ईएसआई कॉर्पोरेशन 2026 में दस और मेडिकल कॉलेज खोलेगा

ईएसआई कॉर्पोरेशन 2026 में दस और मेडिकल कॉलेज खोलेगा
May 11 06:10 2025

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
केन्द्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने बीते सप्ताह एएनआई को दिए एक बयान में कहा कि 2026 में ईएसआई कॉर्पोरेशन दस और मेडिकल कॉलेज खोलने जा रहा है।
बीते वर्ष जब मांडविया ने श्रम मंत्रालय सम्भाला था तो देश भर में कॉर्पाेरेशन कुल आठ मेडिकल कॉलेज व दो स्नातकोत्तर (पीजी) कॉलेज होते थे। करीब सात माह पूर्व इन्होंने दस नए मेडिकल कॉलेज खोलने के साथ-साथ दो पीजी मेडिकल कॉलेजों में भी एमबीबीएस कोर्स शुरू कराने की बात कही थी। उन्होंने दावा किया था कि 2025 में इन कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। आशा के अनुरूप इन सभी प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों में तैयारी संतोषजनक ढंग से चल रही है। मंत्री जी की घोषणा से उत्साहित होकर ‘मज़दूर मोर्चा’ ने उसी वक्त उनका धन्यवाद करते हुए सुझाव दिया था कि गुडग़ांव, पुणे तथा विशाखापट्नम में जहां बीमाकृत मज़दूरों की संख्या 15 से 17 लाख तक है वहां भी मेडिकल कॉलेज खोलने अति आवश्यक हैं। इसके अलावा यह भी सुझाया गया था कि जहां-जहां भी बीमाकृत मज़दूरों की संख्या पांच लाख के आस-पास है वहां भी मेडिकल कॉलेज खोले जाने चाहिए।

बीते सप्ताह दिए गए मंत्री जी के बयान के अनुसार गुडग़ांव के मानेसर, महाराष्ट्र के पुणे, आंध्रप्रदेश के विशाखापट्नम, उड़ीसा के भुवनेश्वर, तमिलनाडु के मदुरै, केरला के कोल्लम, उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा व कानपुर के पांडु नगर, गुजरात के सूरत व नागपुर में तथा गोवा के मडगांव में ये मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। मंत्री जी का दावा है कि 2026 में यहां पर एमबीबीएस कोर्स का दाखिला शुरू हो जाएगा। इन कॉलेजों के शुरू होने से कॉर्पोरेशन के पास कुल 30 मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे।

‘मज़दूर मोर्चा’ पहले भी कई बार लिख चुका है कि कॉर्पोरेशन द्वारा मज़दूरों से जो वसूली की जाती है उसके बदले उन्हें बेहतरीन चिकित्सा सुविधा देनी होती है। लेकिन इसके विपरीत, उपलब्ध जानकारियों के अनुसार मज़दूरों को बेहतरीन तो क्या बद्तरीन चिकित्सा सेवा भी नहीं मिल पाती। कॉर्पोरेशन ने चिकित्सा का अधिकतर काम राज्य सरकारों को सौंपकर अपना पल्ला झाड़ रखा है। लेकिन जहां-जहां कॉर्पोरेशन ने स्वयं मेडिकल कॉलेज अस्पताल चलाए हैं वहां की सेवाएं काफी बेहतर हैं। व्यावहारिक तौर पर यह भी साबित हो चुका है कि जितनी बेहतर सेवाएं मेडिकल कॉलेज के माध्यम से दी जाती है वे अन्यथा सम्भव नहीं है। अपवाद स्वरूप दिल्ली के बसई दारापुर व मुंबई अंधेरी के पीजी मेडिकल कॉलेज भी हैं जहां की चिकित्सा सेवाएं बद्तरीन हालत में हैं।

मंत्री जी की सोच-समझ तो भली लग रही है। इसके अनुसार जहां मज़दूरों को बेहतरीन चिकित्सा सेवा मिलने की सम्भावना बढ़ती जा रही है वहीं देश मे मेडिकल शिक्षा का भी विस्तार तेजी से होने जा रहा है, यानी आम के आम गुठलियों के दाम। मंत्री जी बीते करीब एक साल में इतना तो समझ ही गए होंगे कि उनके कॉर्पोरेशन में कुछ निकम्मे, निकृष्ट व हरामखोर अधिकारियों का एक ऐसा गिरोह मुख्यालय पर काबिज है जो न तो खुद कोई काम करना चाहता है और न ही अन्य किसी को करने देना चाहता है। ज्यों ही 10 मेडिकल कॉलेज खोलने की बात मंत्री जी ने चलाई, उस गिरोह पर तो मानो वज्रपात ही हो गया। जो केवल फाइलों पर कुंडली मार कर बैठने का वेतन लेते रहे थे उन्हें मंत्री जी द्वारा काम की कहने पर नौकरी करनी भारी हो गई। कुछ तो छोड़ भागे और कुछ छोडऩे की फिराक में हैं। इससे पहले कि यह गिरोह काम बिगाड़ पाए मंत्री जी को खुद ही इन्हें बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। हकीकत समझने के लिए मंत्री जी केवल यह जानने का प्रयास करें कि फरीदाबाद का मेडिकल कॉलेज कैसे लगातार उन्नति करता जा रहा है और बसई दारापुर कैसे डूबता जा रहा है? यदि मंत्री जी ने यह खेल समझ लिया तो फिर 30 तो क्या 100 मेडिकल कॉलेज चलाने में भी कोई समस्या आने वाली नहीं है।

