फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) स्मार्ट सिटी के तहत खट्टर सैनी सरकारों ने पिछले दस वर्षों में पार्कों के सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये की लूट-बांट की, नतीजा है कि शहर के लगभग सभी पार्क बदतर हाल में हैं। हरियाली की जगह इनमें गंदगी, टूटे फूटे झूले, टूटी बेंच, उखड़ा ट्रैक आदि नजर आ जाएंगे।
इन पार्कों की दुर्दशा की जिम्मेदार नगर निगम, स्मार्ट सिटी तब से लेकर आज तक धनेश अदलखा जैसे भ्रष्ट पार्षद और अब विधायक और उसके संरक्षक केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के इशारों पर ही काम कर रहे हैं। तीसरी बार सरकार बनने पर धनेश इन पार्कों के नाम पर लूट कमाई करने की तैयारी फिर से कर रहा है। जुमलाजीवी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में स्मार्ट सिटी का झुनझुना बजाया था। फरीदाबाद शहर को भी स्मार्ट सिटी में शामिल किया गया था। तब शहर के सभी पार्कों में ओपन जिम, झूले, कैनोपी, पक्का पैदल ट्रैक स्थापित करने का प्रोजेक्ट बनाया गया था। उस समय धनेश अदलखा पार्षद था और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के संरक्षण में नगर निगम का बेताज बादशाह बना हुआ था। निगम सूत्रों के अनुसार अदलखा-गूजर की जोड़ी ने तब पार्कों में झूले, कैनोपी, ओपन जिम लगाने का ठेका अपने चहेते को दिलवाया था। ज़ाहिर है कि यह ठेका दिलाने के एवज में ठेकेदार ने दोनों को नजराना पेश किया होगा।
दो सौ करोड़ रुपये डकारने वाले नगर निगम के अधिकारियों ने भी इस प्रोजेक्ट में कमीशन बनाया। नगर निगम सूत्र बताते हैं कि ओपन जिम, झूले, कैनोपी आदि को लगाने और दस साल तक उनका मेंटिनेंस करने की शर्त ठेके में तय हुई थी लेकिन कमीशनखोरी के कारण ओपन जिम तो लगते ही टूटने लगे थे। कैनोपी तो कुछ ही पार्कों में लगाई गई बाकी कागजों में ही लगी और भुगतान भी कर दिया गया। झूले भी दस साल के लिए लगाए गए थे, जो लगे उन्होंने दस महीने भी नहीं पकड़े और जो लगे ही नहीं उनका कहना ही क्या? अधिकतर टूटने के बाद गायब भी हो गए। वर्तमान में शहर में एक भी पार्क ऐसा नहीं हैं जिसमें ओपन जिम के सभी उपकरण सही हों और काम कर रहे हों, कैनोपी तो कुछ पार्कों में ही मिलेगी। मंगलवार को विधायक धनेश अदलखा ने नगर निगम, एफएमडीए और स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्हें अधिकारियों से पूछना चाहिए था कि दस साल से भाजपा की डबल इंजन सरकारों के बावजूद शहर के पार्कों की दुर्दशा क्यों हुई। पार्कों से झूले, कैनोपी, ओपन जिम कहां गए? जो बचे खुचे हैं वो बेकार क्यों पड़े हैं? इसका जिम्मेदार कौन है? उसके खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश सरकार से करते।
पूछें तो तब न जो बीते दस साल की लूट में वह खुद शामिल न रहे हों। इसके विपरीत उन्होंने अधिकारियों को पार्कों में ओपन जिम, कैनोपी, झूले लगाने का निर्देश दिया। लूट कमाई और कमीशनखोरी के अभ्यस्त अधिकारियों ने भी तुरंत विधायक की हां में हां मिलाई। जानकारों का मानना है कि दस साल पूर्ण होने से पहले नया ओपन जिम, कैनोनी, झूले लगाया जाना नियमानुसार ठीक नहीं होगा। विधायक अदलखा अपनी पार्षद वाली मानसिकता से ऊपर नहीं उठ पाए हैं और अपने चहेते को फिर से ये ठेके दिलाने को लालायित दिख रहे हैं, इसीलिए उन्हें विकास के लिए सबसे पहले पार्कों से कमाई वाले आइटम ही नजर आए। अब देखना ये है कि पार्कों में आइटम लगाने का ठेका अदलखा-गूजर के चहेते को मिलेगा या शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल दखल देंगे।