फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हरियाणा फार्मेसी काउंसिल के पांच करोड़ हड़पने के आरोपी बडख़ल विधायक धनेश अदलखा जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने-लुटाने के लिए अजीबो गरीब प्रोजेक्ट बनाने में लगे हैं। अब रोज गार्डन में टहलने वालों के लिए ईपीडीएम (इथाइलीन प्रोपाइलीन डाइईन मोनोमर) ट्रैक या आसान शब्दों में रबर ट्रैक बनाने के नाम पर लूटने की तैयारी है। नगर निगम ने इसके लिए बाकायदा डेढ़ करोड़ रुपये का टेंडर भी जारी कर दिया है, जानकारों के अनुसार टेंडर में जो स्पेसिफिकेशन दिए गए हैं उनके आधार पर तो ट्रैक 35 से 40 लाख में बन जाएगा, यानी ट्रैक के नाम पर एक करोड़ रुपयों से ज्यादा की बंदरबांट का इंतजाम है।
रोज गार्डन में ईपीडीएम ट्रैक बिछाने की जिम्मेदारी मैडम के पांच लाख के लहंगे का बिल ठेकेदार से दिलवाने वाले ‘होनहार’ एक्सईएन नितिन कादियान को सौंपी गई है। लहंगे के बाद अब कादियान द्वारा मातहत कनिष्ठ अभियंताओं से अपने रिश्तेदारों को महंगे स्मार्टफोन गिफ़्ट करवाने की चर्चा निगम में छाई हुई है। नितिन कादियान के अनुसार रोज गार्डन में एक किलोमीटर लंबा और डेढ़ फुट चौड़ा ईपीडीएम ट्रैक बिछाया जाएगा। यह ट्रैक अन्य सामग्री से बने ट्रैक से ज्यादा टिकाऊ होता है। महज डेढ़ फुट चौड़ा ट्रैक बनना किसी अचंभे से कम नहीं है। अधिकतर जगहों पर तो इसकी चौड़ाई कम से कम एक मीटर होती ही है। जबकि निगम के ‘होनहार’ एक्सईएन महज डेढ़ फुट चौड़ा बनाने जा रहे हैं।
पार्क में एक किलोमीटर लंबा और डेढ़ फुट चौड़ा ट्रैक बनाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यानी पार्क में (एक किलोमीटर) 3280.04 & 1.5 फुट = 4921.26 वर्ग फुट ईपीडीएम ट्रैक बिछाया जाएगा। बाजार में 10 -15 मिलीमीटर मोटाई वाली ईपीडीएम शीट 90 से 150 रुपये वर्ग फुट की दर से उपलब्ध है। 25 से 36 मिलीमीटर मोटाई वाली ईपीडीएम शीट 200 से 370 रुपये वर्ग फुट की दर से उपलब्ध है। थोक भाव में तो इसकी कीमत और भी कम हो सकती है। ये दाम ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म इंडिया मार्ट से लिए गए हैं कोई भी इस साइट पर जाकर देख सकता है।
यदि 370 रुपये वर्गफुट की दर से भी ईपीडीएम शीट खरीदी जाएगी तो पूरे एक किलोमीटर ट्रैक की कीमत लगभग 18 लाख 21 हजार रुपये होगी। इसे बिछाने के लिए ढांचा बनाने में भी पंद्रह से बीस लाख रुपये का खर्च होने का अनुमान है। यानी पूरा ट्रैक बनाने में बहुत ज्यादा चालीस लाख रुपये ही खर्च होने वाला है लेकिन डेढ़ करोड़ का टेंडर जारी किया जा रहा है।
समझा जा सकता है कि जिस नगर निगम में फाइनेंस कंट्रोलर ने अपना और मैडम का कमीशन दो से बढ़ा कर तीन प्रतिशत और एसीएमसी की कमीशन राशि आधे से बढ़ाकर एक प्रतिशत कर दी गई हो, बाकी सभी स्तर पर बंटते कटते करीब चालीस प्रतिशत धनराशि की बंदरबांट होती हो, वहां जनता की गाढ़ी कमाई को इसी तरह लुटाया जाएगा। इन सबके ऊपर पांच करोड़ी विधायक भी तो हैं जिनके भ्रष्टाचार को उनकी ही सरकार के मंत्री राव नरबीर सिंह भी बयान कर चुके हैं, उनका भी तो हिस्सा बनेगा। सबको बांटने के बाद ठेकेदार भी तो बीस-पच्चीस फीसदी बचाएगा। ऐसे में यदि डेढ़ करोड़ का टेंडर नहीं बनाया जाएगा तो फिर जनता की गाढ़ी कमाई कैसे लूटी जाएगी।
सुधी पाठकों की समझ के लिए बता दें कि ईपीडीएम शीट इलेक्ट्रिक या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने वाली फैक्टरियों के फर्श पर बिछाई जाती है। इसके अलावा जिम व एथलेटिक्स ट्रैक बनाने में भी इसका इस्तेमाल होता है। आउटडोर हालात में धूप, बरसात के चलते रबर होने के कारण यह दो से तीन साल तक ही टिकती है। यही कारण है कि करोड़ों रुपये लूट के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी स्मार्ट पार्कों में ईपीडीएम ट्रैक नहीं बनवाया गया। रोज गार्डन हो या कोई अन्य पार्क अधिकतर लोग घास पर चहलकदमी और आराम करने आते हैं। रोज गार्डन में टहलने के लिए पहले से ही कोटा स्टोन का ट्रैक बना हुआ है। खेलों से जुड़े लोग कहते हैं कि रबर का ट्रैक चाहे जितना मजबूत हो स्टोन के ट्रैक के बराबर नहीं हो सकता। शहर में कई स्टेडियम हैं जिनमें खिलाडिय़ों के लिए रनिंग ट्रैक भी ठीक से नहीं बने हैं, यदि उनमें ईपीडीएम ट्रैक बनाया जाता तो शायद खिलाडिय़ों का फायदा होता, किसी पार्क में इसका लगाया जाना केवल पैसों की बर्बादी होगी।