सैनिक सोसायटी की लूट कमाई से पेट नहीं भरा तो मंदिर पर भी डाली गिद्ध दृष्टि

सैनिक सोसायटी की लूट कमाई से पेट नहीं भरा तो मंदिर पर भी डाली गिद्ध दृष्टि
May 27 00:22 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सत्तापक्ष की गोद में बैठकर अधिकारियों की मिलीभगत से सैनिक कॉलोनी की बेशकीमती संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के साथ साथ राकेश धुन्ना व सहकारिता अधिकारियों ने सोसायटी के शिव मंदिर को भी नहीं बख्शा। दरअसल लूट कमाई का चस्का ही ऐसा होता है जिसमें उसके लिए सोसायटी हो या मंदिर सब बराबर ही रहते हैं। इतिहास गवाह है न केवल सैनिक कॉलोनी का मंदिर बल्कि देश भर के मंदिरों में हजारों साल से लूट का सिलसिला किसी न किसी पैमाने पर चलता ही रहा है। लेकिन इसके बावजूद भगवान की सेवा में धन अर्पित करने वालों की बुद्धि मे यह बात बैठ नहीं पाई और मंदिरों में धन का आगमन लगातार बढ़ता ही चला गया।
सैनिक सोसायटी शिव मंदिर करीब साढ़े तीन दशक पहले तत्कालीन चेयरमैन स्व. ओपी भल्ला ने स्थापित कराया था। सोसायटी मेंबरों के चंदे से बने इस मंदिर की देखभाल और आय-व्यय का हिसाब मंदिर की मैनेजिंग कमेटी करती थी। करीब चार साल पहले मंदिर की यह कमेटी निष्क्रिय हो गई। कमेटी नहीं रहने के कारण तब एआरसीएस फरीदाबाद ने मंदिर के अकाउंट, बैंक अकाउंट को सील कर दिया। इसके बाद सोसायटी की आस्थावान सदस्य अंजू चौधरी मंदिर की सेवा करने लगीं, लेकिन यह बात भी धुन्ना को हजम नहीं हुई। अंजू चौधरी को साइड करने के लिए अन्य मेंबरों को मंदिर कमेटी में घुसेड़ दिया। संदर्भवश बताते चलें कि धुन्ना को सोसायटी का प्रधान बनाने में अंजू चौधरी का बड़ा योगदान रहा है लेकिन मंदिर के कारण अंजू चौधरी की बढ़ती लोकप्रियता को देख कर धुन्ना को घबराहट हुई और उसने अंजू को मंदिर कमेटी से बाहर करने के लिए ही यह साजिश रची।

करीब दो साल पहले मंदिर की एक अन्य भक्त मोनिका भाटिया ने एक मंदिर कमेटी बना कर डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार फरीदाबाद कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराया और वह प्रधान बन गईं। मंदिर कमेटी के रजिस्ट्रेशन की बात राकेश धुन्ना को हजम नहीं हुई और वह इस पर कब्जा करने की साजिश रचने लगा। मंदिर के अकाउंट तो पहले ही सील थे, करीब डेढ़ साल पहले दान पेटी भी सील करवा दी गई।

इसके साथ ही धुन्ना ने मोनिका भाटिया का खुल कर विरोध शुरू कर दिया। करीब डेढ़ महीने पहले धुन्ना ने सहायक रजिस्ट्रार सहकारिता प्रवीण कादियान से मिलीभगत कर 30-40 सदस्यों की एक नई मंदिर प्रबंधन कमेटी बना डाली। इतना ही नहीं धुन्ना की शह पर सहायक रजिस्ट्रार ने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाते हुए मोनिका भटिया की मंदिर प्रबंधन कमेटी का रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल करवा दिया। मोनिका भाटिया ने इसके खिलाफ स्टेट रजिस्ट्रार में अपील कर दी, वहां पर मामला विचाराधीन है।

