फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 62 निवासी दीपक के अपने दोस्त करण की पत्नी से अवैध संबंध थे। इस बात को लेकर दीपक और करण में कई बार लड़ाई भी हो चुकी थी। 16 दिसंबर 2024 को करण ने दीपक को सेक्टर 62 आशियाना फ्लैटों के पीछे बुलाया और शराब पिलाई। नशे में धुत्त होने पर करण ने पहले दीपक के सिर पर किसी चीज से प्रहार कर बुरी तरह घायल कर दिया, इसके बाद मफलर से गला घोंट कर जान लेेने के बाद शव झाडिय़ों में ही फेक कर भाग गया था।
दीपक के नहीं लौटने पर भाई दिलीप ने दूसरे दिन आदर्श नगर थाने में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। आठ जनवरी को दीपक का क्षत विक्षत शव आशियाना फ्लैट की झाडिय़ों में पड़ा मिला। शव मिलते ही कथित देव सेना व हिंदू धर्म के स्वयंभू ठेकेदार सक्रिय हो गए और दिलीप को अपने कब्जे में लेकर ब्रेनवाश कर दिया। जो दिलीप अभी तक पुलिस से अपने भाई के फोन की कॉल डिटेल मांग रहा था, देव सेना और धर्म के ठेकेदारों के संपर्क में आते ही, उसने मोहल्ले के ही एक दो नहीं बारह मुसलमान युवकों को दीपक की हत्या करने का आरोपी बना दिया। अब उसके लिए भाई दीपक को तलाश करने से ज्यादा महत्वपूर्ण मोहल्ले के फकरुद्दीन, इदरीस, अनवर अजहरउद्दीन, आजाद, सोहेल साबिर, साहिल, गोलू, मोना, आजाद साहिल अकीश, शाहरुख और साबिर के साले को पकड़वाना हो गया।
खुद को देव सेना का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताने वाले ब्रजभूषण सैनी ने दबाव बनाने के लिए पुलिस पर आरोप लगाया कि दो मुसलमान पुलिसकर्मियों के कारण एसएचओ आदर्श नगर और क्राइम ब्रांच डीएलएफ हत्यारोपियों को नहीं पकड़ रही है। ब्रजभूषण सैनी की मौजूदगी में दिलीप ने आरोप लगाया कि मुस्लिम युवक मोना ने उसे धमकाया कि दो-तीन दिन में तुुम्हें तुम्हारे भाई का अंजाम पता लग जाएगा। दबाव में आई पुलिस ने बारह आरोपियों को पकड़कर तीन चार दिन तक अपने ढंग से पूछताछ की, जाहिर है कि क्राइम ब्रांच वालों ने इन सबसे प्यार से पूछताछ नहीं की, पुलिसिया भाषा में सबको पानी पिलाया गया और कुबूल करवाने के सभी हथियार इस्तेमाल किए गए लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। बेगुनाह साबित होने के बाद भी 13 जनवरी तक किसी को छोड़ा नहीं गया। देव सेना व अन्य संगठन खुलेआम मुसलमानों को हत्यारा बता कर माहौल को उत्तेजित करने और दंगा भड़काने का प्रयास करते रहे।
13 जनवरी को सीआईए ने दीपक की हत्या के आरोप में दोस्त करण को पकड़ा तो उसने सच्चाई बताई। करण ने बताया कि उसने दो शादियां कर रखी हैं। दोस्त दीपक से उसकी पहली पत्नी के अवैध संंबंध हो गए थे, मना करने के बावजूद वह मान नहीं रहा था इसलिए रास्ते से हटा दिया। घटना का खुलासा होने के बाद से देव सेना व अन्य हिंदू संगठन गायब हैं। पुलिस अधिकारियों को हिंदू-मुसलमान के रूप में चिह्नित करने वाले संगठन के खिलाफ भी तो समाज में वैमनस्यता फैलाने का केस दर्ज होना चाहिए, और कुछ नहीं तो कम से कम पुलिस को गुमराह करने के एवज में सीआरपीसी की धारा 182 तो उन पर लग ही जानी चाहिए।