कामगारों को मशीन न समझो एलएंडटी चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन

कामगारों को मशीन न समझो एलएंडटी चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन
January 20 07:24 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) कामगारों को सप्ताह में नब्बे घंटे काम करने की सलाह देने वाले एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सु्ब्रह्मण्यन की इंकलाबी मज़दूर केंद्र ने कड़ी भत्र्सना की है। केंद्र के सदस्यों ने बुधवार सुबह श्रम न्यायालय सेक्टर 12 के सामने सु्ब्रह्मण्यन के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया और सरकार से मज़दूरों के कल्याण में चारों लेबर कोड वापस लेने और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराने की मांग की।

इंकलाबी मज़दूर केंद्र के सदस्य एसएन सुब्रह्मण्यन शर्म करो, मज़दूरों को मशीन समझना बंद करो के नारे लगाते हुए श्रम न्यायालय परिसर में इकट्ठा  हुए। वक्ताओं ने एसएन सुब्रह्मण्यन को मज़दूर और मानवता विरोधी बताया। महिला वक्ता ने कहा कि 51 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष पैकेज लेने वाले सु्ब्रह्मण्यन और इन्फोसिस के नारायणमूर्ति एसी कमरों में बैठ कर उन कामगारों को ज्ञान देते हैं जो फील्ड पर हाड़तोड़ मेहनत कर उनकी कंपनियों को करोड़ों रुपये कमा कर दे रहे हैं।

उनसे सप्ताह में नब्बे घंटे काम करने को कहा जा रहा है, यानी कंपनी के लिए मानव नहीं मशीन की तरह काम करो। मशीनें भी लगातार नहीं चलाई जातीं, उन्हें भी थोड़ी देर रोक दिया जाता है कि कोई खराबी न आ जाए, इसके विपरीत मानव कामगारों से मशीन की तरह सप्ताह में 90 घंटे काम करने को कहा जा रहा है, यानी प्रतिदिन 15 से 16 घंटे करना पड़ेगा। यानी कामगार परिवार, समाज को त्याग कर अपनी सेहत की कीमत पर काम करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोलते हैं कि वह प्रतिदिन 18 घंटे काम करते है, वह झूठ बोलते हैं, इतनी देर काम करने से दिमाग और शरीर बुरी तरह थक जाएंगे और कार्य क्षमता बुरी तरह प्रभावित होगी। सुब्रह्मण्यन नब्बे घंटे की मांग तो कर रहे हैं लेकिन मज़दूरों-कामगारों का वेतन, सुविधाएं बढ़ाने की कोई बात नहीं कर रहे।

इस मौके पर इंपीरियल ऑटो कंपनी में मज़दूरों के साथ हो रहे अत्याचार का मामला भी उठाया गया। वक्ता का कहना था कि कंपनी रातों रात अपना नाम बदल देती है। जो पुराने मज़दूर काम रहे थे उनका कोई भी हिसाब वो देना नहीं चाहती है और अब कहती है कि ये मज़दूर हमारे नहीं हैं। यह भी श्रम कानूनों का उल्लंघन है। श्रम कानूनों में साफ लिखा है कि यदि आप मज़दूरों की सेवा समाप्त कर रहे हो तो उसने जितने साल सेवा की है और उसका जो भी बकाया है पहले उसे अदा करना होगा, लेकिन आज ऐसा नहीं हो रहा है कंपनियां खुलेआम श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ा रही हैं।

मज़दूरों को काम करते हुए छह-छह, सात-सात साल हो गए हैं लेकिन कंपनी बड़ी बेशर्मी से मज़दूरों के अधिकार छीन रही है। प्रदर्शन में क्रांतिकारी मज़दूर केंद्र और इंपीरियल ऑटो कंपनी के कर्मचारी मौजूद रहे।

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Mazdoor Morcha
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