पानीपत (मज़दूर मोर्चा) झूठ के पकौड़े तलने में माहिर जुमलेबाज प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी खर्च पर नौ दिसम्बर को पानीपत में मजमा लगाया। सुरक्षा प्रबन्धन के नाम पर जहां राज्य भर के तमाम जि़लों से बुला कर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, वहीं जनता को ढो कर लाने के लिए हरियाणा रोडवेज की करीब 200 बसों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों से पकड़ कर लाई गई बसें अलग से। इसके बावजूद भी मजमें में हाजिरी 40 हजार से अधिक नहीं हो पाई।
दो करोड़ नौकरियां प्रति वर्ष देने का वायदा 2014 में करने वाले जिस मोदी ने एक करोड़ से अधिक सरकारी पद ही खाली छोड़े हुए हैं, वही मोदी जी ने महिलाओं को दो लाख नौकरियां बांटने के लिए यह मजमा लगाया था। जिस काम को माोदीजी नौकरी बता रहे हैं वह अपने आप में एक बहुत बड़ा धोखा है। नौकरी के नाम पर महिलाओं को एलआईसी (भारतीय बीमा निगम) में एजेंट बनाया जा रहा है। मजमे में मौजूद वित्त मंत्री निर्मला ताई ने आगामी दो वर्षों में महिलाओं को ऐसी दो लाख नौकरियां देने का वायदा किया है। नामकरण करने में माहिर इन मजमेबाजों ने एजेंट शब्द की जगह बीमा सखी जैसा आकर्षक नाम दिया है। मामूली से मामूली समझ रखने वाला हर आदमी यह जानता है कि किसी भी बीमा एजेंट को कहीे से भी कोई वेतन नहीं मिलता। इन एजेंटों को भले ही बीमा सखी का नाम दे दिया जाय तो भी इन्हें बीमा पॉलिसी बेचने पर पहले से ही तयशुदा कमीशन मिलेगा। एलआईसी एजेंट बनने के लिए किसी को भी न तो निर्मला ताई की सिफारिश चाहिए और न ही जुमलेबाज मोदी की। हर शहर व कस्बे में एलआईसी के अधिकारी सदैव बीमा एजेंट खोजते मिल जाएंगे। ये अधिकारी अपना टारगेट पूरा करने के लिए अधिक से अधिक एजेंट भर्ती करने की फिराक में रहते हैं। प्राय: देखने में आता है कि अधिकतर बीमा एजेंट कुछ समय बाद अथवा कोई उचित काम मिलने पर एजेंसी छोड़कर निकल लेते हैं। मोदी के इस मजमे को सफल दिखाने के लिए प्रदेश के सभी जिलों सहित पड़ोसी पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश आदि के विभिन्न जिलों से भाड़े की जनता को बड़ी संख्या में पकड़ कर लाया गया था। इससे पता चलता है कि हरियाणा में इनकी कितनी पकड़ है और पानीपत से कितने लोग आए होंगे। दिहाड़ी एवं लंच पैकेट पर भर-भरकर भीड़ लाई गई। इसके साथ ही राज्य भर के तमाम एलआईसी अधिकारियों के जिम्मे एजेंसी के फार्म भरवाने का कोटा लगाया गया था। यानी कि अधिकारी बहला-फुसला कर लोगों के फार्म भरवा कर, इन तथाकथित नौकरियों की संख्या को बढ़ा कर दिखाएं।