करीब एक महीने पहले सहायक रजिस्ट्रार प्रवीण कुमार कादियान के आदेश पर सहकारिता विभाग के कर्मचारियों ने रात के समय में मंदिर का दानपात्र खोल कर उसका सारा धन निकाल लिया। सुबह जब लोगों को इसकी जानकारी हुई तो उन्हें प्रवीण कादियान ने बताया कि दान पात्र से निकला सारा धन मंदिर के बैंक अकाउंट में जमा करवाया जाएगा, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि दान पात्र से कुल कितनी रकम निकली। हफ़्ता-दस दिन बीत चुकने के बाद भी दानपात्र की रकम मंदिर के बैंक अकाउंट में जमा नहीं करवाई गई। सुनने में आया है कि उस पैसे को किसी अन्य अकाउंट में जमा करवाया गया है, क्योंंकि मंदिर का अकाउंट तो सील था।

शिव मंदिर सैनिक कालोनी वालों के लिए आस्था का स्थान है लेकिन अब वहां हर समय लड़ाई झगड़े चलते रहते हैं, मंदिर के प्रति किसी की आस्था नहीं है। सवाल यह है कि यह सदस्यों द्वारा बनवाया गया मंदिर है तो इसमें सहायक रजिस्ट्रार प्रवीण कादियान क्यों दखल दे रहे हैं? उनका क्या स्वार्थ है? सहायक रजिस्ट्रार ने किस आधार पर मंदिर कमेटी बनाई? क्या सोसायटी के लोगों से मिले थे, या वो मेंबरों को जानते थे, जिस आधार पर मंदिर कमेटी बनाई गई है? सैनिक कॉलोनी में और भी भक्त है जो मंदिर में आस्था रखते हैं उन्हें क्यों नहीं मेबर बनाया गया? सच्चाई यह है कि वह केवल अपने गुर्गे राकेश धुन्ना को खुश करना चाहते हैं, क्योंकि धुन्ना के ही दम पर वह फरीदाबाद में रुके हुए हैं, इसीलिए धुन्ना ने जो नाम दिए वही मंदिर कमेटी में डाल दिए गए।

राकेश के इशारों पर ही वह पिछले तीन साल से सोसायटी का इलेक्शन नहीं होने दे रहे। इलेक्शन होने से इनकी लूट खसोट पर पाबंदी लग जाएगी। धुन्ना के नेतृत्व में जो पांच लोगों की कमेटी बनाई गई है वह पर्व या सामान्य दिनों में कभी भी पूजा पाठ करने मंदिर नहीं जाते। समझने वाली बात यह है कि जब कभी भी मंदिर को लेकर सदस्यों में विवाद हुआ और बात पुलिस तक पहुंची तो राकेश धुन्ना गायब हो गया, ऐसे समय में वह फोन तक नहीं उठाता यानी लड़ें भिड़ेें मेंबर और मजा उठाए राकेश धुन्ना। हम यह नहीं कहते कि कमेटी या उसके सदस्य बेईमान हैं लेकिन धुन्ना मंदिर के आय-व्यय का कोई लेखा जोखा मेंबरों के सामने नहीं रखता। सच्चाई यह है कि धुन्ना अपने वोट बैंक के लिए फूट डालो राज करो की नीति के तहत सोसायटी के मेंबरों को आपस में भिड़ाए रखने के लिए इस तरह की हरकतें कर रहा है। लोगों को उसकी इस साजिश को समझ कर एकजुट होकर मंदिर के लिए काम करना चाहिए। प्रवीण कादयान को भी चाहिए कि इस कमेटी को भंग करके मंदिर का ट्रस्ट बनाया जाए जिससे कि सारे विवाद समाप्त हों और मंदिर की मर्यादा बनी रहे। सहकारिता विभाग के आला अधिकारियों को भी चाहिए कि वे प्रवीण कादियान के अनैतिक कार्यों पर रोक लगाएं।

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Mazdoor Morcha
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