निकृष्ट अफसरों के इस गिरोह में कुछ चिकित्सा अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। कुछ अर्से पहले तक कॉर्पोरेशन के न केवल तमाम अस्पतालों बल्कि मेडिकल कॉलेजों पर भी इन्हीं का राज चलता था। अपना राज चलाने के लिए इस गिरोह द्वारा एमएस (चिकित्सा अधीक्षक) की नियुक्ति की जाती थी और सारे अधिकार इसी के पास रहते थे। डीन की औकात ढेले भर की भी नहीं रहती थी। इसके परिणाम स्वरूप चिकित्सा सेवा का स्तर निम्न से निम्नतर होता चला गया।

यद्यपि एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) की ओर से मेडिकल कॉलेज का एमएस किसी प्रोफेसर को ही लगाया जाना अनिवार्य है, इसके बावजूद भी गिरोह ने एमएस पद पर काफी समय तक अवैध कब्जा जमाए रखा। पहली अप्रैल से इस गिरोह के आखिरी तीन बड़े विकेट भी गिर गए जब अंधेरी, बसई दारापुर तथा नोएडा के मेडिकल कॉलेजों से गिरोह द्वारा नियुक्त एमएस भगा दिए गए। इनके अलावा सात वे अन्य विकेट भी गिर गए जहां डीन और प्रोफेसर स्तर के नए एमएस तैनात कर दिए गए हैं।
जाहिर है इससे मुख्यालय में बैठा गिरोह बुरी तरह से मर्माहत है। समझ नहीं आता ऐसे मर्माहत गिरोह को मंत्री जी किसी उम्मीद में दूध पिला रहे हैं?

आगामी रूपरेखा के मद्देनजर मंत्री जी को विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश, रायपुर छत्तीसगढ़, वडोदरा गुजरात, भोपाल मध्य प्रदेश, सलेम व मदुरई तामिलनाडु, लखनऊ और ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश में भी मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना बनानी चाहिए। इन स्थानों पर बीमाकृत मज़दूरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि छोटे-छोटे प्लॉटों पर मेडिकल कॉलेज खोलने की बजाय 40-50 एकड़ के भूखंड पर ही निर्माण करना चाहिए ताकि भविष्य में विस्तार सुगमता पूर्वक हो सके। मंत्री जी ने यह तो समझ ही लिया होगा कि उनके काम पर सीमाओं का कोई बंधन नहीं है। वे जितने चाहें मेडिकल कॉलेज खोल सकते हैं उनके परिचालन के लिए जितना चाहें कॉर्पोरेशन का दायरा बढ़ा सकते हैं और जितना चाहें धन की उगाही कर सकते हैं बशर्ते कि सारा काम ईमानदारी व सेवाभाव से किया जाए। उन्हें किसी से बजट पास कराने की आवश्यकता नहीं है, वे अपने कॉर्पोरेशन के खुद मुख्तार हैं।

मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ मंत्री जी को डिस्पेंसरियों की हालत पर भी गौर करना चाहिए। जब बीमाकृतों की संख्या दो करोड़ थी तब डिस्पेंसरियों की संख्या 1500 थी जो आज चार करोड़ बीमाकृतों के लिए भी लगभग उतनी ही बनी हुई है। इनमें $फरीदाबाद की वे 14 डिस्पेंसरियां भी हैं जहां न तो पर्याप्त स्टाफ हैं और न ही दवाएं आदि। और तो और इनमें ड्रेसिंग (मलहम पट्टी) व इंजेक्शन लगाने तक की सुविधा भी नहीं है। ये तमाम डिस्पेंसरियां और ऐसा ही निकृष्ट सेक्टर आठ का अस्पताल हरियाणा सरकार गले में डाले बैठी है। इन सबको तुरंत कॉर्पोरेशन को अपने अधिकार में ले लेना चाहिए।

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