएगा। जब तबादले बंद हो जाएंगे तो मूलचंद के इशारे पर स्कूल को यू डाइस कोड जारी किया जाएगा और फिर भरे जाएंगे शिक्षकों के खाली पद। क्योंकि सारे शिक्षकों के तबादले हो चुके होंगे इसलिए शर्मा जी अपनी मर्जी के शिक्षकों की भर्ती कराएंगे। समझा जा सकता है कि विधायक के चेहते और सत्ता के चाटुकार ये शिक्षक पढ़ाने से तो रहे, इनका काम केवल शिक्षा विभाग से मोटा वेतन उठाना और विधायक के कार्यकर्ता के रूप में काम करना ही होगा।
जाहिर है कि जब यू डाइस कोड नहीं होगा तो स्कूल में फर्नीचर आदि की जानकारी भी मुख्यालय को नहीं होगी। अब शिक्षा विभाग को विधायक की जिद पूरी करनी है और पढ़ाई भी करानी है, तो बताया जा रहा है कि स्कूल के प्रिंसिपल ने कुछ लोगों से छात्र-छात्राओं के लिए दरियां और शिक्षकों के बैठने के लिए मेज कुर्सी दान करने की भीख मांगी। अब छात्र-छात्राएं दरियों पर बैठ तो रहे हैं लेकिन अभी स्कूल कामचलाऊ शिक्षकों से चलवाया जा रहा है। जानकार कहते हैं कि विधायक की नीयत सिर्फ मनपसंद स्टाफ रखवाने की नहीं है, यू डाइस कोड मिलने के बाद फर्नीचर-उपकरण आदि की मद में जो मोटा फंड जारी होगा उसमें भी हिस्सापत्ती वसूलना है। इसीलिए इस स्कूल को डेटा बेस में बाद में जोड़ा जाएगा।
सीएम नायब सैनी एक ओर जोर शोर से नई शिक्षा नीति का ढिंढोरा पीटते हुए कहते घूमते हैं कि प्रदेश के हर स्कूल में स्मार्ट क्लास रूम विकसित किए जाएंगे, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके उलट मर्जर के नाम पर 194 प्राथमिक और कन्या प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए तो छात्रों की संख्या काफी कम होने के बहाने 337 स्कूल बंद कर दिए। इस नीति के तहत छात्र- शिक्षक अनुपात के मानक के आधार पर शिक्षक तैनात किए जाएंगे। भाजपा की 11 साल की डबल-ट्रिपल इंजन सरकारों में अभी भी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लगभग एक तिहाई पद खाली पड़े हैं। डुगडु्गी सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासों के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने की पीटी जा रही है जबकि कक्षा में बैठने के लिए फर्नीचर तक भीख मांग कर काम चलाया जा रहा है। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि दरअसल, छद्म राष्ट्रवाद का चोला ओढ़े राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आधुनिक और तार्किक शिक्षा का धुर विरोधी है, वह लोकतंत्र में नहीं बल्कि पुरातन अंध विश्वास और चातुर्वर्ण व्यवस्था में विश्वास रखता है। इसीलिए संविधान की जगह मनु संहिता को लागू करने के एजेंडे के प्रचार-प्रसार में जुटा है। संघ की शाखाओं से दीक्षा पाए मोदी की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति उसका व्यवहारिक रूप है जिसे मोदी-योगी-खट्टर-सैनी आदि भाजपाई सरकारें लागू करने में जुटी है।
जाहिर है कि यह शिक्षा संघ की शाखाओं में दरियां बिछाकर, लाठियां भांजकर मुसलमान, ईसाई, दलित और वामपंथियों से नफरत का पाठ पढऩे वाले स्वयं सेवकों से अच्छी कौन दे सकता है। विधायक मूलचंद जब अपने चहेतों के लिए सेक्टर तीन जीएसएसएस की ऑनलाइन उपस्थिति ही छिपवा सकता है, ऐसे में इनकार नहीं किया जा सकता कि मोदी-सैनी की ट्रिपल इंजन सरकारें शिक्षकों के खाली पदों पर संघ के नफरती और मनुवाद के पोषक स्वयं सेवकों की भर्ती कर संघी एजेंडे को पुष्पित पल्लवित करें। ये संघी शिक्षक वेतन तो विभाग से लेंगे लेकिन स्कूलों में पढ़ाई की जगह संघी प्रचारक का काम करेंगे।