फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भाजपा सरकार और उसके नेता बीते करीब दो साल से जिस एफएनजी का ढोल जोर शोर से बजा रहे थे वह फट गया। इसके फटने की घोषणा खुद सरकार ने कर दी, जिसकी संभावना मज़दूर मोर्चा पहले से ही जताता चला आ रहा था। सुधी पाठक पढ़ चुके हैं कि एफएनजी केवल चुनावी प्रोपेगंडा के अलावा कुछ भी नहीं है। मार्च 2024 में केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने भी गाल बजाए थे कि राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से एफएनजी बनाने की मांग की गई जिसे मंजूर कर लिया गया। सुधी पाठक बताते चलें कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे बनने के कारण एनएचएआई पहले ही एफएनजी की उपियोगिता को नकार चुकी है। बावजूद इसके एक बार फिर मीडिया में ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट एनएचएआई को दिए जाने की तैयारी की जा रही है। यह सिर्फ तैयारी ही रह जानी है, धरातल पर कुछ नहीं होगा।
भाजपा सरकार की बीते दस साल की कार्यशैली, केवल काम की बात करो काम करने की कोई जरूरत नहीं, ही रही है। इसी के तहत मई-जून 2022 में एफएनजी प्रोजेक्ट का शगूफा छोड़ा गया था। अब गोदी मीडिया के जरिए ढिंढोरा पिटवाया जा रहा है कि नोएडा अथॉरिटी द्वारा इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का जिम्मा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को देने नहीं, बल्कि देने के प्रयास शुरू हो गए हैं। प्राधिकरण दो तीन बार पहले भी इसके प्रयास कर चुका है। यानी एफएनजी बनाने का प्रयास नोएडा प्राधिकरण कर रहा था और केंद्रीय मंत्री गूजर सहित अन्य राजनेता झूठी वाहवाही बटोरने के लिए यहां घोषणाओं पर घोषणाएं किए जा रहे थे।
जानकारों के अनुसार नोएडा प्राधिकरण ने प्रोजेक्ट बनाया तो था लेकिन यमुना पुल पर बनने वाले पुल की कनेक्टिविटी के लिए अप्रोच रोड के लिए जरूरी जमीन का आज तक प्रबंध नहीं हो सका है। उत्तर प्रदेश में बहुत से किसान अपनी जमीन देने को तैयार ही नहीं हैं और उन्होंने न्यायालय केस डाल रखा है। इसी दौरान ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे का अधिकांश हिस्सा बनकर तैयार हो चुका था। यूपी सरकार ने एफएनजी का काम एनएचएआई को दिए जाने के लिए भारत सरकार से पत्राचार भी किया था। सर्वे करने के बाद एनएचएआई टीम ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे के कारण एफएनजी को गैर जरूरी बताते हुए इसके निर्माण का जिम्मा लेने से इनकार कर दिया था। बताया जा रहा है कि बीते मंगलवार को नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी फरीदाबाद आकर हरियाणा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से मिले और एफएनजी निर्माण पर चर्चा हुई। प्राधिकरण के अधिकारियों ने यूपी पक्ष की डीपीआर तैयार होने का दावा किया।
एफएनजी की योजना अभी तक हवा हवाई इसलिए भी है कि उत्तर प्रदेश में इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन की व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी है। प्राधिकरण के अधिकारी मानते हैं कि जमीन का मसला आसानी से सुलझने वाला नहीं है, भविष्य में यदि जमीन मिल भी गई तो कनेक्टिविटी के लिए एक एलिवेटेड रोड, एक अंडरपास और एक फ्लाईओवर भी बनाने के बाद ही यमुना पुल तक पहुंच सकेंगे, जो निकट भविष्य में होता तो दिख नहीं रहा।
ये समस्याएं तो उत्तर प्रदेश पक्ष की हैं, हरियाणा में तो अभी तक सिर्फ ढिंढोरेबाजी है धरातल पर कुछ भी नहीं। हालांकि फरवरी 2023 में गोदी मीडिया ने यशोगान करते हुए बताया था कि एफएनजी मार्ग ग्रेटर फरीदाबाद में स्थित अम्मा के अस्पताल से रिवाजपुर, शेरपुर खादर, लालपुर, किड़ावली गांव के पास से होते हुए सेक्टर-92 पन्हेड़ा कला तक जाएगा। यहां पर एक नया पुल यमुना नदी पर बना कर 90 मी. चौड़ी सडक़ को जोड़ा जायेगा जो ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 157 से जाकर जुड़ेगी। से सारी घोषणाएं जुमला ही हैं।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार फरीदाबाद में तो यह भी तय नहीं हो पाया है कि यमुना नदी पर पुल कहां बनाया जाएगा, एक दो जगहों के नाम लिए जा रहे हैं। यदि पुल बन भी गया तो उसकी अप्रोच रोड के लिए आवश्यक जमीन का चिह्नांकन भी नहीं किया गया है। अप्रोच रोड से अम्मा के अस्पताल तक कनेक्टिविटी के लिए प्रस्तावित मार्ग का फाइनल रूट क्या होगा तय नहीं है, इसके लिए जमीन हासिल करने के लिए किसानों से संपर्क किया गया है या नहीं यह कोई नहीं बता रहा। मजे की बात यह भी है कि है परियोजना किस दिन शुरू होगी और किस दिन पूरी होगी इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है और न ही कभी किया जायेगा। यह प्रोजेक्ट भी मंझावली पुल प्रोजेक्ट की तरह ही झूठ साबित होने वाला है।
समझने वाली बात ये है कि बैठक में कुछ ठोस तय नहीं हुआ है केवल इतना कि प्रोजेक्ट एनएचएआई को देने की कोशिश की जाएगी। कोशिश से कोई प्रोजेक्ट तैयार नहीं होता, इसके लिए कागजों से लेकर धरातल तक सब कुछ फूलप्रूफ ढंग से तय होता है। रही बात एनएचएआई की तो उसके परियोजना निदेशक धीरज सिंह ने एफएनजी मार्ग प्रोजेक्ट से स्पष्ट इनकार किया है। उनके अनुसार एनएचएआई को हरियाणा या उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एफएनजी परियोजना का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।