रोज गार्डन में होगा गुलाबों का खेल, लूटे-बांटे जाएंगे 22 लाख रुपये

रोज गार्डन में होगा गुलाबों का खेल, लूटे-बांटे जाएंगे 22 लाख रुपये
April 30 15:00 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हरामखोर निगम अधिकारियों और विधायक-मंत्रियों की लूट कमाई का साधन बन चुके रोज गार्डन में अब गुलाब की बागवानी के नाम पर 22 लाख रुपयों की बदंरबांट करने की तैयारी है। एक्सईएन नितिन कादियान के मुताबिक रोज गार्डन को दस तरह के हाइब्रिड गुलाबों से गुलजार किया जाएगा। बागवानी के जानकारों के अनुसार गुलाबों के खिलने का सही समय फरवरी-मार्च और मध्य अप्रैल तक होता है। गर्मी की सख्त धूप में हाइब्रिड गुलाब के पौधों का पनप पाना और खिलना बहुत ही श्रमसाध्य और धन की बर्बादी ही होगा। ये पौधे 25-30 डिग्री सेल्सियस तापमान तक ही फल फूल पाते हैं और गर्मी में तापमान चालीस डिग्री से भी ज्यादा रहता है ऐसे में इनका तना और पत्तियां तक जल कर मुरझा जाते हैं फूल खिलना तो दूर की बात।

जिस रोज गार्डन में गुलाबों पर 22 लाख रुपये खर्च करने की बात की जा रही है वर्तमान में वहां पूरे पार्क में हरी घास तक नहीं है। कई जगह घास सूखी पड़ी है। यानी घास तक की सिंचाई की व्यवस्था नहीं है वहां गुलाब के पौधे फल फूल पाएंगे यह बड़ा सवाल है। जब नीयत ही गुलाब के पौधे लगे दिखा कर रुपयों की बंदरबांट की जाने की हो तो फिर क्या ही कहा जाए। सिर्फ घास ही सूखी नहीं पड़ी है। भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक दरअसल निगम में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनकैप) के तहत करोड़ों रुपये आए हैं। इतनी बड़ी धनराशि को कैसे ठिकाने लगाया जाए इसकी तरकीबें लगाई जा रही हैं।

तपती गर्मी में गुलाब के पौधे लगाए जाने की योजना भी ऐसी ही लूट खसोट वाली कुटिल चाल के तहत बनाई गई है। यदि लूट कमाई की योजना नहीं होती तो हवा को साफ करने के लिए अनेक दूसरे तरह के सदाबहार पौधे लगाए जाते जो वायु प्रदूषण भी कम करते और एक बार लगाए जाने पर कई वर्ष तक जीवित रहते। बेमौसम गुलाब के पौधे लगाया जाना इसीलिए निर्धारित किया गया है कि उन्हें मुरझा जाना दिखाया जा सकता है या दो महीने बाद, फूल आना बंद हो गए बता कर फाइल बंद कर दी जाएगी। कागजों पर ही फूल उगाकर 22 लाख की बंदरबांट हो जाएगी।

एक्सईएन ने बताया कि हाइब्रिड गुलाब लगाने के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। सुधी पाठकों को बताते चलें कि नगर निगम की अपनी हॉर्टीकल्चर ब्रांच है, नर्सरी है, जिसमें पौध तैयार करने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। हॉर्टीकल्चर ब्रांच है तो मालियों की फौज भी है। समझने वाली बात यह है कि नगर निगम के अधिकतर पार्क आरडब्ल्यूए, व्यावसायिक संस्थानों ने गोद लिए हुए हैं यानी उनकी देखरेख और बागवानी इन संस्थाओं द्वारा की जाती है। यानी नगर निगम के मालियों की फौज नर्सरी मेें गुलाब की कलमें तैयार करने के लिए पर्याप्त मात्रा में मौजूद है, बावजूद इसके टेंडर निकाला गया है। जानकार कहते हैं कि टेंडर भी विधायक-मंत्री के चहेते को ही मिलेगा।

सुधी पाठकों को याद होगा कि पूर्व मंत्री सीमा त्रिखा के कार्यकाल में रोज गार्डन का कायाकल्प करने के नाम पर लाखों रुपये डकारे गए थे। तब रोज गार्डन में पैदल पथ पर टाइलें लगाने, बाउंड्रीवाल, रेलिंग, झूले, कैनोपी, बेंच आदि बदलने के लिए करीब ढाई करोड़ खर्च किए गए थे। पुरानी रेलिंग को ही रंग कर नए के पैसे वसूले गए थे, इसी तरह बाउंड्रीवाल में पत्थरों लगाने में भी लाखों रुपये हड़पे गए थे। झूले, कैनोपी, बेंच, डस्टबिन आदि का पैसा भी डकारा गया था। जाहिर है कि इस बंदरबांट में सीमा त्रिखा की भी हिस्सापत्ती थी क्योंकि प्रोजेक्ट उन्होंने ही बनवाया था। बताया जा रहा है कि वर्तमान में गुलाबों की खेती का प्रोजेक्ट विधायक धनेश अदलखा के इशारे पर बनाया गया है, तर्क दिया जा रहा है चुनाव जीतने के बाद अदलखा रोज गार्डन गए थे वहां लोगों ने पार्क की दुर्दशा का रोना रोया था तो विधायक ने जल्द ही इसे गुलजार बनाने का आश्वासन दिया था। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत लगाए जाने वाले गुलाबों से हवा साफ होगी या नहीं ये तो नहीं बताया जा सकता लेकिन यह तो तय है कि गुलाबों के नाम पर 22 लाख रुपये साफ कर दिए जाएंगे।

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Mazdoor Morcha
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