फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) प्रशासन एक ओर अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाने का पाखंड कर रहा है दूसरी ओर अतिक्रमण और अवैध निर्माण के कारण हूडा की मार्केटों में आम आदमी के चलने फिरने की जगह पर भी दुकानदारों ने कब्जे कर रखे हैं। ये कब्जे दुकानदारों ने मुफ्त में नहीं किए हैं बल्कि अधिकारियों को हर महीने नजराना पहुंचाया जाता है ताकि वो कोई कार्रवाई न करें। भले ही अवैध निर्माण और कब्जों से दुकानदारों सहित आम आदमी की सुरक्षा खतरे में पड़े या लोगों को परेशानी हो, मोटी कमाई के आगे हूडा के अधिकारियों के लिए यह सब मायने नहीं रखता। हूडा के सभी सेक्टरों में मार्केट भी है, इन बाजारों में डबल स्टोरी शॉप डीएसएस, शॉप कम ऑफिस (एससीओ), बूथ और शॉप कम फ्लैट एससीएफ है। सेक्टर 21सी, 15, 16, 46 और आसपास के सेक्टरों में 27 गज के बूथ फैलते हुए पूरी दुकान या उससे भी ज्यादा बड़े बन चुके हैं। सेक्टर 46 में बूथ की जगह डबल स्टोरी इमारत ही बनाई जा रही है। यह अकेला उदाहरण नहीं है इसी सेक्टर 46 में विधायक मूलचंद शर्मा के पारिवारिक सदस्य द्वारा खोले गए मिलन रेस्टोरेंट ने पब्लिक कॉरिडोर पर ही कब्जा कर रखा है लेकिन अधिकारियों की हिम्मत नहीं है कब्जा हटवाने की।
27 गज के बूथों के आगे करीब आठ फीट चौड़ा पब्लिक कॉरिडोर ग्राहकों के चलने फिरने के लिए बनाया गया है। अधिकतर सेक्टरों में दुकानदारों ने इस कॉरिडोर पर अतिक्रमण कर रखा है। सेक्टर 46, सेक्टर 21 सी, 21 डी, सेक्टर 15 सभी जगह दुकानदारों ने अस्थायी रूप से अतिक्रमण कर दुकान बाहर तक बढ़ा ली हैं। सेक्टर 21 सी में बीकानेर सहित इस मार्केट के सभी दुकानदारों ने पब्लिक कॉरिडोर को दुकान में तब्दील कर दिया है, लोगों के चलने का रास्ता नहीं बचा है। सेक्टर 21 डी में तो दुकानदारों ने बूथ का दरवाजा मुख्य सडक़ की ओर खोल रखा है। नियमानुसार बूथ का दरवाजा मुख्य सडक़ पर नहीं खोला जा सकता। ऐसा नहीं है कि सिर्फ बूथ वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। तमाम ने अवैध कब्जे भी कर रखे हैं। हूडा नियमों के मुताबिक मार्केट में बूथ पर बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल ही बनाया जा सकता है, ऊपर जाने वाली सीढ़ी भी बूथ के अंदर से ही बनाई जानी हैं। बरामदे में कोई अतिक्रमण भी नहीं किया जा सकता। अधिकारियों की कृपा दृष्टि से दुकानदार इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। सेक्टर 46 में तो दुकानदारों ने ग्रीन बेल्ट और पार्किंग पर भी कब्जा कर रखा है। इन जगहों पर ये लोग रेहड़ी लगवाते हैं जिसका रोजाना के हिसाब से दो सौ से पांच सौ रुपये तक किराया वसूलते हैं। रेहड़ी और दुकानें होने के कारण मार्केट में आने वाले लोगों को सडक़ किनारे ही वाहन खड़े करने को मजबूर होना पड़ता है। ग्रीन बेल्ट तो खत्म होकर वेंडिंग जोन में तब्दील हो चुकी है।
बूथों के अलावा एससीओ में जिम, होटल आदि धड़ल्ले से चल रहे हैं, इसी तरह हूडा के सेक्टरों में बनाए गए बड़े बड़े नर्सिंग होम में नक्शे से कहीं अधिक निर्माण किया गया है, पार्किंग एरिया का इस्तेमाल कार्यालय, या स्टाफ रूम की तरह किया जाता है, खुले हुए क्षेत्र पर भी छत डाल कर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। स्कूलों में भी कॉरिडोर, मैदान आदि का अतिक्रमण कर कमरे, कार्यालय आदि बना डाले गए हैं। शौचालयों के लिए निर्धारित जगह का भी अतिक्रमण कर उसे स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इन अतिक्रमण-कब्जों के कारण बाजारों की सुरक्षा दांव पर है। सुधी पाठकों को बता दें कि बीती सात जुलाई को सेक्टर 16 ए मार्केट के एससीओ में एआई बैक के नाम से चलाए जा रहे रेस्टोरेंट में भयंकर आग लगी थी। अतिक्रमण और पर्याप्त मार्ग नहीं होने के कारण दमकल को आग बुझाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसी दिन इसी सेक्टर में एससीओ में अवैध रूप से किए गए निर्माण में चलाए जा रहे आकाश इंस्टीट्यूट में भी आग लग गई थी, इस पर भी मशक्कत से काबू पाया गया। इस तरह की घटनाएं आए दिन कहीं न कहीं होती रहती हैं लेकिन हूडा के हरामखोर अधिकारी कार्रवाई नहीं करते।
समझने वाली बात यह है कि अवैध निर्माण सूंघते हुए कहीं भी पहुंचने वाले हूडा अधिकारियों को मार्केटों की यह गड़बड़ी नजर नहीं आती। आती है, लेकिन हफ्ता बंधा होने के कारण कुछ नहीं करते, शिकायत किए जाने पर भी अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते है। अतिक्रमण, अवैध कब्जे के सवाल पर एसडीओ राजपाल बहाने बनाते हुए कहते हैं कि दिखवा लिया जाएगा, कहीं कुछ गलत होगा तो कार्रवाई की जाएगी। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार तोडफ़ोड की कार्रवाई नहीं करने के एवज में बाजारों से हर महीने लाखों रुपये वसूली होती है जो जेई, एसडीओ, एक्सईएन से होते हुए आला अधिकारियों के बीच बंटती है। यही कारण है कि दो साल पहले चिह्नित किए गए 500 बूथों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।