फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम की जिम्मेदारी नगर विन्यास को बिगाडऩे वाले अवैध निर्माण के खिलाफ तोडफ़ोड़ की कार्रवाई करने की है लेकिन इसके हरामखोर अधिकारी इसके उलट अवैध निर्माण को संरक्षण देने में लगे हैं। समझा जा सकता है कि वो इसके लिए अवैध निर्माण करने वालों से मोटी रिश्वतें लेते हैं, जो पैसा देता है उसको हर तरह से संरक्षण दिया जाता है और जो नहीं देता उसका निर्माण तोड़ दिया जाता है। इस तरह कार्रवाई रजिस्टर भी दुरुस्त रखा जाता है।
रिश्वत लेकर अवैध निर्माण कराने वाला बेईमानी का धंधा निगम में बड़ी ईमानदारी से चल रहा है इसका उदाहरण मुजेसर गांव में अवैध रूप से बनाई गई दुकान और मकान है। यहां के लालाजी ने एक विवादित जमीन पर एक-डेढ़ महीने पहले दुकान और मकान बनाना शुरू किया था। यह इलाका बल्लभगढ़ नगर निगम के एसडीओ अमित चौधरी और जेई परवेज आलम के अंडर आता है। नगर निगम में चर्चा थी कि लालाजी ने अवैध निर्माण के लिए परवेज आलम को चार लाख रुपये नजराना दिया। मज़दूर मोर्चा ने 9-15 मार्च 2025 के अंक में ‘जेई द्वारा चार लाख रिश्वत लेकर अवैध निर्माण करवाने की चर्चा, नगर निगम में चल रहा रिश्वत दो और अवैध निर्माण करो का गोरखधंधाÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।
तब एसडीओ अमित चौधरी ने चुनाव ड्यूटी के कारण मामले से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए जेई परवेज आलम से पूछने को कहा था। जेई परवेज आलम ने बताया था कि उसे मामले की जानकारी थी और नोटिस भी कई दिन से बना कर रखी गई थी लेकिन भेज नहीं पाया था, अधिकारी से हस्ताक्षर कर जल्द भेजने की बात कही थी। जैसा कि मज़दूर मोर्चा ने आशंका जताई थी कि नोटिस दिए जाने के साथ ही निर्माणकर्ता से जल्द निर्माण पूरा कराने को कहा जाएगा वैसा ही हुआ। नोटिस दी गई या नहीं लेकिन इमारत पर दूसरी छत भी डाल दी गई।
इस संबंध में पूछे जाने पर जेई परवेज आलम ने बताया कि निर्माणकर्ता को फिर से नोटिस दिया जाएगा। पहले कारण बताओ का नोटिस दिया गया था और अब क्यों न तोड़ दिया जाए का नोटिस भेजा जाएगा। जाहिर है कि जेई साहब नोटिस-नोटिस का खेल खेल कर लाला जी को निर्माण कार्य पूरा कराने का समय मुहैया करा रहे हैं। चार लाख रिश्वत के सवाल पर परवेज आलम ने भड़कते हुए कहा जाओ नहीं तोड़ूंगा अवैध निर्माण, जिसने पैसा दिया है पहले उसको सामने लेकर आओ। अब भला रिश्वत देने वाला क्यों बताएगा कि उसने पैसा दिया क्योंकि रिश्वत के एवज में उसने अवैध निर्माण कर डाला, और भूतल पर बाकायदा सामान रख कर बस भी गया। निगम सूत्र बताते हैं कि जेई परवेज आलम चीफ सेक्रेटरी कार्यालय से सेवानिवृत्त सूबे खान को परिवार का करीबी बता कर रौब झाड़ता है।
बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद से उनके भाई टिप्परचंद के जरिए प्रगाढ़ संबंध बना रखे हैं। बताया जाता है कि परवेज आलम अवैध कमाई की हिस्सापत्ती टिप्परचंद को देकर खुश रखता है। यही कारण है कि वह संयुक्त आयुक्त करन कुमार को भी कुछ नहीं समझता, यदि अधिकारी सख्ती करते हैं तो विधायक मूलचंद से उसे धमकी दिलाता है। अब न लाला जी कहेंगे कि उन्होंने रिश्वत दी और परवेज आलम भी नहीं कहेंगे कि उन्होंने रिश्वत ली, वैसे भी इन कामों की कोई रसीद तो न ली जाती है न दी नहीं जाती है, लेकिन धड़ल्ले से बनाई जा रही अवैध इमारत चीख-चीख कर बता रही है कि वह रिश्वत के पैसों के दम पर ही खड़ी है। अगर जेई परवेज आलम रिश्वत नहीं लिए होते वो वहां एक ईंट भी नहीं रखने देते, नोटिस तो दूर की बात, खुद मौके पर पहुंच कर कार्रवाई कर डालते। वो नहीं करेंगे, अगर उन्होंने कोई कार्रवाई की तो चार लाख रुपये वापस करने पड़ जाएंगे जो नामुमकिन है, क्योंकि हिस्सा तो महंगे लहंगों की शौकीन मैडम तक बंट चुका है। ऐसे में जेई परवेज आलम का यह कहना कि जाओ नहीं तोड़ूंगा अवैध निर्माण, रिश्वत लेकर काम कराने की उनकी प्रतिबद्धता और नगर निगम में ऊपर तक फैले भ्रष्टाचार को दर्शाता है।
निगम के जानकार बताते हैं कि सिर्फ मुजेसर में ही नहीं पूरे फरीदाबाद में धड़ल्ले से अवैध निर्माण किया जा रहा है। वैसे तो नगर निगम कहीं भी कभी भी किसी का निर्माण अवैध कह कर तोड़ देती है, गरीब बस्तियां बिना नोटिस के ही उजाड़ दी जाती हैं लेकिन लाला प्रमोद के अवैध निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। अवैध निर्माणकर्ता से संबंधित जेई-एसडीओ बाकायदा लोकेशन, निर्माण का रकबा और मंजिल के हिसाब से नजराना राशि वसूलते हैं। सिर्फ जेई-एसडीओ ही यह धन नहीं रख लेते, एक्सईएन के जरिए महंगे गिफ़्ट और लहंगे की शौकीन मैडम निगमायुक्त तक भी पहुंचाया जाता है। यही कारण है कि मैडम ने आज तक अवैध निर्माणों के खिलाफ तोडफ़ोड़ करने का कोई भी आदेश जारी नहीं किया, हाईकोर्ट के आदेश का पालन भी मजबूरी में कराया जाता है।
मैडम वहीं कार्रवाई करने के आदेश देती हैं जहां से कार्रवाई रोकने के लिए नजराना मिलने की संभावनाएं हों, उदाहरण के लिए उन्होंने साप्ताहिक बाजारों को बंद करवाने का आदेश जारी किया था। आदेश का असर यह हुआ कि बाजार वालों ने दुकानदारों से ज्यादा वसूली चालू कर दी, कारण बताया गया कि नगर निगम के अधिकारियों को ज्यादा पैसा देना पड़ रहा है। बेचारे पटरी दुकानदार डेढ़ गुना वसूली शुल्क देकर साप्ताहिक बाजार में दुकान ले रहे हैं, यानी बाजार ज्यों के त्यों लग रहे हैं लेकिन रेट बढ़ गए।