फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बीते सप्ताह मंगलवार को ईएसआई मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर एके पांडे से बहुत खुश नज़र आने का कारण पूछने पर उन्होंने इस संवाददाता को बताया कि शहरी निकाय कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने संस्थान की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए 15-20 एकड़ ज़मीन का आश्वासन दिया है। डॉक्टर पांडे ने बताया कि सोमवार को वे मंत्री जी से उनके आवास पर मिलने गए थे। उन्होंने मंत्री जी को बताया कि नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल कॉलेज तथा ट्रॉमा सेंटर खोलने के लिए उन्हें कम से कम 15 एकड़ अतिरिक्त ज़मीन की आवश्यकता है, जो संस्थान के आस-पास उपलब्ध कराई जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि 500 बेड का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शीघ्र ही मौजूदा परिसर में बनने जा रहा है। ऐसे में उक्त दोनों के लिए परिसर में कोई स्थान नहीं बचता।
मंत्री जी ने नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल कॉलेज की पूरी जानकारी प्राप्त करके पाया कि इनमें दाखिले के लिए आधी सीटें राज्य सरकार के कोटे से जबकि शेष 50 प्रतिशत ईएसआई कवर्ड मज़दूरों के बच्चों से भरी जाएंगी। दाखिले की प्रक्रिया नीट के द्वारा ही होगी। दरअसल मंत्री जी यह जानना चाहते थे कि इस कॉलेज से उनके शहरवासियों को क्या लाभ होगा? डॉक्टर पांडे के जवाब से मंत्री जी संतुष्ट हो गए कि इससे उनके राज्य एवं शहरवासियों को नए अवसर उपलब्ध हो पाएंगे।
ईएसआई कॉर्पोरेशन केवल अपने बीमाकृत लोगों को ही चिकित्सा सेवा प्रदान करता है, ऐसे में ट्रामा सेंटर के बारे में मंत्री जी यह जानना चाहते थे कि इससे आम जनता को क्या मिलेगा? यदि कॉर्पोरेशन आम जनता को भी ट्रामा सेंटर की सेवा, अपने बीमाकृत लोगों के बराबर देने का अनुबंध करे तो कॉर्पोरेशन को यह ज़मीन बिल्कुल मुफ्त दी जा सकती है। ज़मीन 15 एकड़ होगी या 20 इसका निर्णय तो ज़मीन की माप-जोख करने के बाद ही हो पाएगा।
डॉक्टर पांडे ने बिना किसी देरी के तुरन्त जवाब दिया कि ट्रॉमा सेंटर आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हो पाएगा क्योंकि सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों के लिए राष्ट्रीय राज मार्ग प्राधिकरण तथा केन्द्र सरकार पर्याप्त ग्रांट देते हैं। इसके चलते कॉर्पोरेशन के ऊपर कोई अतिरिक्त खर्च भार पडऩे वाला नहीं होगा। विदित है कि ट्रामा सेंटर में आने वाले घायलों को दो भागों में बांटा जा सकता है। पहले में औद्योगिक दुर्घटना वाले तथा दूसरे में सड़क दुर्घटना वाले। औद्योगिक दुर्घटना वाले तो विशुद्ध रूप से बीमाकृत ही होंगे तथा सड़क दुर्घटनाओं में दोनों श्रेणियों के हो सकते हैं। ऐसे में इनकी छंटाई करने व हिसाब-किताब रखने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
समझा जाता है कि डीन की बातों से मंत्री जी पूर्णतया संतुष्ट थे और नगर निगम उनके अधीन होने के चलते, तमाम का$गजी कार्रवाइयां सम्पन्न होने के बाद जल्द ही संस्थान से लगती ज़मीन में से 15-20 एकड़ ज़मीन मेडिकल कॉलेज अस्पताल को मिल पाएगी। यदि मंत्रीजी का यह आश्वासन पूरा हो जाता है तो यह, ईएसआई मेडिकल कॉलेज अस्पताल के 10 वर्षीय इतिहास में एक आश्चर्यजनक उपलब्धि होगी।
विदित है कि बीते दस वर्षों में किसी भी स्थानीय विधायक, सांसद एवं मंत्री आदि ने इस संस्थान के लिए रत्ती भर भी योगदान नहीं दिया। योगदान तो दूर विधायक चुने जाने से पूर्व सीमा त्रिखा तो इस संस्थान के विरुद्ध केवल इसलिए धरने पर बैठ गई थी कि 20-30 झुग्गियों को इधर से उधर करना पड़ रहा था। शेष सत्तारूढ़ नेतागण भी आए दिन तरह-तरह की फटीग तो इस संस्थान पर डालते रहे लेकिन किसी प्रकार की सहायता एवं सहयोग के लिए कभी नहीं आए। एक विधायक तो यहां दवाइयां सप्लाई करने का ठेका लेने की जुगत में तो दूसरा जो बदकिस्मती से हार गया, लेबर सप्लाई के ठेके लेने के सपने देख रहा था।
स्थानीय नेताओं का उल्लेख करते वक्त तत्कालीन कैबिनेट मंत्री एसी चौधरी को भूल जाना भी उचित न होगा, गौरतलब है कि फरवरी 2009 तक एनएच तीन का 200 बेड का यह अस्पताल मात्र पंद्रह एकड़ में ही था जबकि मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए कम से कम 30 एकड़ का भूखंड और तीन सौ बेड का अस्पताल होना आवश्यक था। एसी चौधरी ने अपने सद्प्रयासों से 25 फरवरी को अस्पताल को 300 बेड घोषित करा दिया और चंद घंटों मेें पास लगती 15 एकड़ जमीन कार्पाेरशन के नाम करवा दी और 27 फरवरी को तत्कालीन श्रममंत्री ऑस्कर फर्नांडीस से शिलान्यास करवा दिया। यदि यह काम इस समय अवधि में न हो पाते तो फिर कभी नहीं हो सकते थे क्योंकि 28 फरवरी को आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई थी। जिस सक्रियता से एसी चौधरी ने अपनी शक्तियों का सदुपयोग करते हुए शहर के लिए यह नायाब तोहफा प्रदान किया था उसी तरह विपुल गोयल भी अपनी शक्तियों का सदुपयोग करके इतिहास मेें अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।