फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सस्ते रिहाशयी आवासों को सुविधाजनक तरीके से बनाने के लिए सहकारिता विभाग की स्थापना की गई थी। लेकिन सहकारिता का विचार प्रतिपादित करने वाले लोगों को इस बात का अंदाजा शायद नहीं रहा होगा कि इसके नाम पर विभागीय अधिकारी और राजनेता किस तरह से आम जनता का उल्लू बना कर उनकी जेबें काटेंगे। दि फरीदाबाद एक्स सैनिक को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी लिमिटेड तो एक उदारहण मात्र है, शायद ही कोई हाउसिंग सोसायटी इस लूट मार से बची हो।
इस सोसायटी के विस्तार के रूप में स्थापित सैनिक विहार सैक्टर 88 के फ़्लैटों की मोटी लूट कमाई की बंदरबांट करने के इरादे से ही राकेश धुन्ना सोसायटी का चुनाव ही नहीं होने दे रहा। यही कारण है कि दिसंबर 2021 से सोसायटी में कोई प्रबंधन कमेटी नहीं बन सकी है। चुनाव होने पर राकेश धुन्ना के मंसूबे धरे के धरे रह जाते। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सैनिक विहार के 702 फ़्लैटों में से 21 सदस्यों ने अपने हिस्से के पैसे सोसायटी में बिल्डर के पास जमा नहीं करवाए थे। इस वजह से जनरल बॉडी बैठक में यह तय हुआ था कि डिफाल्टर सदस्यों की सदस्यता रद्द कर नए सदस्य बनाए जाएं और उनके लिए फ्लैटों के रेट पहले से लगभग दोगुने तय कर दिए गए। सोसायटी प्रबंधन के लिए धुन्ना ने सहकारिता विभाग के बिके हुए अधिकारियों असिस्टेंट रजिस्ट्रार (एआर) रामकुमार और डिप्टी रजिस्ट्रार (डीआर) रोहिल्ला से मिल कर संयुक्त कमेटी का गठन करवाया। उस संयुक्त समिति ने अंदरखाने गुमनाम से अखबार विराट वैभव में इन 21 फ़्लैटों की निविदा का प्रकाशन करवाया और बिचौलियों के जरिए कुछ भोले-भाले सदस्यों को फंसा लिया। सोसायटी में उन नए सदस्यों ने सोचा कि बहुत सस्ते फ़्लैट मिल रहे हैं क्यों न फटाफट खरीद लिए जाएं। सोसायटी ने नो लॉस नो प्रॉफिट का दिखावा करके उन सदस्यों से उतने ही पैसे जमा करवाए जितने पुराने वाले मैंबरों को देने थे बाकी इन फ़्लैटों का ऊपर का पैसा प्रति फ्लैट 15 लाख से 25 लाख रुपये ये लोग डकार गए। जब इन नए मेंबरों ने पूछा कि हम पैसे तो ज्यादा दे रहे हैं और रसीद कम की दी गई है तो सोसायटी मैनेजर राजेंद्र सिंह चौहान ने उनको यह कहकर बहकाया कि जब आपको पूरे दस्तावेज देंगे तो बाकी पैसों की रसीद भी दे देंगे। आज तक न तो पूरे दस्तावेज मिले हैं और न ही बाकी पैसों की रसीदें मिली हैं। सभी कमेटी सदस्य और पदाधिकारी मिल कर फ्लैटों की ऊपर वाली रकम जो लगभग दो करोड़ रुपये बताई जा रही है आपस में डकार गए। अब उन 16 फ़्लैटों के सदस्यों को पजेशन लेटर नहीं दिया जा रहा है, ये होने वाले सदस्य पजेशन लेटर पाने के लिए बिचौलियों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन बिचौलिए टका सा जवाब देकर बहला देते हैं कि धुन्ना जी प्रयास कर रहे हैं, बताते चलें कि पजेशन लेटर नहीं होने के कारण इन लोगों से कभी भी फ्लैट खाली कराए जा सकते हैं। इधर 16 पुराने सदस्यों ने समिति की इस धांधली का कच्चा चि_ा रजिस्ट्रार पंचकूला के सामने पेश किया तो उन्होंने तुरंत ही इस गड़बड़ी को रोकने के लिए उनके हक में स्टे जारी कर दिया। अब करोड़ों रुपये गंवाने वाले नए सदस्यों का क्या कुसूर है, उनको क्या पता था कि धुन्ना एंड कंपनी उनके साथ इतनी बड़ी धोखाधड़ी करेगी।
यह चर्चा भी सुनने में आ रही है कि 21 फ्लैटों में से जो 5 बचे हुए हैं उन पुराने सदस्यों ने भी अपने फ्लैट बचाने के लिए विभाग में आवेदन किया हुआ है लेकिन विभागीय उच्चाधिकारी कोई संज्ञान नहीं ले रहे हैं। यह भी सुनने में आ रहा है कि एआर प्रवीण कादियान ने एक और संयुक्त समिति बना कर इन पांच फ़्लैटों को बिचौलिये धुन्ना के माध्यम से हड़पने की तैयारी शुरू कर दी है। अब धुन्ना एंड कंपनी और प्रवीण कादियान की ज्वाइंट कमेटी के धोखे में आकर कौन से भोले भाले मेंबर फ्लैट खरीद कर फंसेंगे ये तो समय ही बताएगा।
पूर्व एआर रामकुमार जिसने धुन्ना की मिलीभगत से संयुक्त समिति बनाई थी वह भ्रष्टाचार के एक अन्य केस में जेल जाकर आ चुका है और अब मस्ती काट रहा है उससेे कोई रिकवरी नहीं हुई। वह बेखौफ होकर लूट के नए अवसर तलाशने में जुटा है। समझा जा सकता है कि रामकुमार जैसे भ्रष्ट अधिकारी सदस्यों के हित नहीं बल्कि अपनी जेब भरने के लिए धुन्ना जैसे दगाबाज दलालों से सांठगांठ करते हैं। हालांकि एआर राम कुमार ने अपने से भी बड़े चोर डीआर गुडग़ांवां रोहिल्ला के साथ मिल कर ज्वाइंट कमेटी बनाई थी लेकिन रोहिल्ला अपनी जेब भर कर साफ निकल गया, उसके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई होने की कोई भी संभावना नजर नहीं आ रही है।
अब देखना यह है कि इन पांच फ़्लैटों की मलाई खाने के लिए एआरसीएस प्रवीण कादियान धुन्ना के साथ मिल कर क्या खेल रचता है। बार बार कहने पर भी वह सोसायटी का चुनाव नहीं करवा रहा है क्योंकि चुनाव होने पर उनके भ्रष्टाचार और मोटी कमाई पर अंकुश लगना तय समझा जाता है। धुन्ना हो या विभागीय अधिकारी, स्थानीय शातिर राजनेताओं की गिद्धदृष्टि से बचकर यह लूट कमाई नहीं कर सकते। अब से पहले चाहे विधायक सीमा त्रिखा रही हों या आज के शातिरतम विधायक धनेश अदलखा हों इस खेल में पूरी तरह से शामिल रहे थे और रहते रहेंगे। यदि ये राजनेता सोसायटी सदस्यों के हितैषी होते तो विभागीय अधिकारियों की हिम्मत नहीं होती कि वे सदस्यों के हितों पर इस तरह के कुठाराघात कर सकते।